सीमांचल में चाय की खेती बढ़ाने की मांग, बिहार में चाय नीति की उम्मीदें बढ़ीं
Updated at : 15 Mar 2026 6:38 PM (IST)
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सीमांचल में चाय की खेती बढ़ाने की मांग, बिहार में चाय नीति की उम्मीदें बढ़ीं
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सीमांचल में तेजी से फैल रही चाय की खेती और संभावनाएं
ठाकुरगंज. सीमांचल क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही चाय की खेती ने बिहार की कृषि व औद्योगिक नीति को लेकर नयी बहस छेड़ दी है. राज्य में चल रही समृद्धि यात्रा के दौरान ठाकुरगंज के विधायक गोपाल अग्रवाल ने राज्य में अलग चाय नीति बनाने की मांग उठायी है. उनका कहना है कि सीमांचल में चाय की खेती व उससे जुड़े कारोबार में लगातार विस्तार हो रहा है, लेकिन इसके व्यवस्थित विकास के लिए अभी तक राज्य स्तर पर कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई गयी है. किसानों का कहना है कि पारंपरिक खेती की तुलना में चाय की खेती से बेहतर आय की संभावना है. अरुण सिंह बताते हैं कि अगर सरकार उचित समर्थन दे तो चाय खेती उनकी आर्थिक स्थिति सुधार सकती है, वहीं दिलीप साह ने कहा कि सही बाजार और सरकारी सहायता की कमी के कारण कई बार मुश्किलें आती हैं.चाय नीति बनने से विकास के नए अवसर खुल सकते हैं.
विशेषज्ञों व उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि बिहार में चाय नीति बनने से कई स्तरों पर सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं. किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता व सरकारी सब्सिडी मिलेगी, जिससे अधिक लोग चाय की खेती से जुड़ सकेंगे. स्थानीय प्रोसेसिंग यूनिट व पैकेजिंग उद्योग स्थापित होने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे व राज्य की चाय को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सकेगी.चाय उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि योजनाबद्ध रूप से विकास किया जाए तो यह सीमांचल के आर्थिक विकास का नया मॉडल बन सकता है. हालांकि, बिहार में चाय उद्योग अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए व्यापक नीति बनाने में अभी तक ठोस पहल नहीं हुई. अब सबकी निगाहें बिहार सरकार पर टिकी हैं कि क्या सीमांचल की संभावनाओं को देखते हुए चाय उद्योग के विकास के लिए कोई ठोस नीति बनायी जाएगी.
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