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परिवार नियोजन मेला: छोटा परिवार, सुखी परिवार, जागरूकता से स्वस्थ समाज की ओर

Updated at : 09 Sep 2025 6:54 PM (IST)
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परिवार नियोजन मेला: छोटा परिवार, सुखी परिवार, जागरूकता से स्वस्थ समाज की ओर

जब लोग परिवार नियोजन अपनाते हैं, तो मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आती है,

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किशनगंज

आज के दौर में परिवार नियोजन सिर्फ एक स्वास्थ्य सेवा नहीं, बल्कि समाज की प्रगति और विकास का आधार है. जब परिवार छोटा और संतुलित होता है, तब बच्चों की शिक्षा, पोषण और देखभाल बेहतर तरीके से संभव हो पाती है. मातृ-शिशु मृत्यु दर घटाने और आर्थिक स्थिरता लाने में परिवार नियोजन अहम भूमिका निभाता है. इसी उद्देश्य से किशनगंज प्रखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मिशन परिवार विकास अभियान अंतर्गत परिवार नियोजन मेले का आयोजन किया गया.प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित इस मेले का उद्घाटन प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. आफताब आलम ने किया. उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि परिवार नियोजन केवल जनसंख्या नियंत्रण का साधन नहीं है, बल्कि एक ऐसा माध्यम है जो परिवार को स्वस्थ, सुरक्षित और खुशहाल जीवन की ओर ले जाता है. उन्होंने कहा कि जब परिवार छोटा और नियोजित होता है तो माता-पिता बच्चों पर ज्यादा ध्यान दे पाते हैं और भविष्य में सामाजिक असंतुलन की समस्याएं भी कम होती हैं.

छोटा परिवार, सुखी परिवार, स्वास्थ्य और संतुलन की राह

इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने समाज को संदेश देते हुए कहा कि छोटा परिवार, सुखी परिवार की अवधारणा न केवल परिवार के जीवन स्तर को ऊंचा उठाती है, बल्कि पूरे समाज में आर्थिक और सामाजिक संतुलन स्थापित करती है. उन्होंने बताया कि जब लोग परिवार नियोजन अपनाते हैं, तो मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आती है, शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और परिवार बेहतर जीवनशैली अपना पाता है. यह कदम समाज में स्थायी परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करता है.

अनियोजित गर्भधारण रोकना क्यों जरूरी

जिला योजना समन्वयक विश्वजीत कुमार ने इस अवसर पर विस्तार से बताया कि अनियोजित गर्भधारण मातृ एवं शिशु मृत्यु दर का सबसे बड़ा कारण है. इससे न केवल महिला का स्वास्थ्य प्रभावित होता है, बल्कि शिशु के जन्म के समय जटिलताएं भी बढ़ जाती हैं. उन्होंने जोर दिया कि हर दंपत्ति को पहला बच्चा 20 वर्ष की उम्र के बाद ही करना चाहिए और दूसरे बच्चे के बीच कम से कम तीन साल का अंतर रखना चाहिए. इससे मां स्वस्थ रहती है, शिशु को उचित पोषण मिलता है और परिवार मजबूत व खुशहाल बनता है.

परिवार नियोजन के प्रमुख साधन: सरल और सुरक्षित उपाय

प्राथमिक स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मेले में उपस्थित लोगों को परिवार नियोजन के सभी प्रमुख साधनों की जानकारी दी. इनमें महिला नसबंदी, पुरुष नसबंदी, कॉपर-टी, माला-एन गोली, अंतरा इंजेक्शन और छाया गोली शामिल हैं. इन सभी साधनों का सबसे बड़ा लाभ यह है कि ये पूरी तरह सुरक्षित, प्रभावी और लंबे समय तक कारगर साबित होते हैं. इनका उपयोग किसी भी झिझक के बिना किया जा सकता है और इनसे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुरक्षा मिलती है. यही साधन परिवार को सही अंतराल और संतुलन प्रदान करते हैं.

सरकार की प्रोत्साहन राशि से बढ़ेगा उत्साह

परिवार नियोजन साधन अपनाने वाले लाभार्थियों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाती है. महिला और पुरुष नसबंदी दोनों पर 3000 रुपये का प्रावधान है, जबकि उत्प्रेरक को 400 रुपये की राशि दी जाती है. प्रसव के तुरंत बाद बंध्याकरण कराने वाली महिलाओं को भी 3000 रुपये दिए जाते हैं. इसी तरह पीपीआईयूसीडी पर महिला को 2000 रुपये और आशा-एएनएम को 150-150 रुपये मिलते हैं. अंतरा इंजेक्शन लेने पर प्रति डोज 100 रुपये की राशि भी दी जाती है. यह प्रोत्साहन राशि लाभार्थियों को जागरूक और प्रेरित करती है कि वे परिवार नियोजन साधनों को अपनाएं और अपने जीवन को सुरक्षित बनाएं.

मेले में हुआ लाभार्थियों का पंजीकरण और सेवाएं

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने बताया कि मेले में लोगों की भागीदारी उत्साहजनक रही. इस दौरान के महिलाओं को कॉपर-टी, अंतरा इंजेक्शन, माला-एन गोली और कंडोम का निःशुल्क वितरण किया गया. उपस्थित स्वास्थ्यकर्मियों ने लाभार्थियों को हर साधन के उपयोग और लाभ के बारे में विस्तार से जानकारी दी. प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक ने कहा कि परिवार नियोजन के साधन अपनाकर माता-पिता अपने बच्चों को बेहतर भविष्य दे सकते हैं. जब परिवार छोटा होगा, तभी बच्चों की अच्छी शिक्षा, पोषण और परवरिश संभव होगी.

जिलाधिकारी की अपील: परिवार नियोजन समाज की जिम्मेदारी

इस अवसर पर जिलाधिकारी विशाल राज ने कहा कि परिवार नियोजन केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है. जब परिवार छोटा और नियोजित होता है, तब बच्चों को अच्छी देखभाल, शिक्षा और संसाधन आसानी से उपलब्ध हो पाते हैं. उन्होंने कहा कि अनियोजित परिवार समाज में असंतुलन और आर्थिक बोझ पैदा करते हैं. इसलिए हर नागरिक का दायित्व है कि वह परिवार नियोजन साधनों को अपनाकर स्वस्थ और सुरक्षित समाज निर्माण में योगदान दे. उन्होंने जिलेवासियों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की.

जागरूकता ही सुरक्षित भविष्य की गारंटी

सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने कहा कि परिवार नियोजन न केवल व्यक्तिगत जीवन को बेहतर बनाता है, बल्कि पूरे समाज को संतुलित, स्वस्थ और प्रगतिशील भी बनाता है. छोटे और नियोजित परिवार ही आने वाली पीढ़ी को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर दे सकते हैं. इसलिए अब समय आ गया है कि हम सब छोटा परिवार, सुखी परिवार के सिद्धांत को अपनाएं और अपने परिवार एवं समाज के भविष्य को सुरक्षित बनाएं. यही जागरूकता एक स्थायी और विकसित समाज की नींव है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AWADHESH KUMAR

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AWADHESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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