एनीमिया को नजरअंदाज करना बना सकता है खतरे का कारण: सीएम

Updated at : 26 Mar 2026 6:28 PM (IST)
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एनीमिया को नजरअंदाज करना बना सकता है खतरे का कारण: सीएम

एनीमिया अर्थात शरीर में खून की कमी महिलाओं, विशेषकर गर्भवती व धात्री माताओं के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है

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-एनीमिया पर सशक्त प्रहार: मातृ स्वास्थ्य सुरक्षा हेतु फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज इंजेक्शन थेरेपी अभियान का शुभारंभ

– खून की कमी से जूझ रही महिलाओं को मिलेगा त्वरित उपचार, सुरक्षित मातृत्व की दिशा में ठोस पहल- सदर अस्पताल किशनगंज में सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने किया उद्घाटन, 10 एनीमिक माताओं को लगाया गया इंजेक्शनकिशनगंज

एनीमिया अर्थात शरीर में खून की कमी महिलाओं, विशेषकर गर्भवती व धात्री माताओं के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है. यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब शरीर में आयरन की कमी हो जाती है, जिससे हीमोग्लोबिन का स्तर घट जाता है. इसके कारण महिलाओं को अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना, सांस फूलना, थकान, हृदय गति का तेज होना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग ने फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज इंजेक्शन थेरेपी अभियान का शुभारंभ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया. यह पहल राज्यभर में खून की कमी से पीड़ित महिलाओं को त्वरित और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. जिले में इस अभियान की शुरुआत सदर अस्पताल में सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी के नेतृत्व में की गई. इस अवसर पर 10 एनीमिया से ग्रसित माताओं को फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज इंजेक्शन लगाया गया, जिससे उनके शरीर में आयरन की कमी को तेजी से दूर करने का प्रयास किया गया.

सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने कहा कि एनीमिया मातृ स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिसे नजरअंदाज करना खतरे का कारण बन सकता है. फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज इंजेक्शन थेरेपी के माध्यम से गंभीर रूप से एनीमिया से पीड़ित महिलाओं को तेजी से लाभ पहुंचाया जा सकता है. यह उपचार शरीर में आयरन की कमी को शीघ्र पूरा करता है और बार-बार रक्त चढ़ाने की आवश्यकता को कम करता है.

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण पहल

जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुमन सिन्हा ने अभियान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एनीमिया केवल एक सामान्य समस्या नहीं, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा है. इससे प्रसव के दौरान होने वाले जोखिमों में कमी आएगी और सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित होगा. उन्होंने बताया कि आशा व एएनएम के माध्यम से घर-घर जाकर एनीमिया से ग्रसित महिलाओं की पहचान की जा रही है और उन्हें स्वास्थ्य संस्थानों से जोड़कर यह उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है.

स्वस्थ मां, सुरक्षित भविष्य

डीपीएम डॉ मुनाजिम ने कहा कि यह अभियान माताओं के स्वास्थ्य में सुधार लाने के साथ-साथ नवजात शिशुओं के बेहतर विकास में भी सहायक सिद्ध होगा. स्वास्थ्य विभाग की यह पहल एनीमिया मुक्त समाज की दिशा में एक मजबूत कदम है, जिससे “स्वस्थ मां, स्वस्थ शिशु” का लक्ष्य साकार किया जा सकेगा. सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने सभी गर्भवती महिलाओं से अपील की है कि वे नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं, आयरन युक्त संतुलित आहार लें और चिकित्सकों की सलाह के अनुसार उपचार प्राप्त करें, ताकि खून की कमी जैसी गंभीर समस्या से बचा जा सके.

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