निजी गाड़ियों पर 'बिहार सरकार' लिखवाने का बढ़ा चलन, रौब गालने का माध्यम या फैशन? उठे सवाल

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निजी वाहन पर बिहार सरकार अंकित कर सड़को पर दौड़ते वाहन . | Prabhat Khabar Network

निजी वाहन पर बिहार सरकार अंकित कर सड़को पर दौड़ते वाहन . | Prabhat Khabar Network

ठाकुरगंज की सड़कों पर निजी गाड़ियों पर 'बिहार सरकार', 'प्रेस' जैसे बोर्ड लगाने का क्रेज़ बढ़ रहा है. यह न केवल जनता को भ्रमित कर रहा है, बल्कि सरकारी नियमों का भी उल्लंघन है. जानिए मोटर वाहन अधिनियम क्या कहता है और क्यों यह चिंता का विषय है.

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कभी सरकारी वाहनों की पहचान उनकी आधिकारिक नंबर प्लेट, विभाग के नाम और शासन द्वारा अधिकृत उपयोग से होती थी. लेकिन अब ठाकुरगंज की सड़कों पर एक नया चलन तेजी से दिखाई देने लगा है. निजी गाड़ियों (Private Vehicles) के आगे और पीछे बड़े-बड़े अक्षरों में "बिहार सरकार", "भारत सरकार", "सरकारी कार्य" या "प्रेस" लिखवाने का क्रेज लगातार बढ़ता जा रहा है, जो आम नागरिकों को भ्रमित करने के साथ-साथ कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.

निजी गाड़ी पर 'बिहार सरकार' देख लोग हैरान

हाल ही में ठाकुरगंज में एक निजी पंजीकरण (Private Registration) वाले वाहन के पीछे बड़े अक्षरों में "बिहार सरकार" लिखा हुआ देखा गया. इसे देखकर राहगीरों और स्थानीय लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं.

शुरुआत में अधिकांश लोगों ने इसे किसी बड़े प्रशासनिक अधिकारी का सरकारी वाहन समझा, लेकिन बाद में पता चला कि वाहन पूरी तरह से निजी है. यह दृश्य केवल एक वाहन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे इलाके में ऐसे दर्जनों वाहन घूमते आसानी से देखे जा सकते हैं.

सरकारी पहचान या सामाजिक रुतबा?

विशेषज्ञों और प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि कुछ लोग सड़क पर टोल बचाने, पुलिस चेकिंग से बचने या समाज में रौब और दबदबा बनाने के लिए ऐसे हथकंडे अपनाते हैं.

जब सड़क पर किसी निजी गाड़ी पर "बिहार सरकार" लिखा होता है, तो आम लोग और कई बार पुलिसकर्मी भी भ्रम में पड़ जाते हैं. लोग ऐसे वाहनों को प्राथमिकता देकर रास्ता दे देते हैं, जिसका गलत फायदा उठाया जा रहा है.

क्या कहते हैं मोटर वाहन नियम?

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicle Act) के अनुसार:

  • किसी भी वाहन की वैधानिक पहचान केवल उसके रजिस्ट्रेशन और आधिकारिक दस्तावेजों से होती है.
  • निजी वाहनों पर आम लोगों को भ्रमित करने वाले सरकारी बोर्ड, स्टिकर या पदनाम लिखना नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है.
  • ऐसे वाहनों पर परिवहन विभाग (Transport Department) और ट्रैफिक पुलिस द्वारा जुर्माना और कार्रवाई का प्रावधान है.

कार्रवाई का अभाव, गरिमा पर सवाल

यद्यपि परिवहन और पुलिस विभाग समय-समय पर अभियान चलाकर ऐसे अनाधिकृत बोर्ड और स्टिकर हटवाने का दावा करता है, लेकिन ठाकुरगंज में लगातार बढ़ते ऐसे मामले जमीनी हकीकत बयां कर रहे हैं.

सरकारी पहचान जनता की सेवा और प्रशासनिक व्यवस्था का प्रतीक है. निजी वाहनों पर केवल रुतबा दिखाने के लिए इसका इस्तेमाल करना न केवल भ्रम फैलाता है, बल्कि सरकारी तंत्र की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है. अब देखना यह है कि प्रशासन ऐसे वाहनों पर कब तक शिकंजा कसता है.


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बच्छराज

लेखक के बारे में

By बच्छराज

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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