ठाकुरगंज के स्कूलों में सफाई मद पर खर्च के मामले में सूचना देने कतरा विभाग

Published at :24 Apr 2026 8:42 PM (IST)
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ठाकुरगंज के स्कूलों में सफाई मद पर खर्च के मामले में सूचना देने कतरा विभाग

आरटीआई के तहत जवाब में यह सूचना दी गयी कि सफाई कार्य के लिए कर्मियों की नियुक्ति एजेंसी करती है.

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-आरटीआई में टालमटोल जवाब से उठे सवाल ठाकुरगंज प्रखंड के सरकारी विद्यालयों में हाउसकीपिंग व सफाई मद में खर्च को लेकर दायर सूचना के अधिकार आवेदन में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं. आवेदक द्वारा मांगी गई विस्तृत जानकारी के जवाब में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय ने अधिकांश बिंदुओं पर या तो “कोई सूचना उपलब्ध नहीं” बताया या अस्पष्ट जवाब देकर मामले को टालने की कोशिश की. सूचना के अधिकार के तहत 12 बिन्दुओं पर पूछे गये जबाब को केवल चार बिन्दुओं में जवाब देकर टालने का प्रयास किया गया है. बताते चले वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक के बजट, खर्च, नियुक्त एजेंसियों, भुगतान प्रक्रिया, बिल-वाउचर, निरीक्षण रिपोर्ट और शिकायतों का विवरण मांगा गया था. लेकिन विभाग ने जवाब में कहा कि हाउसकीपिंग कार्य हेतु कोई बजट या आवंटन उनके कार्यलय में उपलब्ध नहीं है और न ही संबंधित खर्च का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध है. अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब विद्यालयों में नियमित रूप से सफाई कार्य होता है, तो फिर बिना बजट और बिना रिकॉर्ड के यह काम कैसे संचालित हो रहा है. और बजट की जानकारी प्रखंड शिक्षा कार्यालय को क्यों नहीं है. वही आरटीआई के तहत जवाब में यह सूचना दी गयी कि सफाई कार्य के लिए कर्मियों की नियुक्ति एजेंसी करती है. वहीं भुगतान, निगरानी और जवाबदेही को लेकर भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई. हाउसकीपिंग मद में किए गए भुगतान के बिल, वाउचर, मस्टर रोल की प्रमाणित प्रति मांगे जाने पर बीईओ का मानना है कि अधोहस्ताक्षरी कार्यालय के द्वारा विद्यालय से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार कार्य विवरणी जिला को भेजा जाता है . राशि निकासी की कोई सूचना उपलब्ध नहीं होने की जानकारी बीईओ कार्यालय को नहीं है. जानकारों का मानना है कि यह मामला वित्तीय अनियमितताओं और रिकॉर्ड में पारदर्शिता की कमी की ओर इशारा करता है. आरटीआई एक्ट के तहत किसी भी सरकारी खर्च का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है, ऐसे में “सूचना उपलब्ध नहीं” कहना कानून की भावना के विपरीत है. आवेदक ने इस मामले में प्रथम अपील दायर करने की तैयारी कर ली है और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है. अब देखना होगा कि उच्च अधिकारी इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं और क्या स्कूलों में सफाई मद के खर्च का सच सामने आ पाता है या नहीं.

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