मांगे जमीन के कागजात सेंट चाइल्ड . जमीन का डीएम ने लिया जायजा

Published at :27 Sep 2016 2:34 AM (IST)
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मांगे जमीन के कागजात  सेंट चाइल्ड . जमीन का डीएम ने लिया जायजा

किशनगंज : जिलाधिकारी पंकज दीक्षित ने रविवार को शहर के बुहचर्चित सेंट चाइल्ड स्कूल की भूमि का जायजा लिया. इसके बाद भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है. डीएम के आदेश के बाद संबंधित भूमि की कागजात तलब करने के बाद कइयों के हाथ पैर फूलने लगे हैं. जिलाधिकारी के इस कदम से शहर के लोगों […]

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किशनगंज : जिलाधिकारी पंकज दीक्षित ने रविवार को शहर के बुहचर्चित सेंट चाइल्ड स्कूल की भूमि का जायजा लिया. इसके बाद भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है. डीएम के आदेश के बाद संबंधित भूमि की कागजात तलब करने के बाद कइयों के हाथ पैर फूलने लगे हैं. जिलाधिकारी के इस कदम से शहर के लोगों में एक नयी उम्मीद की किरण दिखने लगी है.

शहर के बीचोबीच रूईधासा स्थित बेशकीमती सेंट चाइल्ड स्कूल की भूमि जो बेनामी संपत्ति होने के बाद जिला प्रशासन के अधीन है, इस भूमि पर शहर के लोगों को विद्यालय बनाने की मांग की है. डीएम ने विशेष कार्य पदाधिकारी हिरामुनि प्रभाकर को उक्त भूमि की फाइल प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. डीएम के सख्त आदेश के बाद भू-माफियाओं व उनको सरंक्षण देने वालों के पसीने छूटने लगे हैं.

स्थानीय लोगों ने सेंट चाइल्ड स्कूल की भूमि बचाने की पहल
रूईधासा स्थित जिले के सबसे पुराने एवं अंगरेजी माध्यम के प्रसिद्ध स्कूल सेंट चाइल्ड स्कूल के संस्थापक अरुण तारा चौधरी की मृत्यु के उपरांत स्कूल के करोड़ों रुपये की भूमि पर भू-माफियाओं की कुदृष्टि पड़ गयी थी. तब आवेदक सहित स्थानीय लोगों ने स्कूल की जमीन बचाने का मुहिम चलायी. स्थानीय लोग व आवेदक के अनुसार स्कूल के संस्थापक अरुण तारा चौधरी की 1995 में मौत हो गयी. उनके जीवित रहने व मृत्यु के वर्षों बाद तक कोई वारिस नहीं आया.
मौत के बाद नारायण दास ने स्कूल का जिम्मा संभाला. नारायण दास ने भू-माफिया से गंठजोड़ कर अरुण तारा चौधरी का फर्जी वारिस परिशीला भाटिया को बना कर 23.6.09 को अनवार युसूफ के नाम से फर्जी पावर ऑफ एटर्नी तैयार करवा कर स्कूल की भूमि पर कब्जा करने की नियत से स्कूल के भवन तुड़वाने लगा. स्थानीय लोगों के अनुसार अरुण तारा चौधरी अविवाहित थे और उनका कोई वारिस नहीं था. आवेदक व स्थानीय लोगों ने मामले को लेकर अंचलाधिकारी को आवेदन दिये.
जिस पर जमाबंदी रद्दीकरण वाद संख्या 02/2009-10 संधारित हुआ. आवेदकों के अनुसार डीसीएलआर ने बिना स्थल जांच किये तथा कागजातों एवं साक्ष्यों का सत्यापन किये बगैर भू-माफियाओं के प्रभाव में आकर जमाबंदी यथावत रखने का आदेश पारित किया. मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने किशनगंज पहुंचे सीएम को स्कूल की जमीन बचाने हेतु आवेदन दिया था. उसके उपरांत मामला अपर समाहर्ता के न्यायालय पहुंचा. अपर समाहर्ता ने अपने आदेश में कहा है कि भूमि सुधार उप समाहर्ता किशनगंज द्वारा जमाबंदी रद्दीकरण वाद संख्या 10/2010-11 में पारित आदेश त्रुटिपूर्ण है और प्रतिवादी द्वारा परिशीला भाटिया का जमाबंदी रैयत अरुण तारा चौधरी के वैध वारिस होने का सक्षम न्यायालय द्वारा निर्गत कोई प्रमाण न तो तत्कालीन डीसीएलआर कमर आलम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया और न ही न्यायालय के समक्ष. उन्होंने परिशीला भारिया के उत्तराधिकारी होने के प्रश्न को विवादित बताया है.
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