डोली पर सवार होकर आयेगी मां दुर्गा, पूजा को लेकर तैयारी शुरू

Updated at : 12 Mar 2026 10:09 PM (IST)
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डोली पर सवार होकर आयेगी मां दुर्गा, पूजा को लेकर तैयारी शुरू

डोली पर सवार होकर आयेगी मां दुर्गा, पूजा को लेकर तैयारी शुरू

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गोगरी. 19 मार्च 2026 गुरुवार को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को सनातन धर्मावलंबी जहां हिंदू नववर्ष की खुशियां मनायेंगे. वहीं कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की आराधना और पूजन करने वाले भक्ति रस में डूब जायेंगे. कलश स्थापना के साथ ही श्रद्धालु शक्ति की अधिष्ठात्री देवी मां दुर्गा की आराधना में जुट जायेंगे. इस वर्ष चैत्र नवरात्रि पूरे नौ दिनों की होगी. 27 मार्च को नवमी तिथि के साथ ही चैत्र नवरात्र की समाप्ति मानी जायेगी. इस दौरान हर दिन माता के भिन्न-भिन्न स्वरूपों की आराधना का विधान है. 19 से 27 मार्च तक श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करेंगे. प्रथम दिन माता शैलपुत्री तथा नौ वें दिन माता सिद्धिदात्री के पूजन के साथ ही नवरात्र समाप्त माना जायेगा. मान्यता है कि पूरे नौ दिनों तक श्रद्धा और नियम के साथ देवी भगवती की पूजन करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. श्रद्धालु सादगी और पवित्रता के साथ व्रत और पूजन करते हैं. नौ दिनों तक उपवास रखने वाले 28 मार्च दशमी को पारणा करेंगे. इस नवरात्रि माता का आगमन डोली पर हो रहा है, जो अस्थिरता, प्राकृतिक आपदा तथा आर्थिक मंदी का संकेत दे रहा है. वहीं, हाथी पर गमन अच्छी वर्षा, फसलों की अधिक पैदावार तथा सुख समृद्धि देने वाला होगा. कब होगा कलश स्थापना गोगरी के भोजुआ निवासी प्रकांड ज्योतिषाचार्य डॉ शुभम सावर्ण ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष प्रतिबद्ध तिथि 19 मार्च गुरुवार से चैत्र नवरात्र आरंभ हो रहा है. कलश स्थापना के साथ ही शक्ति की आराधना शुरू हो जायेगी. 19 मार्च को सुबह 6:02 बजे अमावस्या तिथि में सूर्योदय हो रहा है, जबकि चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा की शुरुआत सुबह 6:41 बजे से हो रही है, जो 20 मार्च शुक्रवार को सुबह 5:24 बजे समाप्त होगी. उसके बाद द्वितीय तिथि का आगमन हो रहा है. सूर्योदय काल में द्वितीया तिथि होने के कारण प्रतिपदा तिथि में 19 मार्च को ही कलश स्थापना कार्य पूर्ण होगा. कलश स्थापना पूरे दिन चलेगा. 25 मार्च को दिन में 4:30 बजे के बाद अष्टमी तिथि शुरू हो रही है जो 26 मार्च गुरुवार को दिन में 2:15 बजे तक रहेगा. महानिशा पूजा और महा अष्टमी का व्रत 26 मार्च को रखा जायेगा. 26 मार्च गुरुवार को दिन में 2:16 बजे से नवमी तिथि शुरू हो रही है, जो 27 मार्च शुक्रवार को दिन में 12:02 बजे तक रहेगा. वैसे में 27 मार्च को ही महा नवमी मनाई जायेगी. इसी दिन ही हवन और विसर्जन किया जायेगा. झंडा रोपण तथा महावीरी जुलूस भी निकालने की परंपरा है. ब्रह्मा ने शुरू किया था सृष्टि सृजन की प्रक्रिया शुरू वैदिक पंचांग के अनुसार 19 मार्च गुरुवार चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से विक्रम संवत 2083 शुरू हो रहा है जिस हिंदू नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है. ज्योतिषाचार्य डॉ सावर्ण ने बताया कि सृष्टि सृजन, भगवान राम का राज्याभिषेक, बसंत ऋतु, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नवीनीकरण तथा ज्योतिषीय गणना को लेकर यह दिन अति महत्वपूर्ण माना जाता है. माना जाता है कि आज ही के दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि सृजन की शुरुआत की थी. नव संवत्सर की शुरुआत भी आज से ही मानी जाती है. इस संवत्सर के राजा गुरु तथा मंत्री मंगल होंगे. गुरु जब राजा होते हैं तो धर्म, ज्ञान, शिक्षा और आर्थिक गतिविधियों में सकारात्मक बढ़ने की संभावना रहती है. वहीं मंगल के मंत्री होने पर ऊर्जा, साहस और कार्य क्षमता से जुड़े क्षेत्रों में तेजी देखने को मिल सकती है.

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