पहाड़िया एक्सप्रेस के प्रतिदिन परिचालन की मांग

पूर्वोत्तर सीमा रेल से प्राप्त दो अलग-अलग आरटीआई जवाबों ने रेलवे की योजना, पारदर्शिता व निर्णय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं
ठाकुरगंज पूर्वोत्तर सीमा रेल से प्राप्त दो अलग-अलग आरटीआई जवाबों ने रेलवे की योजना, पारदर्शिता व निर्णय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जहां एक ओर एक महत्वपूर्ण ट्रेन को दैनिक चलाने का मामला वर्षों से विचाराधीन बना हुआ है. वहीं दूसरी ओर पहले से ही यात्री भार से कराह रही एक ट्रेन का विस्तार बिना किसी ठोस अध्ययन व प्रभाव आकलन के लागू कर दिया गया. पहाड़िया एक्सप्रेस को दैनिक करने की मांग उत्तर बंगाल को समुद्री तट दीघा से सीधे जोड़ने वाली एक मात्र ट्रेन पहाड़िया एक्सप्रेस को साप्ताहिक से दैनिक चलाने को ले रेलवे के पास कोई विचार नहीं है. इस ट्रेन के प्रतिदिन परिचालन की मांग लगातार हो रही है. आरटीआई में यह खुलासा हुआ कि दार्जिलिंग सांसद राजू बिष्ट ने उक्त ट्रेन को सप्ताह में दो दिन चलाने का अनुरोध करने के बाबजूद रेलवे ने इस मामले में कोई व्यवहार्यता अध्ययन नहीं किया. रेलवे के आस यात्रियों की संख्या, राजस्व और औसत लोड का डेटा तक उपलब्ध नहीं. संचालन पर प्रभाव का कोई विश्लेषण तो है ही नहीं. इस मामले में फाइल नोटिंग या निर्णय प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं है. यह स्थिति दर्शाती है कि जिस मुद्दे पर जनता और जनप्रतिनिधियों की स्पष्ट मांग है, उस पर रेल अभी तक आधारभूत तैयारी भी नहीं कर पाया है. दूसरी ओर बिना अध्ययन के ट्रेन विस्तार लागू एक दूसरी आरटीआई से यह सामने आया कि सिलीगुड़ी–बालुरघाट इंटरसिटी एक्सप्रेस (15463/15464) का विस्तार हल्दीबाड़ी तक 11 मार्च से लागू कर दिया गया है. लेकिन इस विस्तार के संदर्भ में कोई विस्तृत प्रभाव अध्ययन रिपोर्ट रेलवे के पास उपलब्ध नहीं. ट्रेन के विस्तार से समय पालन, लाइन क्षमता और अन्य ट्रेनों पर असर का आकलन तक नहीं किया गया. रेलवे ने यह जरूर कहा कि विस्तार के बाद इन पहलुओं का मूल्यांकन किया जाएगा, लेकिन सवाल यह उठता है कि बिना पूर्व अध्ययन के ही इतना बड़ा निर्णय क्यों लिया गया. सांसद की मांग, लेकिन निर्णय अधर में जहां एक ओर दार्जिलिंग सांसद द्वारा ट्रेन की आवृत्ति बढ़ाने की मांग की गई. वहीं रेलवे स्तर पर कोई अंतिम निर्णय नहीं प्रस्ताव विचाराधीन भी नहीं बताया गया. यह दर्शाता है कि जनप्रतिनिधियों की मांगों को भी ठोस प्रक्रिया में नहीं लाया जा रहा. बताते चले शुक्रवार को एनजीपी से ठाकुरगंज होते हुए दीघा तक ट्रेन सप्ताह में केवल एक दिन ही परिचालित हो रही है, वहीं वापसी में दीघा से शनिवार को यह ट्रेन खुलती है.
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