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बकरी खरीद पर एससी-एसटी को 90 व अन्य को 80 फीसद का अनुदान

Updated at : 04 Jul 2025 9:22 PM (IST)
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बकरी खरीद पर एससी-एसटी को 90 व अन्य को 80 फीसद का अनुदान

बकरी खरीद पर एससी-एसटी को 90 व अन्य को 80 फीसद का अनुदान

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किशनगंज. जीविका के माध्यम से कोचाधामन प्रखंड के कुट्टी पंचायत में शुक्रवार को बकरी हाट लगाया गया. समेकित बकरी-भेड़ विकास योजना छह अंतर्गत, उन्नति जीविका महिला बकरी उत्पादक समूह के द्वारा यह हाट फूलबाड़ी गांव में लगाया गया. इस योजना के 39 लाभार्थी जीविका दीदियों की बकरियों की स्वास्थ्य जांच व इयर टैगिंग किया गया. बकरी हाट में समेकित बकरी-भेड़ विकास योजना अंतर्गत लाभार्थी जीविका दीदियों की बकरियों का वजन, तापमान आदि की जांच की गयी. इसके उपरांत इयर टैगिंग की गयी. सभी बकरियों का स्वास्थ्य कार्ड भी बनाया गया. इस अवसर पर जीविका किशनगंज के पशुधन प्रबंधक उमा शंकर पवन, प्रखंड पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ बालेश्वर मंडल, जीविका सामुदायिक समन्वयक सुमित कुमार, पशु सखी गुलशन प्रवीण, रेशमी बेगम उपस्थित थे. किशनगंज जिला के पांच प्रखंड बहादुरगंज, कोचाधामन, दिघलबैंक, टेढ़ागाछ व ठाकुरगंज के चयनित पंचायत में इस योजना का संचालन किया जा रहा है. इन प्रखंडों में कुल 311 लाभार्थी को समेकित बकरी-भेड़ विकास योजना छह का लाभ दिया जा रहा है. इस योजना अंतर्गत जीविका दीदियों को बकरी पालन हेतु आर्थिक मदद दी जाती है. योजना का उद्देश्य, बकरी पालन के जरिए जीविका दीदियों की आमदनी बढ़ाना है. गरीब ग्रामीण परिवारों के लिए बकरी पालन आय के प्रमुख साधनों में से एक है. इस योजना के तहत चयनित जीविका दीदियों को आठ से 10 किलो वजन की तीन बकरियाँ खुद से खरीदनी होती है. बकरियों की स्वास्थ्य जाँच और इयर टैगिंग के बाद चयनित लाभार्थियों के बैंक खाते में अनुदान की राशि ट्रांसफर की जाती है. एससी-एसटी लाभार्थी परिवार को, बकरी खरीद पर 90 प्रतिशत व अन्य परिवारों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी की राशि दी जाती है. इस योजना अंतर्गत चयनित लाभर्थियों में अधिकांश एससी-एसटी परिवार के सदस्य हैं. बताया गया कि बकरी पालन, गरीब ग्रामीण परिवारों के लिए फिक्स्ड डिपोजिट की तरह होता है. जब भी पैसे की जरूरत हो वे, पाठा-पाठी, खस्सी या बकरी बेच कर आमदनी करती हैं. बकरियों के स्वास्थ्य, पोषण को बेहतर बनाने के लिए जीविका पशु सखी के माध्यम से बकरी पालकों को सेवा दी जाती है. पशु सखी जीविका दीदियाँ, पंचायत व गांव स्तर पर बकरियों का प्राथमिक उपचार करती हैं. इनके द्वारा बकरियों को कृमिनाशक दवा पिलाना, बधियाकरण, टीकाकरण कार्य किया जाता है. साथ ही जीविका सामुदायिक संगठनों में बकरा–बकरियों के स्वास्थ्य पोषण के बारे में महिलाओं को जानकारी दी जाती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AWADHESH KUMAR

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