ठाकुरगंज के मनीष ने बनायी अंतरराष्ट्रीय पहचान, बनाया चाय पत्ती हार्वेस्टिंग मशीन

चाय बागानों में मजदूरों की कमी से जूझ रहे सीमांचल इलाके के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है
-मजदूरों की कमी से जूझ रहे चाय बागानों को मिली बड़ी राहत
– स्थानीय नवाचार ने बनाई वैश्विक पहचानठाकुरगंजचाय बागानों में मजदूरों की कमी से जूझ रहे सीमांचल इलाके के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है. ठाकुरगंज के युवा नव प्रवर्तक मनीष पटेल ने एक ऐसी चाय पत्ती हार्वेस्टिंग मशीन विकसित की है, जिसने न केवल स्थानीय समस्या का समाधान किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बनाई है. दरअसल अपने ही चाय बागान में पत्तियों की तुड़ाई के लिए समय पर मजदूर नहीं मिलने की समस्या से परेशान मनीष ने इसका स्थायी समाधान खोजने का निर्णय लिया. वर्ष 2011 में दक्षिण भारत में पढ़ाई के दौरान जब भी वे घर आते थे, तो अपने पिता सिकन्दर पटेल और दादा स्वर्गीय भागवत प्रसाद से मजदूरों की कमी की चर्चा सुनते थे. यही समस्या उनके नवाचार की प्रेरणा बनी. इंटरनेट पर खोज के दौरान उन्हें चेन्नई में विकसित एक मशीन की जानकारी मिली, जिसने उनकी सोच को दिशा दी. शुरुआत में उन्होंने उस मशीन को मंगा कर परीक्षण किया, लेकिन स्थानीय जरूरतों के अनुसार उसमें कई बदलाव आवश्यक लगे. लगातार प्रयोग, संशोधन और तकनीकी सुधार के बाद उन्होंने एक उन्नत, प्रभावी और उपयोगी मशीन तैयार की.
तकनीक से लैस गेमचेंजर मशीन
यह स्वदेशी मशीन अत्याधुनिक तकनीकों से लैस है. इसमें ऑटोमेटिक हाइड्रोलिक सिस्टम, हाइड्रोलिक ट्रांसमिशन, कूलिंग सिस्टम और डिस्क-टाइप नेगेटिव ब्रेक जैसे फीचर्स शामिल हैं, जो इसकी कार्यक्षमता और सुरक्षा दोनों को बढ़ाते हैं. बैटरी से संचालित इस मशीन में 300 वॉट की मोटर और लिथियम बैटरी लगी है, जो सात से 12 घंटे तक लगातार काम करने में सक्षम है. लगभग 13 किलोग्राम वजन होने के कारण इसे महिलाएं भी आसानी से संचालित कर सकती हैं. मनीष पटेल के अनुसार यह मशीन प्रति घंटे करीब 100 किलोग्राम तक चाय पत्तियों की कटाई कर सकती है. इसका शार्प डुअल ब्लेड सिस्टम यह सुनिश्चित करता है कि केवल कोमल और गुणवत्तापूर्ण पत्तियों की ही तुड़ाई हो.मजदूरों को राहत, उत्पादन में बढ़ोतरी
इस मशीन के उपयोग से चाय बागानों में काम करने का तरीका पूरी तरह बदल गया है. मजदूरों को घंटों झुककर पत्तियां तोड़ने की कठिन मेहनत से राहत मिली है. जहां पहले यह काम कई दिनों में पूरा होता था, अब वही कार्य कुछ ही घंटों में संभव हो रहा है. मनीष बताते हैं कि पहले 10–15 मजदूर जितना काम करते थे, अब वही काम 1–2 मशीन ऑपरेटर आसानी से कर लेते हैं. इससे उत्पादन में वृद्धि के साथ समय और लागत दोनों की बचत हो रही है.पर्यावरण के अनुकूल तकनीक
कम ध्वनि प्रदूषण और कम ऊर्जा खपत के कारण यह मशीन पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प साबित हो रही है. आधुनिक खेती में टिकाऊ और जिम्मेदार तकनीक का यह एक सफल उदाहरण है.
ठाकुरगंज से वैश्विक मंच तक गूंज
यह स्वदेशी चाय पत्ती हार्वेस्टिंग मशीन अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही है. एशिया और अफ्रीका समेत कई देशों में इसकी बढ़ती मांग इस बात का प्रमाण है कि ठाकुरगंज से निकला यह नवाचार वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहा है. उच्च गुणवत्ता, कम लागत और बेहतर कार्यक्षमता के कारण यह मशीन विदेशी विकल्पों को कड़ी टक्कर दे रही है. इससे न केवल स्थानीय नवप्रवर्तन को नई पहचान मिली है, बल्कि मेड इन इंडिया तकनीक को भी वैश्विक स्तर पर मजबूती मिली है. ठाकुरगंज की मिट्टी से निकला यह नवाचार आज दुनिया के मंच पर अपनी छाप छोड़ रहा है. यह साबित करते हुए कि नई सोच, मेहनत और संकल्प के दम पर छोटे शहर से भी बड़ा बदलाव संभव है.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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