खगड़िया में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी पर विशेष निगरानी, मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए प्रशासन का बड़ा कदम
-बैठक में भाग लेते डीएम विक्रम विरकर. | Prabhat Khabar Network
खगड़िया प्रशासन ने मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान और सख्त निगरानी की नई रणनीति बनाई है. इसका उद्देश्य प्रसव संबंधी जटिलताओं को रोकना और गर्भवती महिलाओं को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ देना है.
Khagaria News: खगड़िया जिले में मातृ मृत्यु दर कम करने और गर्भवती महिलाओं को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने नई रणनीति तैयार की है. अब हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (High Risk Pregnancy) की विशेष पहचान कर उसकी सख्त निगरानी की जाएगी, ताकि प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं और मातृ मृत्यु के मामलों को रोका जा सके. इसी विषय पर गुरुवार को जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) के बिहार स्टेट हेड ऑफ ऑफिस ख्वाजा एस. के साथ समाहरणालय में विस्तृत समीक्षा बैठक की.
हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की समय पर पहचान पर सबसे ज्यादा जोर
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा हाई रिस्क गर्भावस्था की समय पर पहचान को बनाया गया.
डीएम विक्रम विरकर ने कहा कि यदि गर्भावस्था के दौरान किसी महिला में जटिलता के संकेत दिखाई देते हैं, तो उसे सामान्य प्रसव के लिए इंतजार नहीं कराया जाना चाहिए. ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह, आवश्यक उपचार और जरूरत पड़ने पर उच्च स्वास्थ्य संस्थान में समय पर रेफर करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.
नियमित प्रसव पूर्व जांच से रोकी जा सकती हैं कई जटिलताएं
जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि सभी गर्भवती महिलाओं को नियमित प्रसव पूर्व जांच (ANC Check-up) की सुविधा उपलब्ध कराई जाए.
उन्होंने कहा कि समय-समय पर जांच होने से एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, गर्भावस्था संबंधी जटिलताएं और अन्य गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान समय रहते की जा सकती है, जिससे प्रसव के दौरान खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
प्रसव के बाद मां और नवजात की भी होगी निगरानी
बैठक में यह भी तय किया गया कि केवल प्रसव तक ही नहीं, बल्कि प्रसव के बाद मां और नवजात शिशु को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की भी नियमित निगरानी की जाएगी.
डीएम ने कहा कि प्रसवोत्तर देखभाल (Postnatal Care) मातृ और शिशु मृत्यु दर कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
संस्थागत प्रसव बढ़ाने पर विशेष फोकस
बैठक में संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) की दर बढ़ाने को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई.
ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने, एंबुलेंस व्यवस्था मजबूत करने और प्रसव के दौरान आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया.
स्वास्थ्य विभाग और सहयोगी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय
यूएनएफपीए और स्वास्थ्य विभाग के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाने की योजना पर भी चर्चा हुई.
बैठक में गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग, जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की सूची तैयार करने और समयबद्ध फॉलो-अप प्रणाली को मजबूत करने पर सहमति बनी.
Khagaria News: जागरूकता भी उतनी ही जरूरी जितनी चिकित्सा सुविधा
डीएम विक्रम विरकर ने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार केवल अस्पतालों की सुविधाएं बढ़ाने से संभव नहीं होगा.
उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को सुरक्षित प्रसव, नियमित जांच, पोषण, टीकाकरण और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के संकेतों के प्रति जागरूक करना भी उतना ही आवश्यक है. इसके लिए ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य कर्मियों, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका को और मजबूत किया जाएगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हाई रिस्क गर्भावस्था की पहचान और रेफरल प्रणाली प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो खगड़िया जिले में मातृ मृत्यु दर कम करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.
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लेखक के बारे में
By राजकिशोर सिंह
राजकिशोर सिंह प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. अभी प्रभात खबर के खगड़िया कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति, राजनीति की खबरों में रुचि रखते हैं.
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