नगर पंचायत में बिना काम सड़क निर्माण राशि निकासी का मामला उजागर

Published by :AWADHESH KUMAR
Published at :15 Apr 2026 8:07 PM (IST)
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नगर पंचायत में बिना काम सड़क निर्माण राशि निकासी का मामला उजागर

नगर पंचायत में बिना काम सड़क निर्माण राशि निकासी का मामला उजागर

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4.04 लाख रुपये की निकासी के बाद निजी खाते से हुई वापसी, उठे गंभीर सवाल

प्रशासनिक अनियमितता, जवाबदेही व विपक्ष की भूमिका पर सवाल

ठाकुरगंज. ठाकुरगंज नगर पंचायत के वार्ड संख्या नौ में सड़क निर्माण के नाम पर करीब 4.04 लाख रुपये की निकासी व जमीन पर काम नहीं होने का मामला सामने आया है. वार्ड पार्षद ने आरोप लगाया है कि बिना कार्य कराए राशि की निकासी की गयी, जिससे नगर पंचायत की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

चिंटू सराफ के घर से राम साह के घर तक सड़क निर्माण के लिए लगभग एक वर्ष पूर्व 4,04,425 रुपये की निकासी की गयी थी. मामला तब सामने आया जब छह अप्रैल 2025 को संबंधित वार्ड पार्षद ने बोर्ड की बैठक में यह मुद्दा उठाया. पार्षद का कहना था कि उन्होंने दो माह पूर्व ही विभागीय सचिव व जिला पदाधिकारी को डाक के माध्यम से इसकी जानकारी दे दी थी.

उनका आरोप है कि फर्जी बिल बनाकर अभियंताओं की मिलीभगत से राशि की निकासी की गयी. मामला उजागर होने के बाद विवाद बढ़ा. अंततः संबंधित राशि नगर पंचायत के खाते में वापस जमा करा दी गयी.

कार्यालय सूत्रों के अनुसार, 10 अप्रैल को सहायक अभियंता प्रहर्ष शुक्ला द्वारा अपने सेविंग अकाउंट से ऑनलाइन राशि नगर पंचायत के खाते में जमा की गयी. इस घटनाक्रम ने मामले को नया मोड़ दे दिया है. इससे यह सवाल उठ रहा है कि यदि भुगतान प्रक्रिया सही थी, तो राशि निजी खाते से क्यों वापस की गयी.

इस प्रकरण के बाद तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी, योजना की मापी व तकनीकी सत्यापन करने वाले कनीय अभियंता सहित पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े हो गए हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना कार्य के भुगतान कैसे हुआ.

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश तो दिए गए हैं, लेकिन अब तक किसी अधिकारी या कर्मी पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. फिलहाल पूरा मामला केवल राशि वापसी तक सीमित दिख रहा है, जबकि मूल प्रश्न अब भी अनुत्तरित है कि बिना काम भुगतान कैसे हुआ.

विपक्षी पक्ष ने मीडिया में तो इस मुद्दे को उठाया, लेकिन अब तक जिला प्रशासन को कोई औपचारिक लिखित शिकायत नहीं दी गयी है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या विरोध केवल बयानबाजी तक सीमित है या इसे आगे बढ़ाने की कोई ठोस पहल भी होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि बिना लिखित शिकायत के ऐसे मामलों में जांच की गति और परिणाम दोनों प्रभावित हो सकते हैं.

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