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खगडा मेला को साल दर साल आगे बढ़ाया जा रहा: डीएम

Updated at : 12 Jan 2026 9:38 PM (IST)
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खगडा मेला को  साल दर साल आगे बढ़ाया जा रहा: डीएम

जिले के ऐतिहासिक खगड़ा मेले का उद्घाटन डीएम विशाल राज ने दीप प्रज्वलित कर किया

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खगड़ा मेले का उद्घाटन डीएम ने दीप प्रज्वलित कर किया किशनगंज जिले के ऐतिहासिक खगड़ा मेले का उद्घाटन डीएम विशाल राज ने दीप प्रज्वलित कर किया. इस दौरान जिला परिषद अध्यक्षा रुकिया बेगम, एमजीएम मेडिकल कॉलेज के रजिस्ट्रार डॉ इच्छित भारत, अपर समाहर्ता अमरेन्द्र कुमार पंकज व अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप सेइस दौरान खगड़ा मेला संवेदक सुबीर कुमार व बबलू साहा भी उपस्थित थे. इस अवसर पर डीएम विशाल राज ने कहा कि खगडा मेला की एतिहासिक पृष्ठभूमि रही है और यह काफी अच्छी बात है कि इसे साल दर साल आगे बढ़ाया जा रहा है और हम इस इतिहास का हिस्सा बन रहे है. उन्होंने कहा कि मेला का स्वरूप समय के साथ बदल रहा है और मेला भी आधुनिक दौर में अपने आप को समय के साथ अपडेट कर रहा है. वहीं एमजीएम मेडिकल कॉलेज के रजिस्ट्रार डॉ इच्छित भारत ने कहा कि जिला गंगा- जमुनी तहजीब की मिसाल है.कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार झा, वरीय उपसमाहर्ता, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी कुंदन कुमार सिंह, डीएसपी मुख्यालय अशोक कुमार, वरीय जदयू नेता प्रो बुलंद अख्तर हाशमी, रेड क्रॉस के सचिव मिक्की साहा, वार्ड पार्षद मनीष जालान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे. खगड़ा मेला का इतिहास जानकार बताते हैं कि मेला का इतिहास काफी गौरवशाली रहा है. कभी यह सोनपुर के बाद एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला था. देश के अन्य प्रदेशों से आये व्यापारी मेले में अपने विशिष्ट उत्पादों के स्टॉल लगाकर मेले की रौनक में चार चांद लगा रहें हैं. जानकार बताते है कि तत्कालीन खगड़ा नवाब सैयद अता हुसैन ने मेले की नींव रखी थी. तब अंग्रेजी हुकूमत थी. पूर्णिया के समाहर्ता अंग्रेज अधिकारी ए विक्स थे. उन्होंने इस मेले में काफी सहयोग किया था एवं पहली बार इस मेले का नाम उन्हीं के नाम पर विक्स मेला रखा गया. 1956 में जमींदारी प्रथा उन्मूलन के बाद यह मेला राजस्व विभाग के अधीन आ गया. जिलावासियों को रहता है इन्तेजार इस मेले को लेकर आज भी शहरवासियों सहित आस-पास के क्षेत्र के लोगों में काफी उत्साह होता है. लोग वर्ष भर इस मेले के इंतजार में रहते हैं. विशेषकर बच्चों में इस मेले को लेकर विशेष आकर्षण होता है. मेले का क्षेत्रफल सिकुड़ जाने व विभिन्न तरह के पशु पक्षियों के नहीं आने के बावजूद आधुनिक खेल तमाशों का आकर्षण बच्चों में बना हुआ है. लेकिन अब एक बार फिर से मेला पूरे शबाब पर है. मेले घूमने, खरीदारी करने के लिए लोग लगातार मेला पहुंच रहने है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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