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वाहनों से निकल रहा जहरीला धुआं, लोग हो रहे बीमार

Updated at : 06 Dec 2019 9:17 AM (IST)
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वाहनों से निकल रहा जहरीला धुआं, लोग हो रहे बीमार

किशनगंज : व्यवस्था तो बनी है वाहनों को पूरी तरह से फिट रखकर ही सड़क पर उतारने की. इस व्यवस्था को सही तरीके से लागू करने के लिए मोटर यान निरीक्षक की भी तैनाती की गई है. लेकिन यहां फिटनेस जांच के दौरान मानकों का उल्लंघन होता है. कागज पर ही पूरी जांच कर ली […]

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किशनगंज : व्यवस्था तो बनी है वाहनों को पूरी तरह से फिट रखकर ही सड़क पर उतारने की. इस व्यवस्था को सही तरीके से लागू करने के लिए मोटर यान निरीक्षक की भी तैनाती की गई है. लेकिन यहां फिटनेस जांच के दौरान मानकों का उल्लंघन होता है. कागज पर ही पूरी जांच कर ली जाती है और हरेक इलाके में फिटनेस के मानक पर असफल वाहन सड़क पर दौड़ते हैं.

ग्रामीण इलाकों में इनकी संख्या अधिक है. लेकिन शहरी इलाके में भी मानक में विफल वाहन धुआं उगलते हुए धड़ल्ले से संचालित हो रहे है. यहीं जहरीला धुआं उगलते वाहन लोगों बीमार बना रहे हैं. परिवहन विभाग की मानें तो व्यवसायिक तथा निजी वाहनों की फिटनेस जांच निर्धारित अवधि के अंदर करने का नियम है. इस कार्य के लिए जिला परिवहन कार्यालय में काउंटर की भी व्यवस्था है.

कुव्यवस्था पर रोक नहीं: फिटनेस प्रमाण-पत्र देने की व्यवस्था के बीच ही हरेक इलाके में एसेी सैकड़ों गाड़ियां दौड़ती मिल जाती है, जो फिटनेस के मानक पर खरा नहीं उतरती है. बगैर बैक लाइट के तो सैकड़ों की संख्या में बसें, पिकअप, सवारी गाड़ी, ऑटो, ट्रक, ट्रैक्टर, कार, जीप व जुगाड़ वाहन मिल जाते है. इस व्यवस्था पर रोक कहीं से भी नहीं दिखता. सड़क पर खटाहरा वाहन दौड़ रहे हैं. इन वाहनों से काला धुंआ निकलता है.
बात यहीं समाप्त नहीं होती. कई मोटर साइकिलें भी शहर में दौड़ती है जिनमें से तेज आवाज के साथ काला धुंआ निकलता है. यह काला धुआं सड़क से होकर गुजरने वाले लोगों को फेफड़ा जनित रेाग को आमंत्रण देता है.
धुआं उगलते वाहनों को मिलता है प्रमाण-पत्र, परिचालन बंद करने का है नियम : जिला परिवहन पदाधिकारी की मानें तो फिटनेस के मानक पर खरा उतरने में विफल वाहनों का परिचालन रोक देने का प्रावधान है. लेकिन डीटीईओ कार्यालय में ऐसा कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि जिले में एक भी व्यवसायिक वाहन को फिटनेस के नाम पर रोका गया हो.
वाहनों के लिए क्या हैं नियम
नये वाहनों की दो साल बाद हो फिटनेस जांच.
पुराने वाहनों को हरेक वर्ष लेना होता है प्रमाण-पत्र.
गाड़ियों को प्रमाण-पत्र देने के पूर्व चलाया जाना अनिवार्य.
ब्रेक व इंजन की होती है जांच.
इंडिकेटर, लाइट, बैक लाइट आदि की मांच.
गाड़ी का देना होता है टैक्स टोकन.
इंश्योरेंस देखने के बाद देना है प्रमाण-पत्र.
प्रदूषण जांच रिपोर्ट है प्रमाण-पत्र के पूर्व जरूरी.
पिछले साल के फिटनेस प्रमाण-पत्र को साथ लगाना जरूरी.
क्या है स्थिति
आवेदन देने मात्र से हो जाती है जांच
सड़क पर चल रहे खटाहरा वान
सैकड़ों वाहनों में नहीं है बैक लाइट व इंडिकेटर
केवल आवेदन देने मात्र से हो जाती है जांच
फिटनेस देने के पूर्व नहीं होती वाहनों की सही परख
धुआं उगलती बसें बनी ग्रामीण इलाकों की पहचान
मुख्यालय में भी दौड़ते हैं धुआं उगलने वाले वाहन
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