एजेंसियों की सक्रियता के बावजूद मवेशियों की तस्करी जारी

Published at :23 May 2018 6:16 AM (IST)
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एजेंसियों की सक्रियता के बावजूद मवेशियों की तस्करी जारी

दिघलबैंक के लौगाड़ा फूलबाड़ी और सिंघमारी बना मवेशी तस्करों के लिए सुगम रास्ता दिघलबैंक : पशु-तस्करी का अवैध कारोबार आज भी जिले में धड़ल्ले से हो रहा है. जिले के तीन प्रखंडों ठाकुरगंज, दिघलबैंक और टेढ़ागाछ जो की नेपाल के मुहाने पर अवस्थित है और इन इलाकों के माध्यम से पशु तस्करी की भारी खेप […]

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दिघलबैंक के लौगाड़ा फूलबाड़ी और सिंघमारी बना मवेशी तस्करों के लिए सुगम रास्ता

दिघलबैंक : पशु-तस्करी का अवैध कारोबार आज भी जिले में धड़ल्ले से हो रहा है. जिले के तीन प्रखंडों ठाकुरगंज, दिघलबैंक और टेढ़ागाछ जो की नेपाल के मुहाने पर अवस्थित है और इन इलाकों के माध्यम से पशु तस्करी की भारी खेप लाकर ये पशु माफिया इन पशुओं को जिले सहित पश्चिम बंगाल के निकटवर्ती पशु हाटों में बेचतें है जहां से इन पशुओं को बांग्लादेश भेजा जाता है और यह कारोबार काफी लंबे समय से इन इलाकों में फल-फूल रहा है. करीब डेढ़ दशक पूर्व जब भारत-नेपाल सीमा पर एसएसबी की तैनाती बढ़ी तब लोगों को लगा की इस तस्करी पर पूरी तरह से रोक लगेगा लेकिन आज भी चोरी-छिपे यह कारोबार पूर्व की भांति कभी कम तो कभी ज्यादा के अनुपात में अनवरत जारी है.
चार गुना आमदनी का है यह यह कारोबार
ख़रीदे गये पशुओं को बांग्लादेश के ठिकानों तक पंहुचाने में करीब चार गुना आमदनी का यह कारोबार है. सुरक्षा एजेंसियां चौकस फिर भी तस्करी जारी
सीमा सुरक्षा में तैनात सुरक्षा बलों के सघन गश्ती और चौकसी के बावजूद नित नए रास्तों का उपयोग करके ये तस्कर इस कार्य को अंजाम देने की हर जुगत में लगे रहतें है.
एक समय था जब नेपाल से कम कीमत दूध भारतीय सीमा के बाजारों में उपलब्ध होता था. लेकिन अब स्थिति विपरीत है.अब ग्रामीण इलाके भी डब्बा बंद तथा पॉलीथिन पैक वाले दूध पर आश्रित है. लोगों की माने तो नेपाल के साथ-साथ भारतीय क्षेत्र से भी पशुओं की तस्करी कर बांग्लादेश भेजा जाना इसका मुख्य कारण है.
और आने वाले समय अमृत के रूपी दूध की घोर किल्लत इन इलाकों में होने वाली है.
पूरी प्लानिंग के साथ होती है यह तस्करी : मवेशी तस्करी का बहुत बड़ा और व्यापक नेटवर्क है जो मौके और नजाकत के लिहाज से अपने काम को अंजाम देता है. पहले गांव-देहात और नेपाल के पहाड़ी इलाकों के इन मवेशियों को सीमा के करीब लाकर जमा करते है और फिर रात के अंधेरे में सुरक्षा कर्मियों के आंखों में धुल झोंककर उसे अगले पड़ाव तक पहुंचाया जाता है. इसमें वाहनों का भी प्रयोग होता है. प्रखंड के लौहागाड़ा, फुलवाड़ी, सिंघीमारी, लक्ष्मीपुर और बीबीगंज रूट से प्रतिनिधि सैकड़ों मवेशियों को पार कराया जाता है.
दर्जनों बार हुई कार्रवाई
भारत-नेपाल सीमा पर ही बीते एक वर्ष में एसएसबी ने कई बार इस बार अंकुश लगाते हुए करवायी की है जिनमेँ सैकड़ो पशुओं की बरामदगी हुई है. आये दिन पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों द्वारा तस्करी के मवेशियों को जब्त किया जाता रहा है. लेकिन तस्कर तू डाल तो मैं पात पात की तर्ज पर अपने कारोबार को जारी रखे हुए है. हालांकि उधर पुलिस अधीक्षक राजीव मिश्रा ने सभी थानाध्यक्षों को मवेशी तस्करी पर अंकुश लगाने की हिदायत दी है.
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