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छुटे हुए जमाबंदी किया जाएगा ऑनलाइन, परिमार्जन प्लस पोर्टल पर रैयत करेंगे आवेदन

Updated at : 30 Aug 2024 11:38 PM (IST)
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पोर्टल पर प्राप्त आवेदन के निष्पादन को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग सख्त

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-पोर्टल पर प्राप्त आवेदन के निष्पादन को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग सख्त -कार्य में लापरवाही बरती तो नपेंगे अंचल अधिकारी से लेकर राजस्व कर्मचारी -अपर मुख्य सचिव ने डीएम को पत्र लिखकर लापरवाह कर्मी को चिन्हित कर अनुशासनिक कार्रवाई के निर्देश खगड़िया. छुटे हुए जमाबंदी को भी ऑनलाइन किया जाएगा. परिमार्जन प्लस पोर्टल पर रैयत आवेदन कर सकते हैं. परिमार्जन पोर्टल के माध्यम से प्राप्त आवेदनों के निष्पादन में शिथिलता/लापरवाही बरतने वाले सीओ,आरओ तथा राजस्व कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने डीएम को पत्र लिखकर परिमार्जन प्लस पोर्टल पर प्राप्त होने वाले आवेदनों का निष्पादन अंचल स्तर पर अभियान चला कर तय समय-सीमा के भीतर कराने सहित लापरवाही/शिथिलता बरतने वाले पदाधिकारी/ कर्मी के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई करने के निर्देश दिये हैं. बताया जाता है कि बिहार भूमि पोर्टल पर डिजिटाईज्ड नहीं किये गए जमाबंदी को परिमार्जन प्लस पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन कराने को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश राज्य स्तर से जारी हुए हैं. उक्त आदेश का शत-प्रतिशत अनुपालन कराने तथा लापरवाही बरतने वालों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कार्रवाई करने को भी कहा गया है. छूटे जमाबंदी होंगे ऑनलाइन, परिमार्जन प्लस पोर्टल के जरिये करें आवेदन जमाबंदी के डिजिटाइजेशन में गलतियों को सुधारने तथा मिसिंग इंट्री दर्ज करने के लिए साल 2022 में नये पोर्टल परिमार्जन प्लस की शुरुआत राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा की गई थी. लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में जमाबंदी ऑनलाइन नहीं हो पाए हैं. विभागीय परिपत्र के मुताबिक अगर किसी रैयत की जमाबंदी ऑफलाइन पंजी में उपलब्ध हैं. लेकिन किसी कारणवश पूर्व में उसे डिजिटाईज्ड नहीं किया जा सका है तो रैयत के साक्ष्य सहित आवेदन के आधार पर मूल जमाबंदी पंजी में उपलब्ध विवरणी के उक्त जमाबंदी को ऑनलाइन किया जाएगा. पोर्टल को प्रभावी बनाकर रैयतों को दी गई अधिक सुविधा छूटे जमाबंदी को ऑनलाइन कराने के दौरान अगर मूल जमाबंदी में दर्ज विवरणी में किसी प्रकार की सुधार की आवश्यकता है पड़ती है तो रैयतों से साक्ष्य लेकर उसे सुधार कर ऑन लाइन किया जाएगा. यानि मूल जमाबंदी में अंकित खाता, खेसरा, रकवा में त्रुटि है या फिर खाता, खेसरा, रकवा आदि छूट गया है तो रैयतों से प्राप्त साक्ष्य/ जमीन के कागजात के आधार पर ऑनलाइन करते वक्त सुधार किया जाएगा. वहीं मूल जमाबंदी पंजी अपठनीय/ जीण-शीर्ण अवस्था में होने/ पन्ना उपलब्ध नहीं रहने की स्थिति में अगर रैयत द्वारा पूर्ण साक्ष्य यानि जमाबंदी पंजी की सत्यापित प्रति/ लगान रशीद/ दाखिल-खारीज आदेश/ शुद्धि- पत्र की प्रति आदि दिये जाते हैं तो उक्त साक्ष्य के आधार पर डिजिटाईज्ड जमाबंदी सृजित की जाएगी. इसके अलावे विभाग द्वारा जमीन के परिमार्जन से संबंधित अन्य आदेश भी जारी किये गए हैं. एडीएम एवं डीसीएलआर करेंगे जांच परिमार्जन प्लस पोर्टल के माध्यम से ऐसी जमाबंदी जिसका सुधार अंचल अधिकारी द्वारा किया गया हो उसकी जांच भी होगी. अपर मुख्य सचिव ने सुधार की गई ऐसी 10 फीसदी जमाबंदी की जांच अपर समाहर्ता को तथा 20 प्रतिशत जमाबंदी की जांच प्रति माह डीसीएलआर को करने के आदेश दिये हैं. कहते हैं अधिकारी जमाबंदी पंजी के ऑनलाइन डिजिटाइजेशन में हुई गलतियों को सुधारने तथा मिसिंग इंट्री दर्ज करने के लिए परिमार्जन प्लस पोर्टल 2022 से ही संचालित है. किसी वजह से डिजिटाईज्ड नहीं हुए जमाबंदी को इसी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया जाएगा. विभागीय परिपत्र के बाद अब छूटे जमाबंदी को ऑनलाइन करने के दौरान अगर मूल जमाबंदी में दर्ज विवरणी ( खाता, खेसरा, रकवा, लगान शुल्क आदि) में सुधार की आवश्यकता पड़ती है तो रैयतों से जमीन के प्रर्याप्त साक्ष्य प्राप्त किये जाएंगे. साक्ष्य के आधार पर ऑन लाइन करते वक्त ही उसे सुधार किया जाएगा. अपठनीय/ क्षतिग्रस्त हो चुके जमाबंदी के मामले में रैयत को उक्त जमाबंदी से संबंधित जमीन के कागजात देने होंगे. जिसके बाद डिजिटाईज्ड जमाबंदी सृजित की जाएगी. परिमार्जन प्लस पोर्टल के माध्यम से प्राप्त मामलों का स-समय निष्पादन नहीं करने वाले पदाधिकारी/ कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी. आरती, एडीएम.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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