प्रेम बच्चे का जीवन संवार देती है, मोह जीवन को बर्बाद - साध्वी वर्षा नागर

प्रेम बच्चे का जीवन संवार देती है, मोह जीवन को बर्बाद - साध्वी वर्षा नागर
बेलदौर. प्रेम बच्चे का जीवन संवार देती है, जबकि मोह उसके जीवन को बर्बाद कर देती है. उक्त प्रसंग बुधवार को नपं बेलदौर के गांधी इंटर विद्यालय के खेल मैदान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचिका साध्वी वर्षा नागर ने कही. इन्होंने प्रेम और मोह के अंतर को श्रीमद्भागवत कथा के प्रसंग को सरल तरीके से वर्णन कर सत्संग में उमड़े श्रद्धालुओं को बताया. इन्होंने महाभारत के कथा की चर्चा करते बताई कि माता पिता के निश्च्छल प्रेम बच्चों में संस्कारों को जन्म देती है, जबकि मोह ने 100 बेटों का सर्वनाश कर दिया. इन्होंने बताई कि अति प्रेम भी कष्ट का कारण होती है, अर्जुन के अति प्रेम के भ्रम को भी भगवान कृष्ण ने करूणा के भाव से तब दूर किया जब एक गाय अपने नवजात बछड़े को जीभ से सहलाकर उसके प्रति प्रेम दिखा रही थी, प्रेम के वशीभुत गाय के खुरदरे जीभ द्वारा सहलाने से जब मासुम अति कोमल बछड़े के चमड़े से खुन निकलने लगा तब अर्जुन को अति प्रेम के दुष्प्रभाव का भ्रम टूटा. इन्होंने बताई कि साधना से संत एवं गलत वासना की चाह से असुरी प्रवृत्ति वाले बच्चे का जीवन हो जाता है तो माता पिता का संस्कारी होना आवश्यक है, इसके लिए संतों की संगति एवं सत्संग जरूरी है. वहीं उज्जैन की सुप्रसिद्ध युवा कथा वाचिका वर्षा नागर की कथा को सुनने के लिए इलाके के लोगों में उत्साह का माहौल है, उक्त कथावाचिका सांसारिक जीवन छोड़कर आध्यात्मिक मार्ग पर चलते लोगों के बीच ज्ञान की अमृत वर्षा कर रही है. अपने कथा प्रसंग में वे पारिवारिक मूल्य संस्कार और जीवन के अनमोल रहस्यों पर जोर देते हुए बतायी कि मेरा जीवन आध्यात्मिक जीवन में गुजर जाएगा. उक्त मामले में आयोजक ने बताया कि एक सप्ताह तक वर्षा नागर का भागवत कथा जारी रहेगी. सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन से आसपास का माहौल भक्तिमय बना हुआ है.
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