पौआखाली में मना भाई दूज पर्व, रहा जश्न का माहौल

पारिवारिक मूल्यों और रिश्तों के बंधन को मजबूती प्रदान करने वाला तथा भाई और बहन के बीच अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक पर्व भाईदूज गुरुवार को हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया
पौआखाली पारिवारिक मूल्यों और रिश्तों के बंधन को मजबूती प्रदान करने वाला तथा भाई और बहन के बीच अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक पर्व भाईदूज गुरुवार को हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया. बहन इस दौरान अपने भाई के ललाट पर चंदन और काजल का तिलक लगाकर दीपक से उसकी आरती उतारी और ईश्वर से उनके लिए लंबी आयु सहित सुख समृद्धि की कामना की. बदले में भाई ने भी बहन को ताउम्र रक्षा करने का वचन देते हुए और अपने सामर्थ्य के अनुसार नकद व उपहार भेंट में दिया. भाईदूज के मौके पर भाई अपनी बहन के हाथों का पकाया हुआ स्वादिष्ट व्यंजनों का जमकर लुत्फ उठाया. पौआखाली नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में भाईदूज का त्यौहार को लेकर काफी चहल पहल बना रहा. हाट बाजारों में मिठाई, उपहार, रेडीमेड वस्त्र आदि की दुकानों में खरीददारी को लेकर दिनभर भीड़ लगी रही. गौरतलब है कि हिंदुओं के लिए भाईदूज भारतीय संस्कृति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो पीढ़ियों से भाई और बहन के बीच अटूट प्रेम और स्नेह के बंधन और पारिवारिक मूल्यों को मजबूती प्रदान करता चला आ रहा है. यह त्योहार इस इलाके में हिंदी और बांग्लाभाषी दोनों ही समाज के लोग मनाते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की द्वितीया तिथि के दिन यम के देवता यमराज अपनी बहन यमुनाजी के घर गए थें तब यमुनाजी अपने भाई यम का खूब आदर सत्कार किया था. इस वजह भी भाईदूज के त्योहार को यम द्वितीया भी कहा जाता है.
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