आदर्श गांव के लिए अलग से राशि का प्रावधान नहीं : सांसद

Published at :05 Jan 2016 3:43 AM (IST)
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आदर्श गांव के लिए अलग से राशि का प्रावधान नहीं : सांसद

दिघलबैंक : देश के ग्रामीण इलाकों की सूरत बदलने के मकसद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से सांसद आदर्श ग्राम योजना का एलान किया था, तो माना गया था कि अगर यह महत्वाकांक्षी योजना कामयाब रही तो निश्चित ही इससे भारत में ग्राम विकास का नया मॉडल […]

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दिघलबैंक : देश के ग्रामीण इलाकों की सूरत बदलने के मकसद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से सांसद आदर्श ग्राम योजना का एलान किया था, तो माना गया था कि अगर यह महत्वाकांक्षी योजना कामयाब रही तो निश्चित ही इससे भारत में ग्राम विकास का नया मॉडल सामने आयेगा. लेकिन जैसे-जैसे इस योजना को जमीन पर उतारने की बारी आने लगे हैं कुछ सवाल भी उठने लगे हैं.

सांसद आदर्श ग्राम योजना को लेकर प्रभात खबर से बातचीत में स्थानीय सांसद मौलाना असरारूल हक कासमी कहते हैं कि इस योजना को लेकर सबसे बड़ी रुकावट यह महसूस की जा रही है कि इसके लिए अलग से धन का कोई प्रावधान नहीं किया गया है. बल्कि सांसदों की अपेक्षा की गयी है.

सांसद श्री कासमी ने इस संबंध में बताया कि इस समस्या से उन्होंने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नितिन गडकरी को भी अवगत करा दिया है कि संसदीय क्षेत्र विकास निधि की राशि अगर आदर्श गांव बनाने में खर्च करने के भरोसे ही यह सब करना होगा, तो पूरे संसदीय क्षेत्र के दूसरे काम कैसे होंगे. वे अपनी पूरी सांसद निधि भी इस योजना में लगा दें,

तो भी पूरी तरह से आदर्श गांव नहीं बन सकता. इसलिए केंद्र सरकार द्वारा योजना के लिए अलग से राशि उपलब्ध कराना अथवा सांसद निधि की राशि को दोगुनी करें तभी यह सपना साकार हो सकता है. गौरतलब है कि लोकसभा क्षेत्र में 500 से 700 तक गांव आते हैं. एक सांसद पांच साल में पांच आदर्श गांव बना भी दें, तो इसे क्षेत्र का विकास शायद ही कहा जायेगा.

कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मकसद इस योजना के जरिये देश के लगभग छह करोड़ गांवों को उनका वह हक दिलाना है, जिसकी परिकल्पना स्वाधीनता संग्राम के दिनों में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने की थी. गांधी के नजर में गांव गणमंत्र के लघु रूप थे, जिनकी बुनियाद पर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की इमारत खड़ी होनी थी.

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