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पति की लंबी आयु के लिए सुहागिन महिलाएं आज करेगी वट सावित्री पूजा, बाजार में लगी रही भीड़

Updated at : 25 May 2025 10:20 PM (IST)
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पति की लंबी आयु के लिए सुहागिन महिलाएं आज करेगी वट सावित्री पूजा, बाजार में लगी रही भीड़

घरों में विभिन्न प्रकार पकवानों का निर्माण किया गया तथा हाथों में मेंहदी रचाईं

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खगड़िया. वट सावित्री पूजा को लेकर रविवार को शहर में महिला खरीदारों की भीड़ लगी रही. शहर के राजेन्द्र चौक, बेंजामिन चौक, एनएसी रोड, स्टेशन रोड, माल गोदाम रोड, शहीद प्रभुनारायण चौक स्थित दुकानों में खरीदारी को लेकर भीड़ काफी देखी गयी. खासकर राजेन्द्र चौक से स्टेशन रोड में पूजन सामग्री व फल की खरीदारी के समय जाम की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी. खरीदारी करने पहुंची सुहागिन महिलाओं में खुशी का माहौल था. जिसकी तैयारी को लेकर रविवार से ही जुट गयी. व्रती महिलाएं दौड़ी, बांस से बना पंखा, लीची, आम,कपड़ा, श्रृंगार सहित विभिन्न सामग्री की खरीदारी की.

वट वृक्ष के नीचे व्रति महिलाएं करेंगी सोलह श्रृंगार

ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को सावित्री का व्रत किया जाता है. सुहागिन महिलाएं सोमावर को वट वृक्ष के नीचे पूजा अर्चना करेगी. रविवार को सुहागिन महिलाएं स्नान ध्यान कर पूजा अर्चना के बाद अरवा भोजन प्राप्त की. घरों में विभिन्न प्रकार पकवानों का निर्माण किया गया तथा हाथों में मेंहदी रचाईं. मान्यता है कि जो भी स्त्री इस व्रत को करती है उसका सुहाग अमर हो जाता है. जिस तरह से सावित्री ने अपने अपने पति सत्यवान को यमराज के मुख से बचा लिया था, उसी प्रकार से इस व्रत को करने वाली स्त्री के पति पर आने वाल हर संकट दूर हो जाता है. इस व्रत के दिन स्त्रियां वट ( बरगद ) वृक्ष के नीचे सौलह श्रृंगार कर आभूषण से सुसज्जित सावित्री-सत्यवान का पूजन करती है. इस कारण से यह व्रत का नाम वट-सावित्री के नाम से प्रसिद्ध है.

पति के लिए लंबी उम्र व अच्छे स्वास्थ्य की करेगी कामना

सुहागिन महिलाएं बरगद के पेड़ के नीचे पूजा करेगी. सुबह स्नान करके एक दुल्हन की तरह सजकर एक थाली में प्रसाद जिसमे गुड़, भीगे हुए चने, आटे से बनी हुई मिठाई, कुमकुम, रोली, मोली, 5 प्रकार के फल, पान का पत्ता, धुप, घी का दीया, एक लोटे में जल और एक हाथ का पंखा लेकर बरगद पेड़ के नीचे जाती है. इसके बाद पेड़ की जड़ में जल,प्रसाद चढाकर धूप, दीपक जलाती है. उसके बाद सच्चे मन से पूजा करके अपने पति के लिए लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती है. पंखे से वट वृक्ष को हवा करती है. इसके पश्चात् बरगद के पेड़ के चारों ओर कच्चे धागे से या मोली को 7 बार बांधकर प्रार्थना करती है. परिक्रमा के बाद सवित्री एवं सत्यवान की कथा सुनती है. पुन: घर पहुंचकर जल से पति के चरण धोकर आशीर्वाद लेती है.

वट सावित्री व्रत का पूजन मुहूर्त

पंडित कृष्ण कांत झा ने बताया कि ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि के दिन वट वृक्ष की छांव में देवी सावित्री ने अपने पति की पुन: जीवित किया था. इस दिन से ही वट वृक्ष की पूजा की जाने लगी. हिंदू धर्म में जिस तरह से पीपल के वृक्ष को भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है. उसी तरह बरगद के पेड़ को भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है. बताया कि अमृत: प्रातः 05:25 से प्रातः 07:08 तक,

शुभ-सुबह 08:52 बजे से सुबह 10:35 बजे तक, लाभ दोपहर 03:45 बजे से शाम 05:28 बजे तक, सोमवती अमावस्या शुभ पूजन समय सुबह 11:02 के बाद सूर्यास्त तक है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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