किशनगंज के सीमावर्ती क्षेत्र में स्वास्थ्य पहल, मोतियाबिंद मरीजों का मुफ्त होगा ऑपरेशन
मुखिया प्रतिनिधि व नेत्र डॉक्टर | Prabhat Khabar Network
किशनगंज जिले की दिघलबैंक पंचायत ने 'मोतियाबिंद मुक्त' बनने का लक्ष्य रखा है. 30 अगस्त को पंचायत भवन हरुवाडांगा में नेपाल के मेची आंखों के अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा ग्रामीणों की मुफ्त नेत्र जांच और मोतियाबिंद ऑपरेशन किया जाएगा. यह सीमावर्ती क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत साबित होगी.
Kishanganj News: किशनगंज जिले के दिघलबैंक पंचायत ने एक ऐसी पहल शुरू की है, जो सीमावर्ती क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है. पंचायत को ‘मोतियाबिंद मुक्त’ बनाने के लक्ष्य के साथ 30 अगस्त 2026, रविवार को हरुवाडांगा स्थित पंचायत भवन में एक दिवसीय नि:शुल्क नेत्र जांच एवं इलाज शिविर आयोजित किया जाएगा. इस शिविर में नेपाल के बिर्तामोड स्थित प्रसिद्ध मेची आंखों के अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सक ग्रामीणों की आंखों की जांच करेंगे और मोतियाबिंद के मरीजों का मुफ्त ऑपरेशन भी कराया जाएगा.
सीमावर्ती क्षेत्रों में आंखों की बीमारियों, विशेषकर मोतियाबिंद, का समय पर इलाज न हो पाने के कारण कई बुजुर्ग धीरे-धीरे दृष्टि खो देते हैं. आर्थिक कठिनाइयों और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं की कमी को देखते हुए इस शिविर को ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.
पंचायत भवन हरुवाडांगा में होगा शिविर
दिघलबैंक पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि गणेश कुमार सिंह की पहल पर आयोजित इस शिविर का उद्देश्य गांव-गांव तक नेत्र चिकित्सा सेवाएं पहुंचाना है. शिविर 30 अगस्त को पंचायत भवन, हरुवाडांगा में आयोजित होगा, जहां ग्रामीणों की आंखों की पूरी तरह नि:शुल्क जांच की जाएगी.
शिविर में आने वाले मरीजों की जांच नेपाल के बिर्तामोड स्थित मेची आंखों के अस्पताल की विशेषज्ञ टीम करेगी, जिससे ग्रामीणों को उच्च गुणवत्ता वाली नेत्र चिकित्सा सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी.
नेपाल के मेची आंखों के अस्पताल के साथ हुई बैठक
शिविर की तैयारी को लेकर नेपाल के बिर्तामोड में मेची आंखों के अस्पताल के प्रबंधन के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. बैठक में दिघलबैंक पंचायत के लोगों को बेहतर नेत्र चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर विस्तार से चर्चा हुई.
अस्पताल प्रबंधन ने शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम भेजने पर सहमति दी है. इस सहयोग से सीमावर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है.
मोतियाबिंद मरीजों का होगा मुफ्त ऑपरेशन
शिविर के दौरान सभी आने वाले मरीजों की नि:शुल्क नेत्र जांच की जाएगी. जांच के बाद जिन लोगों में मोतियाबिंद की पुष्टि होगी, उन्हें चिन्हित किया जाएगा और पात्र मरीजों का नि:शुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन कराया जाएगा.
इस पहल से विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर, बुजुर्ग और जरूरतमंद ग्रामीणों को राहत मिलने की संभावना है, जो इलाज के अभाव में लंबे समय से दृष्टि संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं.
‘हर जरूरतमंद तक पहुंचेगा शिविर का लाभ’
मुखिया प्रतिनिधि गणेश कुमार सिंह ने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि दिघलबैंक पंचायत को मोतियाबिंद मुक्त बनाना हमारा संकल्प है.
उन्होंने बताया कि कई ग्रामीण आर्थिक अभाव के कारण बेहतर नेत्र चिकित्सा नहीं करा पाते. इसी उद्देश्य से यह नि:शुल्क शिविर आयोजित किया जा रहा है, ताकि किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को इलाज से वंचित न रहना पड़े.
उन्होंने पंचायत के लोगों से अपील की कि शिविर की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और जिन बुजुर्गों या मरीजों को आंखों से संबंधित परेशानी है, उन्हें शिविर तक लाने में सहयोग करें.
Kishanganj News: सीमावर्ती क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा का नया मॉडल
इस पहल को भारत-नेपाल सहयोग का एक सकारात्मक उदाहरण भी माना जा रहा है. बैठक में नेपाल-भारत मैत्री संघ, सुरुंगा उपशाखा के अध्यक्ष अर्जुन बोहरा, मेची आंखों के अस्पताल के वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. युवराज बोहरा और डॉ. कविता कार्की सहित कई लोग मौजूद रहे.
यदि यह अभियान सफल रहता है, तो आने वाले समय में दिघलबैंक पंचायत को वास्तव में ‘मोतियाबिंद मुक्त पंचायत’ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है.
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