फर्जी प्रमाण पत्र से 22 साल नौकरी का आरोप, शिक्षिका पर निलंबन की कार्रवाई शुरू
फोटो- प्रभात खबर में प्रकाशित खबर. | Prabhat Khabar Network
खगड़िया में एक शिक्षिका पर फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र के आधार पर 22 साल नौकरी करने का गंभीर आरोप लगा है. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच के बाद शिक्षिका चंदन कुमारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है. मामले की गंभीरता को देखते हुए उनके निलंबन की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है.
Khagaria Fake Certificate Case: खगड़िया. सदर प्रखंड के रसौंक पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय घरारी में कार्यरत शिक्षिका सह प्रधानाध्यापिका चंदन कुमारी के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र से जुड़े मामले में मोरकाही थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है. प्राथमिकी दर्ज होने के बाद शिक्षिका छुट्टी लेकर विद्यालय से अनुपस्थित हो गई हैं. जिला शिक्षा पदाधिकारी अमरेन्द्र कुमार गौंड ने बताया कि शिक्षिका के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जा रही है.
प्राथमिकी के बाद छुट्टी लेकर हुईं अनुपस्थित
बताया जाता है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी शिक्षिका विद्यालय पहुंचकर अपनी ड्यूटी कर रही थीं. बाद में मामले को लेकर खबर प्रकाशित होने के बाद उन्होंने छुट्टी ले ली और विद्यालय से अनुपस्थित हो गईं. घटना के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद विभागीय स्तर पर तत्काल क्या कार्रवाई की गई.
नियोजन के समय प्रमाण पत्र में मिली गड़बड़ी
न्यायालय के आदेश के बाद नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक एवं प्रशैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को सौंपी गई थी. इसी जांच के क्रम में वर्ष 2005 में रसौंक पंचायत नियोजन इकाई के माध्यम से नियुक्त चंदन कुमारी के प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया गया.
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना से प्राप्त सत्यापन रिपोर्ट में उनके प्रमाण पत्र में कई अंतर सामने आए. निगरानी के अनुसार नियोजन के दौरान प्रस्तुत अंक पत्र में पिता के नाम और प्राप्तांक में बदलाव पाया गया.
578 की जगह 594 अंक दर्शाने का आरोप
निगरानी जांच के अनुसार वर्ष 1994 की इंटर परीक्षा में रोल कोड 8304 और रोल नंबर 30139 से संबंधित बोर्ड रिकॉर्ड में छात्रा का नाम चंदन कुमारी दर्ज है. बोर्ड रिकॉर्ड में पिता का नाम छोटेलाल रजक और कुल प्राप्तांक 578 अंक दर्ज बताए गए हैं.
वहीं नियोजन के दौरान प्रस्तुत अंक पत्र में पिता के नाम के स्थान पर गौरी शंकर रजक का नाम तथा कुल प्राप्तांक 594 अंक दर्शाए जाने की बात सामने आई है. दोनों दस्तावेजों में जन्मतिथि 2 मार्च 1976 दर्ज बताई गई है.
धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज
निगरानी जांच में प्रमाण पत्र में कथित छेड़छाड़ सामने आने के बाद शिक्षिका के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई. मामले की आगे की जांच निगरानी और पुलिस स्तर पर जारी है.
22 वर्षों की सेवा और सरकारी राशि की भी हो सकती है जांच
मामले में अब यह भी जांच का विषय बन सकता है कि शिक्षिका की नियुक्ति के समय प्रमाण पत्रों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ था और कथित रूप से गलत प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति कैसे हुई. यदि जांच में प्रमाण पत्र फर्जी साबित होता है तो नियुक्ति से अब तक मिले वेतन और अन्य सरकारी लाभ की भी विभागीय स्तर पर समीक्षा की जा सकती है.
इसके साथ ही कथित फर्जीवाड़े में किसी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका रही है या नहीं, इसकी भी जांच संभव है. नियमानुसार दोष सिद्ध होने पर सरकारी राशि की वसूली को लेकर भी विभाग आगे की कार्रवाई कर सकता है.
निलंबन की कार्रवाई शुरू: डीईओ
Khagaria Fake Certificate Case: जिला शिक्षा पदाधिकारी अमरेन्द्र कुमार गौंड ने बताया कि शिक्षिका के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने की सूचना मिली है. उन्होंने कहा कि मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षिका के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की जा रही है. विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई भी नियमानुसार की जाएगी.
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लेखक के बारे में
By राजकिशोर सिंह
राजकिशोर सिंह प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. अभी प्रभात खबर के खगड़िया कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति, राजनीति की खबरों में रुचि रखते हैं.
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