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मंडलकारा खगड़िया के तीन कक्षपाल हुए दंडित, गृह विभाग ने दो के वेतन वृद्धि पर लगायी रोक

Updated at : 13 Jul 2024 11:39 PM (IST)
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मंडलकारा खगड़िया के तीन कक्षपाल हुए दंडित, गृह विभाग ने दो के वेतन वृद्धि पर लगायी रोक

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प्रतिनिधि, खगड़िया कारा नियमों को ताक पर रखकर मंडल कारा में बंद एक सजायाफ्ता बंदी के इलाज कराने के मामले में मंडलकारा के तीन तत्कालीन कक्षपालों के विरुद्ध कार्रवाई हुई है. गृह विभाग ने मंडल कारा में पदस्थापित रहे उच्च कक्षपाल लालबाबू कुमार व दो कक्षपाल जय किशोर सिंह एवं बिगु कुमार पर कार्रवाई की है. इनके दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक लगाने का आदेश जारी किया है. सुनवाई के दौरान इन तीनों कक्षपालों द्वारा अपने बचाव में दिये गए स्पष्टीकरण के जवाब को अस्वीकृत करते हुए इन्हें बिहार सरकारी सेवक ( वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2025 के तहत दंडित किया गया है. मालूम हो कि प्रणव कुमार, महानिरीक्षक कारा एवं गृह एवं सुधार सेवाएं द्वारा इनपर कार्रवाई को लेकर आदेश जारी किया गया है.

क्या है पूरा मामला, क्यों हुई कार्रवाई

बंदी के इलाज में कारा नियमों का अनुपालन नहीं करने, बंदी को ससमय वापस नहीं लाने तथा बंदी के इलाज से जुड़ी पूर्ण जानकारी वरीय पदाधिकारी को नहीं देने के आरोप में इन तीनों कक्षपालों को दंडित किया गया है. बताया जाता है कि मंडलकारा खगड़िया में बंद सजावार बंदी पूर्व विधायक रणवीर यादव के इलाज के लिए साल 2019 में दिल्ली एम्स ले जाया गया था. इनकी सुरक्षा में उच्च कक्षपाल बाबूलाल कुमार तथा कक्षपाल बिगू कुमार इनके साथ गए थे. यहां तक तो ठीक था, लेकिन यहां बाद इन दोनों ने कारा नियमों की लक्ष्मण रेखा पार कर दी. दिल्ली एम्स में बंदी का इलाज ओपीडी में हुआ. लेकिन इन्होंने उक्त बंदी के ओपीडी में इलाज कराए जाने की सूचना वरीय पदाधिकारी को नहीं दी. करीब दो साल तक इलाज के नाम पर बंदी दिल्ली में रहे. लेकिन जब वे वापस लौटे तो गाज तीन कक्षपालों पर गिर गई.

आरोप- गठित कर शुरू हुई विभागीय कार्रवाई

अधीक्षक, मंडलकारा खगड़िया द्वारा इन तीनों कक्षपालों के विरुद्ध आरोप- पत्र गठित किया गया था. जिसके आधार पर गृह विभाग ने इन सभी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरु करने के आदेश जारी किया. बताया जाता है कि विशेष केन्द्रीय कारा भागलपुर के अधीक्षक को संचालन पदाधिकारी नामित किया गया. सुनवाई के दौरान के यह बातें सामने आई कि राज्य के बाहर किसी बंदी को इलाज के लिए भेजे जाने पर पदाधिकारी को प्रतिनियुक्त किये जाने का प्रावधान है, लेकिन यहां इसका अनुपालन नहीं किया गया. बंदी का इलाज ओपीडी में हुआ था, लेकिन कक्षपाल ने इसकी सूचना संबंधित पदाधिकारी को नहीं दी. संचालन पदाधिकारी ने गृह विभाग को सौंपे रिपोर्ट/ जांच प्रतिवेदन में यह कहा है कि बंदी के अस्पताल में भर्ती नहीं होने की स्थिति में कारा हस्तक नियम के अनुसार सुरक्षा बलों को उन्हें वापस कारा में वापस लौटाना आवश्यक था. लेकिन वापस कारा लाने की जगह बंदी को लंबी अवधी ( करीब दो साल) तक गार्ड रूम में रखकर इलाज कराया गया. बंदी के ओपीडी में इलाज कराने की सूचना नहीं दी थी. वहीं तीसरे कक्षपाल सह लिपिक बिगू कुमार को इसलिए दंडित किया गया, क्योंकि वरीय पदाधिकारी को पूरी वस्तु स्थिति की जानकारी नहीं दी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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