जामा मस्जिद में चार जिले के हज यात्रियों को कोलकाता के प्रशिक्षक ने दिया प्रशिक्षण

हज के बाद हमारे जिंदगी में तब्दीली आए और हम अल्लाह के हुक्मों की पाबंदी करने वाले बनें. लोगों के साथ मोहब्बत, इंसानियत और अच्छे एखलाक के साथ पेश आने वाले बनें.
हज कर लेने से किसी भी व्यक्ति का कर्ज या हक माफ नहीं होता है. खगड़िया. हर साल की तरह इस साल भी जमीअत उलमा ए हिंद द्वारा हज की यात्रा पर जाने वाले हज यात्रियों को प्रशिक्षण दिया गया. प्रशिक्षण भारत के प्रसिद्ध हज ट्रेनर कोलकाता के मो कैसर अली खान द्वारा जामा मस्जिद में दिया गया. जिसमें हज पर जाने वाले चार जिले खगड़िया, बेगुसराय, मुंगेर और सहरसा के हज यात्रियों ने भाग लिया. हज कार्यक्रम की अध्यक्षता जमीअत उलेमा के अध्यक्ष सैयद खालीद नजमी ने किया. जबकि मंच संचालन जमीअत उलेमा हिंद के जिला महासचिव कारी मो. सरफराज आलम ने निभाया. प्रशिक्षक कैसर अली खान ने हज व उमरे के तमाम फराएज, वाजिवात और सुन्नतों की तफसील हाजीयों को आसान और सीधे सरल शब्दों में बताया. साथ ही हज में किन चीजों से बचना है उस पर भी प्रकाश डाला गया. उन्होंने ने कहा कि इस्लाम की बुनियाद पांच सुतुनों (पिलर) पर कायम है. ईमान , नमाज, रमजान के रोजे, जकात और हज. हज मालदार मुसलमानों पर जिंदगी में सिर्फ एक बार फर्ज है. उन्होंने कहा कि रब सबका है और सब रब का है. इसलिए तमाम हाजियों को हज के मौके पर सब के लिए दुआ करनी है. तमाम दुनिया के लोगों के लिए, तमाम इंसानियत के लिए और ख़ास कर अपने मुल्क के लिए अपनी दुआओं में जरूर याद रखें. उन्होंने ने कहा हज यात्रा पर जाने वाले किसी भी व्यक्ति का अगर कर्ज या हक बाकी है तो पहले उसको अदा करना जरूरी है. हज कर लेने से किसी भी व्यक्ति का कर्ज या हक माफ नहीं होता है. प्रशिक्षण शिविर में सैयद खालिद नजमी ने कहा कि हज इस्लाम के अरकानों में से एक रुकन है. जो हर मालदार मुसलमान पर फर्ज है. हज के बाद हमारे जिंदगी में तब्दीली आए और हम अल्लाह के हुक्मों की पाबंदी करने वाले बनें. लोगों के साथ मोहब्बत, इंसानियत और अच्छे एखलाक के साथ पेश आने वाले बनें. मौके पर उपाध्यक्ष मो मोहिउद्दीन, जेनरल सेक्रेटरी बेगूसराय मौलाना मुअज्जम अली, मौलाना जलालुद्दीन इमाम जामा मस्जिद जलकौरा, मो. अमजद नजीर नाजिम ए तंजीम जमीयत उलमा, मो. अख्तर आलम अध्यक्ष हज कमेटी सहरसा, मो हाफिजुर रहमान मुंगेर, गुलाम मोहम्मद मुंगेर, हाफिज इमाम उद्दीन मेहसौरी, मौलाना कमाल अनवर इमाम जामा मस्जिद रसौंक, मो शमीम व मो मुकीम, हाजी मो शरीफ, मो अफरोज आदि मौजूद थे.
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