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महाशिवरात्रि की तैयारी पूरी, आज भक्तिभाव से श्रद्धालु करेंगे पूजा

Updated at : 14 Feb 2026 9:10 PM (IST)
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महाशिवरात्रि की तैयारी पूरी, आज भक्तिभाव से श्रद्धालु करेंगे पूजा

महाशिवरात्रि का त्योहार आज भक्तिमाव के साथ पूरे जिले में मनाया जाएगा. इस दिन उत्तराषाढा नक्षत्र, व्यतिपात योग, सर्वार्थ सिद्धि योग व जयद् योग का उत्तम संयोग बन रहा है

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गोगरी महाशिवरात्रि का त्योहार आज भक्तिमाव के साथ पूरे जिले में मनाया जाएगा. इस दिन उत्तराषाढा नक्षत्र, व्यतिपात योग, सर्वार्थ सिद्धि योग व जयद् योग का उत्तम संयोग बन रहा है. इस पावन अवसर पर नवरत्न पुरानी शिव मंदिर जमालपुर व बाबा चंपेश्वर नाथ मंदिर कुर्मी टोला से भव्य शिव बारात शोभा यात्रा निकालने की तैयारी पूरी कर ली गयी है. बारात में बैंड बाजा के साथ सैकड़ों आध्यात्मिक, सामाजिक व धार्मिक झांकी रहेगी, जो बारात के आकर्षण का केंद्र रहेगा. बड़ी दुर्गा मंदिर जमालपुर के पुजारी मनोज झा ने बताया कि सुबह से रात 7:40 बजे तक उत्तराषाढा नक्षत्र रहेगा. इसके बाद शिव का प्रिय श्रवण नक्षत्र विद्यमान होगा. ग्रह- गोचरों का यह संयोग आध्यात्मिक उन्नति और प्रतिष्ठा में वृद्धि प्रदान करनेवाला है. इस बार विशिष्ट संयोग में महाशिवरात्रि का पर्व उपासना की दृष्टि से भी विशेष है. बाबा के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन शुभ संयोग और मुहूर्त में भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा आराधना से श्रद्धालुओं को मनोवांछित फल मिलेगा. चार प्रहर की साधना से जातक को धन, यश, प्रतिष्ठा और समृद्धि प्राप्त होती है. सूर्य और शनि पिता पुत्र हैं और सूर्य शनि की राशि कुंभ में रहेंगे. इस प्रबल योग में भागवत साधना करने से आध्यात्मिक, धार्मिक उन्नति होती है. सूर्य पुराण के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव पृथ्वी लोक पर आते हैं. इस दिन पूजन से साल भर की शिवरात्रि का पुण्य फल मिलता है. श्रद्धालुओं को एक हजार अश्वमेध यज्ञ व सैकड़ों यज्ञ के समान पुण्य मिलता है. महाशिवरात्रि पर मंदिरों और शिवालयों की आकर्षक सजावट की जा रही है. मंदिरों में दिन भर जलाभिषेक रुद्राभिषेक के बाद शाम में शिव श्रृंगार होगा. भगवान शिव ने संरक्षण व विनाश का सृजन किया था. बताया कि ईशान संहिता के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की मध्य रात्रि में भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए. इसी पावन रात्रि को भगवान शिव ने संरक्षण व विनाश का सृजन किया था. इस रात को कालरात्रि और सिद्धि की रात भी कहते हैं. यही कारण है कि महाशिवरात्रि के पर्व को शिव साधक बड़ी धूमधाम से मनाते हैं और पूजा और कीर्तन करते हैं.

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