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पूर्वी भारत विज्ञान व इंजीनियरिंग मेला के लिए मधेपुरा के विद्यार्थियों का हुआ चयन

पूर्वी भारत विज्ञान व इंजीनियरिंग मेला के लिए मधेपुरा के विद्यार्थियों का हुआ चयन

मधेपुरा. पूर्वी भारत विज्ञान व इंजीनियरिंग मेला 2026 के लिए मधेपुरा के विद्यार्थियों का चयन किया गया. उत्क्रमित मध्य विद्यालय, चकला के कक्षा आठ के छात्र शिवम कुमार, उच्च माध्यमिक विद्यालय भगवानपुर (सहुगढ़–टू) की कक्षा 10 की छात्रा प्रियाम कुमारी का चयन पूर्वी भारत विज्ञान व अभियंत्रण मेला 2026 के लिए हुआ है. प्रतियोगिता के लिए चयन की घोषणा 53वीं बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी–2025 के अंतिम दिन राज्य शिक्षा शोध व प्रशिक्षण परिषद बिहार में की गयी. यह अंतर्राज्यीय स्तर का विज्ञान व इंजीनियरिंग मेला 13 से 15 जनवरी 2026 तक बिरला इंडस्ट्रियल एंड टेक्नोलॉजिकल म्यूजियम कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में आयोजित होगा, इसमें पूर्वी भारत के स्कूलों, इंजीनियरिंग कॉलेजों व विश्वविद्यालयों के छात्र भाग लेंगे. शिवम का प्रोजेक्ट: स्मार्ट डस्टबिन मॉनिटरिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम कक्षा आठ के छात्र शिवम कुमार ने स्मार्ट डस्टबिन मॉनिटरिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया है. यह प्रणाली सेंसर और लॉट तकनीक की मदद से कूड़ेदान में कचरे के स्तर की निगरानी करती है, जैसे ही डस्टबिन भरने लगता है, यह सिस्टम संबंधित अधिकारियों को अलर्ट भेजता है, जिससे समय पर कचरा निस्तारण संभव हो पाता है. यह प्रोजेक्ट स्वच्छता अभियान को मजबूत करने के साथ-साथ स्मार्ट सिटी जैसी अवधारणाओं को भी साकार करने की दिशा में एक प्रभावी समाधान प्रस्तुत करता है. प्रियम का प्रोजेक्ट: स्मार्ट ग्रॉसरी शॉप सिस्टम कक्षा 10 की छात्रा प्रियाम कुमारी द्वारा विकसित स्मार्ट ग्रोसरी शॉप सिस्टम छोटे दुकानदारों की समस्याओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है. यह सिस्टम वॉयस कमांड और डिजिटल मैपिंग के माध्यम से दुकानों में रखे सामान की सही लोकेशन बताता है. इससे नये कर्मचारी या परिवार के सदस्य भी आसानी से सामान ढूंढ सकते हैं, ग्राहकों का समय बचता है और दुकान की कार्यक्षमता बढ़ती है. अल्स्टॉम आईआरहेड सैयद मोहिब हुसैन ने कहा कि स्टीम लैब के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों में जिस तरह नवाचार और वैज्ञानिक सोच विकसित हो रही है, वह सराहनीय है. शिवम व प्रियम की यह उपलब्धि दिखाती है कि सही मार्गदर्शन मिलने पर हमारे छात्र राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं. उत्क्रमित मध्य विद्यालय चकला के प्रधानाध्यापक ब्रिंदेश कुमार ने कहा कि शिवम कुमार की यह सफलता पूरे विद्यालय के लिए गर्व का विषय है. यह साबित करता है कि ग्रामीण स्कूलों के बच्चे भी विज्ञान व तकनीक में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं. उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय भगवानपुर की प्रधानाचार्या डॉ रूबी कुमारी ने कहा कि प्रियम कुमारी ने अपने प्रोजेक्ट के माध्यम से वास्तविक जीवन की समस्या का वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत किया है. यह हमारे विद्यालय के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है. अल्स्टॉम के स्टीम लैब में कार्यरत इनोवेशन कोच आनंद विजय ने कहा कि इन दोनों छात्रों ने सीमित संसाधनों में असाधारण सोच और मेहनत का परिचय दिया है. इआइएसइएफ जैसे मंच पर उनका चयन यह दिखाता है कि भारत का भविष्य नवाचार और विज्ञान में सुरक्षित हाथों में है. जिले के लिए प्रेरणा शिवम कुमार व प्रियम कुमारी की यह उपलब्धि न केवल उनके विद्यालय बल्कि पूरे मधेपुरा जिले के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है. यह सफलता बताती है कि सही मार्गदर्शन, निरंतर अभ्यास व नवाचार की सोच से कोई भी छात्र बड़े मंच तक पहुंच सकता है.

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