पहाड़िया एक्सप्रेस को प्रतिदिन चलाने की मांग

पहाड़िया एक्सप्रेस को प्रतिदिन चलाने की मांग
आरटीआइ के गोलमोल जवाब ने रेलवे की पारदर्शिता पर खड़े किए गंभीर सवाल
बिना डेटा व व्यवहार्यता अध्ययन के प्रस्ताव ”विचाराधीन” रखने पर भड़के यात्री, सूचना छिपाने के आरोप में अब सूचना आयोग जाने की तैयारी
ठाकुरगंज. ट्रेन संख्या 15722/15721 पहाड़िया एक्सप्रेस को प्रतिदिन चलाने की मांग पर रेलवे की तैयारी और पारदर्शिता अब सवालों के घेरे में है. एक आरटीआइ आवेदन के जवाब में पूर्वोत्तर सीमा रेलवे द्वारा दी गयी अधूरी जानकारियों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. रेलवे ने कई महत्वपूर्ण सवालों पर या तो गोलमोल जवाब दिया है या ”जानकारी उपलब्ध नहीं” कहकर पल्ला झाड़ लिया है.
बिना आधार के ”विचाराधीन” है प्रस्ताव
आरटीआइ के जवाब में पूर्वोत्तर सीमा रेलवे ने यह तो स्वीकार किया है कि ट्रेन को प्रतिदिन चलाने का प्रस्ताव अभी विचाराधीन है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इस विचार के पीछे कोई ठोस आधार मौजूद नहीं है. रेलवे के पास न तो कोई व्यवहार्यता अध्ययन है, न तकनीकी रिपोर्ट व न ही कोई ठोस आंकड़ा. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि बिना किसी तैयारी के आखिर किस आधार पर फैसला लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है.
डेटा साझा करने से रेलवे का इंकार
आरटीआइ में पूछे गए तकनीकी व वित्तीय सवालों पर रेलवे का रवैया टालमटोल वाला रहा. लाइन क्षमता पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गयी. सुरक्षा आकलन और समय पालन रिपोर्ट को ”उपलब्ध नहीं” बताया गया. अतिरिक्त खर्च बताने से इंकार कर दिया गया और यात्री संख्या व राजस्व को दूसरे विभाग का मामला बताकर टाल दिया गया. विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सुरक्षा आकलन व व्यवहार्यता अध्ययन के किसी ट्रेन के फेरे बढ़ाने पर विचार करना नियमों के विरुद्ध है.
सांसद के पत्रों को लेकर भी संशय
आरटीआइ में एक तरफ रेलवे यह मानता है कि दार्जिलिंग सांसद ने ट्रेन को साप्ताहिक से बढ़ाकर सप्ताह में दो बार चलाने की मांग की है, लेकिन उन पत्रों की प्रतिलिपि उपलब्ध नहीं करायी गयी. इससे स्थानीय लोगों में यह शक गहरा हो गया है कि कहीं महत्वपूर्ण सूचनाएं जानबूझकर छिपायी तो नहीं जा रही.
यात्रियों में आक्रोश, अपील की तैयारी
स्थानीय यात्रियों में इस जवाब को लेकर भारी नाराजगी है. उनका कहना है कि हर बार ”विचाराधीन” कहकर मांग को टाल दिया जाता है, जो महज जनता को शांत रखने का एक तरीका बन चुका है. आरटीआइ आवेदक ने अब इस मामले में प्रथम अपील दायर करने का निर्णय लिया है. यदि वहां भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो मामले को राज्य सूचना आयोग तक ले जाने की पूरी तैयारी कर ली गयी है.
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