खगड़िया में बाल सुधार गृह का निर्माण जल्द

Updated at : 31 Mar 2017 5:39 AM (IST)
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खगड़िया में बाल सुधार गृह का निर्माण जल्द

उप महाप्रबंधक ने डीएम से मांगा जमीन का एनओसी खगड़िया : जिले को काफी अरसे से बाल सुधार गृह यानी रिमांड होम का इंतजार है. कई अलग अलग कारणों की वजह से इस जिले में बाल सुधार गृह का निर्माण अबतक नहीं हो पाया है. जबकि राज्य सरकार ने राशि बहुत पहले ही आवंटित कर […]

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उप महाप्रबंधक ने डीएम से मांगा जमीन का एनओसी

खगड़िया : जिले को काफी अरसे से बाल सुधार गृह यानी रिमांड होम का इंतजार है. कई अलग अलग कारणों की वजह से इस जिले में बाल सुधार गृह का निर्माण अबतक नहीं हो पाया है. जबकि राज्य सरकार ने राशि बहुत पहले ही आवंटित कर दी है. बीते कुछ वर्षों से जमीन की वजह से भी बाल सुधार गृह का निर्माण नहीं हो पाया है. जमीन की खोज हो चुकी है. अब निर्माण के लिए कार्यकारी एजेंसी के द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगा गया है. बिहार राज्य भवन निर्माण सिंडिकेट मुंगेर के उप महाप्रबंधक ई. विनोद चौधरी ने डीएम को पत्र लिखा है तथा बाल सुधार गुप्त के भवन निर्माण हेतु चयनित जमीन पर निर्माण हेतु एनओसी देने का अनुरोध किया है.
हो रही है परेशानी
बाल सुधार गृह नहीं होने के कारण काफी परेशानी होती है. यहां के बच्चों को मुंगेर जिले में अवस्थित बाल सुधार में रखा जाता है. बताया जाता है कि यहां के करीब 17-18 बच्चे फिलहाल मुंगेर में रह रहे हैं. पहले नाव या स्टीमर से गंगा पर कर इन बच्चों को वहां से यहां तथा यहां से वहां ले जाया जाता था. अब भीड़ भरी ट्रेन में बच्चों को डेट पर वहां से लाने तथा यहां से ले जाने का सिलसिला चल रहा है. बच्चों को लाने एवं वहां पहुंचाने में काफी परेशानी होती है.
बाल सुधार गृह नहीं होने का ही नतीजा है कि इस जिले में नाबालिग बच्चों से जुड़े मामलों की सुनवाई न्यायालय परिसर अवस्थित किशोर न्याय परिषद में होती है. बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष अजय कुमार सिंह की माने तो यहां किशोर न्याय परिषद व्यवहार न्याय परिषद में अवस्थित है. जबकि इस परिषद को न्यायालय परिसर से बाहर होना चाहिए. राज्य स्तर पर यह मामला कई बार उठा है, अगर यहां बाल सुधार गृह का निर्माण हो जाता है तो संभव है कि इसी भवन में किशोर न्याय परिषद के कार्यालय को भी शिफ्ट कर दिया जाये. बाल गृह बाल सुधार गृह के साथ साथ खगड़िया जिले में अनाथ,
भूले बिछड़े बच्चों को रखने के तक की व्यवस्था नहीं है ऐसे बच्चों को बाल गृह में रखा जाता है. यहां बाल गृह उपलब्ध नहीं रहने के कारण अनाथ भूले बिछड़े बच्चों को जिला बाल कल्याण समिति के द्वारा दूसरे जिले यानी भागलपुर बेगूसराय, सहरसा, पूर्णिया जिले के बाल गृह में भेजा जाता है.
ले आउट की मिली मंजूरी
बाल सुधार गृह निर्माण की सभी तैयारी पूरी हो चुकी है. उप महाप्रबंधक ने डीएम को लिखे पत्र में इस बात का उल्लेख किया है कि सुधार गृह निर्माण की निविदा हो चुकी है. तथा संवेदक को कार्य आवंटित भी कर दिया गया है. निदेशक से ले आउट की सहमति भी प्राप्त हो गई है. प्रशासी विभाग से सहमति प्राप्त होते ही बाल सुधार गृह का निर्माण कार्य आरंभ किये जाने की बात कही गयी है.
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