क्या एक मानवीय भूल पर निलंबन उचित? शिक्षक का मामला बना चर्चा का विषय

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ठाकुरगंज के मास्टर ट्रेनर और जनगणना सुपरवाइजर मोहम्मद नाहिद रजा के निलंबन का पूरा मामला। क्या एक छोटी सी मानवीय भूल पर इतनी कठोर कार्रवाई सही है?

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किशनगंज : ठाकुरगंज में एक शिक्षक के निलंबन का मामला अब केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है. जनगणना-2027 के सुपरवाइजर और वीएसएस प्रशिक्षण के मास्टर ट्रेनर रह चुके शिक्षक मोहम्मद नाहिद रजा पर हुई कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया, तथ्यों के परीक्षण और मानवीय दृष्टिकोण को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं. हालांकि, पूरा मामला फिलहाल विभागीय जांच के अधीन है और अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा.

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जनगणना सुपरवाइजर और मास्टर ट्रेनर की निभाई थी जिम्मेदारी

उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, मोहम्मद नाहिद रजा को 24 अप्रैल 2026 को प्रखंड विकास पदाधिकारी सह जनगणना चार्ज अधिकारी, ठाकुरगंज ने जनगणना-2027 के लिए सुपरवाइजर नियुक्त किया था. उनके अधीन कई प्रगणकों को कार्य आवंटित किया गया था.

इससे पहले जनवरी से मार्च 2026 तक उन्होंने ठाकुरगंज प्रखंड के विद्यालयों में वीएसएस प्रशिक्षण कार्यक्रम के मास्टर ट्रेनर के रूप में भी सेवाएं दी थीं. बचाव पक्ष का कहना है कि उनका सेवा रिकॉर्ड जिम्मेदार और सक्रिय अधिकारी का रहा है.

बेटी के नामांकन के लिए मांगी थी बाहर जाने की अनुमति

दस्तावेजों के अनुसार, शिक्षक ने 11 मई 2026 को अपनी बेटी के विद्यालय में नामांकन के लिए कुछ दिनों तक जिला से बाहर जाने की अनुमति प्रखंड विकास पदाधिकारी सह जनगणना चार्ज अधिकारी से मांगी थी. इसी अवधि के लिए उन्होंने विद्यालय में आकस्मिक अवकाश का आवेदन भी दिया था.

बचाव पक्ष का दावा है कि उन्होंने अपनी अनुपस्थिति छिपाने का प्रयास नहीं किया, बल्कि संबंधित अधिकारियों को पहले से इसकी जानकारी दे दी थी.

'मार्क ऑन ड्यूटी' की एंट्री के बाद शुरू हुआ विवाद

मामले में विवाद तब शुरू हुआ, जब 14 मई 2026 को ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दूरस्थ स्थान से मार्क ऑन ड्यूटी दर्ज हो गया. जिला शिक्षा विभाग ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए शिक्षक को निलंबित कर दिया.

अपने स्पष्टीकरण में शिक्षक ने स्वीकार किया कि नई दिल्ली में रहने के दौरान मानवीय भूलवश यह प्रविष्टि दर्ज हो गई. उनका कहना है कि यह जानबूझकर नहीं, बल्कि तकनीकी और मानवीय त्रुटि थी.

कार्रवाई को लेकर उठ रहे हैं सवाल

इस मामले में अब कई प्रश्न उठ रहे हैं. क्या निलंबन से पहले जनगणना चार्ज अधिकारी से यह सत्यापित किया गया कि संबंधित शिक्षक जनगणना की जिम्मेदारी निभा रहे थे? क्या जिला से बाहर जाने की अनुमति और अवकाश से जुड़े दस्तावेजों का समुचित परीक्षण किया गया? क्या शिक्षक के पूर्व सेवा रिकॉर्ड और उनके दायित्वों को भी विभाग ने निर्णय लेते समय ध्यान में रखा?

इन सभी सवालों के जवाब विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे.

जांच के बाद ही होगा अंतिम निर्णय

सरकारी सेवा में अनुशासन और नियमों का पालन अनिवार्य है. वहीं, कुछ लोगों का यह भी मानना है कि तकनीकी या मानवीय भूल के मामलों में कर्मचारी की मंशा, परिस्थितियां, पूर्व सेवा रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों का समग्र मूल्यांकन भी किया जाना चाहिए.

फिलहाल यह मामला विभागीय जांच के अधीन है. अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी उपलब्ध साक्ष्यों, विभागीय नियमों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर लेंगे. इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा.

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