मौसम की मार और गिरते दामों ने तोड़ी किसानों की कमर, बेलदौर के मक्का उत्पादक रो रहे खून के आंसू
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 24 May 2026 2:25 PM
Khagaria News
Khagaria News: कभी ‘पीला सोना’ उगाने वाले बेलदौर के किसान आज बदहाल हैं. आंधी, ओलावृष्टि, भीषण गर्मी और मक्का की गिरती कीमतों ने किसानों को कर्ज और नुकसान के दलदल में धकेल दिया है.
Khagaria News: बेलदौर खगड़िया से अमित सिंह की रिपोर्ट. एशिया में मक्का उत्पादन के लिए पहचान रखने वाला बेलदौर प्रखंड इस बार मौसम की मार से कराह उठा है. कभी किसानों की समृद्धि का प्रतीक रही मक्का की फसल अब उनके लिए चिंता और नुकसान का कारण बन गई है. आंधी-तूफान, ओलावृष्टि, चिलचिलाती गर्मी और बाजार में मक्का के गिरते दामों ने किसानों की आर्थिक स्थिति को झकझोर कर रख दिया है.
आंधी और ओलावृष्टि ने तबाह कर दी तैयार फसल
बेलदौर और फरकिया क्षेत्र के किसानों ने इस बार बड़े पैमाने पर मक्का की खेती की थी. फसल खेतों में लहलहा रही थी और किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद थी. लेकिन अचानक आए आंधी-तूफान और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसल को बर्बाद कर दिया. कई किसानों की फसल जमीन पर गिर गई, जिससे उत्पादन पर भारी असर पड़ा.
किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा ने उनकी महीनों की मेहनत कुछ घंटों में खत्म कर दी. नुकसान का दर्द अभी कम भी नहीं हुआ था कि भीषण गर्मी ने हालात और खराब कर दिए.
भीषण गर्मी बनी किसानों की नई चुनौती
इन दिनों बेलदौर क्षेत्र में तेज धूप और उमस ने किसानों और मजदूरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. खेतों में बची हुई फसल को समेटने और सुखाने का काम भी प्रभावित हो रहा है. किसान सुबह से शाम तक तपती धूप में काम करने को मजबूर हैं.
स्थानीय किसानों का कहना है कि मौसम की बेरुखी के कारण मजदूर भी खेतों में ज्यादा देर तक काम नहीं कर पा रहे हैं. इससे फसल तैयार करने में देरी हो रही है और नुकसान बढ़ता जा रहा है.
गिरते दामों ने बढ़ाई चिंता
प्राकृतिक आपदा के बाद अब मक्का के बाजार भाव ने किसानों को बड़ा झटका दिया है. किसानों का कहना है कि इस बार मक्का की कीमत इतनी कम हो गई है कि लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है. बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर भारी खर्च करने के बावजूद उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल रहा.
कई किसानों ने बताया कि खेती के लिए उन्होंने महाजनों से कर्ज लिया था. अब फसल खराब होने और दाम गिरने के कारण कर्ज चुकाने की चिंता सताने लगी है.
सरकार और प्रशासन से मदद की मांग
किसानों का आरोप है कि सरकार और कृषि विभाग उनकी समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं हैं. उन्होंने फसल नुकसान का सर्वे कर मुआवजा देने और मक्का का समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग की है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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