पॉकेट में नोट रहते खाने का संकट

Published at :13 Nov 2016 3:31 AM (IST)
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पॉकेट में नोट रहते खाने का संकट

खगड़िया : पॉकेट में नोट रहने के बाद भी खाने का संकट है. लोगों के पास हजार और पांच सौ के नोटों की कमी नहीं है. वे बैंक में भी प्रयास कर चुके हैं कि बदले जा सकें, लेकिन बैंक में भी उन्हें भीड़ के कारण नाकामी मिली है. नतीजा है कि पैसा रहने के […]

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खगड़िया : पॉकेट में नोट रहने के बाद भी खाने का संकट है. लोगों के पास हजार और पांच सौ के नोटों की कमी नहीं है. वे बैंक में भी प्रयास कर चुके हैं कि बदले जा सकें, लेकिन बैंक में भी उन्हें भीड़ के कारण नाकामी मिली है. नतीजा है कि पैसा रहने के बाद भी न तो राशन मिल पा रहा और न ही जरूरत के सामान. घर से लेकर किचेन तक अब किचकिच शुरू हो गयी है.

राशन के अभाव में किचेन में भी सन्नाटा देखने को मिल रहा है. मुश्किपुर महताब नगर के मो सरफराज़ एक हजार रुपया लेकर घर से राशन के लिए निकले थे. नोट बदलने के लिए बैंक में प्रयास किये. नाकामी हाथ लगी. बाद में सामान लेने के लिए बाजार में गये, तो दुकानदारों ने सामान देने से इनकार कर दिया. कारोबारी उधार सामान देने को तैयार थे. वहीं अनु व रोज ने भी कहा कि बैंक में रुपये नहीं बदल पाने के कारण उन्हें काफी परेशानी हुयी.

यह किसी एक आदमी का नहीं बल्कि आज अधिकतर परिवार इस समस्या से जूझ रहा है. उधर, बाजार में तो चारों तरफ सन्नाटा दिख रहा. जिन दुकानों में सुबह आठ बजे से रात के आठ बजे तक काफी भीड़ रहती थी, वहां आज ग्राहक का इंतजार हो रहा है. इमालितर के गल्ला व्यव्सायी प्रीतम कुमार की मानें तो प्रतिदिन उनके यहां तीन से चार लाख का कारोबार होता था. शनिवार को एटीएम, डेबिट कार्ड की बदौलत 50 से 60 हजार रुपये का कारोबार हो रहा. चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष वीरप्रकाश गुप्ता ने कहा पिछले चार दिनों में 10 करोड़ रुपये की क्षति बाजार को हुई है.

गोगरी. केंद्र सरकार द्वारा काला धन निकालने की तरकीब महिलाओं और खास कर गृहणियों को रास नहीं आ रहा है. भ्रष्टाचारियों के कालाधन को निकालने के चक्कर में महिलाओं द्वारा पति से छुपा कर छिपाये गये कलाधन भी अब बाहर आने लगे हैं. पांच सौ व हजार के पुराने नोटों को बंद कर दिये जाने की नीति से देश में कालाधन व भ्रष्टाचार पर किस हद तक लगाम लग पायेगा, ये तो आने वाला समय बतायेगा. फिलहाल इतना असर तो दिख ही रहा है
कि लोग बड़ी संख्या में ऐसे नोट बैंकों में जमा करवा रहे हैं. गृहीणियों को इसी का सबसे अधिक मलाल है. गौरतलब है कि साधारण परिवारों में महिलाओं द्वारा रोजमर्रा के खर्च से कुछ राशि बचा कर रखने का रिवाज बहुत पुराने से चला आ रहा है. इस तरह से बचायी गयी राशि की जानकारी आम तौर पर घर के मुखिया को नहीं रहती है. शादी विवाह या अन्य ऐसे ही अवसरों पर महिलाएं इस राशि को अपनी मन मर्जी के मुताबिक खर्च करती रही हैं. पर सरकार की इस नयी योजना ने गृहणियों को खासा गमजदा कर दिया है. स्थिति से मजबूर होकर अब उन्हें पैसे का राज जाहिर करना पड़ रहा है, ताकि उन्हें बैंकों में जमा करवाया जा सके.
एटीएम खुलने का लोगों को इंतजार
गोगरी : पांच सौ व हजार रुपये के नोट का प्रचलन बंद होने के बाद मची अफरातफरी चौथे दिन भी जारी रहा. हर हाथ में हजार व पांच सौ रुपये के नोट थे. कहीं जमा करने को कतार तो बदलने की जल्दबाजी दिखी. गोगरी में बैंक खुलते ही अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गयी. वैसे यहां आधा दर्जन अस्थायी अतिरिक्त काउंटर की भी व्यवस्था की गयी थी. भारतीय स्टेट बैंक, यूनियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, कैनरा बैंक, यूको बैंक, बंधन बैंक की मुख्य शाखा में लंबी कतार लगी रही.
व्यवस्था में जुटे स्टेट बैंक के प्रबंधक एसके रंजन ने बताया कि निकासी और जमा हो रही है. छठ पर्व के बाद शहर लौटे लोगों को गृह खर्च के लिए पैसे की दरकार अधिक दिखी. 10 बजते-बजते तो बैंक शाखाओं के बाहर सड़कों पर भी लोगों की कतार लगी रही. शहर स्थित सभी बैंक शाखाओं में लंबी-लंबी कतार लगी रही. जमालपुर बाजार स्थित यूको बैंक में सुबह में भीड़ नहीं के बराबर थी. निकासी व बदलने का काम नहीं हो रहा था. उपभोक्ताओं को रुपये नहीं रहने का हवाला दिया जा रहा था.
वहीं यूनियन बैंक के शाखा प्रबंधक रंजन कुमार के द्वारा लोगों को समझाया जा रहा था. दोपहर बाद यहां निकासी व बदलने का काम शुरू हुआ जो रात तक चलता रहा. रोड नंबर 14 स्थित बैंक ऑफ इंडिया में 11 बजे अधिक भीड़ थी. नोट बदलने का काम बंद था. इसी तरह बैंक ऑफ बड़ौदा की स्थिति रही.
सबसे अधिक परेशानी घोषणा के बावजूद एटीएम नहीं खुलने के कारण हो रही थी. वकालत खाना स्थित बंधन बैंक की शाखा के बाहर सड़क तक कतार लगी थी. वैसे महेशखूंट लोहिया चौक स्थित एसबीआइ का एटीएम सबसे पहले खुला. इसकी भनक लगते ही देखते ही देखते भीड़ उमड़ पड़ी.
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