महाशिवरात्रि में सीमा पार से उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब
Updated at : 14 Feb 2026 7:39 PM (IST)
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महाशिवरात्रि में सीमा पार से उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब
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कद्दूभीट्ठा महाशिवरात्रि मेला. भारत-नेपाल की अटूट सांस्कृतिक विरासत और बेटी-रोटी के रिश्तों का संगम
पौआखाली. भारत-नेपाल सीमा पर स्थित ठाकुरगंज प्रखंड इन दिनों पूरी तरह शिवभक्ति के रंग में सराबोर है. यहां की बंदरझुला पंचायत अंतर्गत कद्दूभीट्ठा में आयोजित होने वाला वार्षिक महाशिवरात्रि मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि दो देशों के बीच साझा विरासत, सामाजिक समरसता व अटूट सांस्कृतिक संबंधों का जीवंत उदाहरण बन गया है.सीमा पार से उमड़ता है श्रद्धा का सैलाब
कद्दूभिट्ठा शिवरात्रि मेले की सबसे बड़ी विशेषता इसकी भौगोलिक व सांस्कृतिक स्थिति है. नेपाल सीमा से बिल्कुल सटे होने के कारण इस मेले का स्वरूप अंतरराष्ट्रीय हो जाता है. यहां भारतीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ पड़ोसी देश नेपाल के सीमावर्ती गांवों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. भक्त मेला परिसर स्थित प्राचीन शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं.बेटी-रोटी के रिश्तों की झलक
स्थानीय बुजुर्गों व आयोजन समिति के सदस्यों के अनुसार, यह मेला दशकों से दोनों देशों के बीच सामाजिक सौहार्द का प्रतीक रहा है. सीमांचल क्षेत्र के नेपाल के साथ ”बेटी-रोटी” के पुराने और गहरे रिश्ते रहे हैं, जिसकी झलक इस मेले में स्पष्ट दिखाई देती है. मेले में नेपाल से आने वाले लोग न केवल श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं, बल्कि जमकर खरीदारी भी करते हैं और मेले का आनंद उठाते हैं. आयोजन को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में खासा उत्साह देखा जा रहा है. मेले के माध्यम से दोनों देशों के लोग एक-दूसरे की परंपराओं व संस्कृति से रूबरू होते हैं. यह मेला न केवल व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सीमावर्ती क्षेत्रों में आपसी भाईचारे और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का संदेश भी दुनिया को देता है.प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी
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