दिघलबैंक भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में निर्माणाधीन सीमा सड़क वर्षों बाद अब अपने अंतिम चरण में पहुंचती दिख रही है. उल्लेखनीय है कि इस सीमा सड़क परियोजना को वर्ष 2010 में केंद्र सरकार से मंजूरी मिली थी, लेकिन विभिन्न कारणों से इसका कार्य लंबे समय तक अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सका. स्थानीय लोगों के अनुसार भूमि अधिग्रहण में देरी, तकनीकी अड़चनें, प्रशासनिक स्वीकृतियों में विलंब, बजट और ठेकेदारी संबंधी समस्याओं के चलते सड़क और पुल-पुलिया निर्माण कार्य कई वर्षों तक धीमा पड़ा रहा. इसके कारण यह महत्वपूर्ण सीमा सड़क अधर में लटकी रही और आम लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी. अब स्थिति बदलती नजर आ रही है.सीमा सड़क पर पुल-पुलिया निर्माण कार्य तेज़ी से जारी है और कई स्थानों पर ढांचागत कार्य पूरा हो चुका है.इस संबंध में स्थानीय जदयू विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने कहा कि वर्ष 2026 तक सभी पुल-पुलिया का निर्माण पूर्ण कर सीमा सड़क को पूरी तरह सुचारू कर दिया जाएगा.उन्होंने कहा कि यह सड़क लंबे समय से लंबित थी, लेकिन अब सरकार इसे अंतिम वर्ष में हर हाल में पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है. विधायक ने बताया कि सड़क चालू होने से सीमावर्ती क्षेत्र के आम नागरिकों को आवागमन में सहूलियत मिलेगी, वहीं व्यापार-व्यवसाय को भी बढ़ावा मिलेगा. किसानों, छोटे व्यापारियों और स्थानीय युवाओं के लिए यह सड़क विकास का नया रास्ता खोलेगी. सीमा क्षेत्र के लोगों में अब यह उम्मीद जगी है कि वर्षों का इंतजार जल्द समाप्त होगा और सीमा सड़क क्षेत्र के विकास की रीढ़ साबित होगी.
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