नवजात की मौत, निजी क्लिनिक में तोड़फोड़
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :12 Nov 2016 8:12 AM (IST)
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परिजनों ने इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप, तो डॉ आलोक ने तोड़फोड़ के बाद सदर थाने में दिया आवेदन खगड़िया. नवजात की मौत बाद आक्रोशित परिजनों ने मील रोड स्थित डॉ अर्णव आलोक के क्लीनिक में शुक्रवार की शाम तोड़फोड़ किया. भीड़-भाड़ वाले मील रोड में क्लीनिक रहने के कारण हंगामा के दौरान अफरातफरी […]
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परिजनों ने इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप, तो डॉ आलोक ने तोड़फोड़ के बाद सदर थाने में दिया आवेदन
खगड़िया. नवजात की मौत बाद आक्रोशित परिजनों ने मील रोड स्थित डॉ अर्णव आलोक के क्लीनिक में शुक्रवार की शाम तोड़फोड़ किया. भीड़-भाड़ वाले मील रोड में क्लीनिक रहने के कारण हंगामा के दौरान अफरातफरी मच गयी. आंधे घंटे तक काटे गये बवाल के दौरान क्लीनिक में लगे सीसीटीवी कैमरे के अलावा कई चीजों को नुकसान पहुंचाया गया है. इस संबंध में डॉ अर्णव आलोक ने सदर थाना में अज्ञात लोगों के खिलाफ आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है.
जानकारी के अनुसार मथुरापुर निवासी अमित कुमार की पत्नी प्रीती देवी को डिलवरी के लिए नौ नवंबर को सदर अस्पताल में भरती करवाया गया. जहां रात के करीब 12:45 बजे प्रीती ने लड़की को जन्म दिया, लेकिन जन्म के बाद बच्ची के नहीं रोने सहित अन्य परेशानी उत्पन्न होने के बाद रात के करीब 2:45 बजे नवजात को मील रोड स्थित डॉ अर्णव आलोक के निजी क्लीनिक में भरती कराया, जहां दो दिनों तक इलाज के एवज में करीब आठ हजार रुपये ले लिये गये, लेकिन बच्ची की स्थिति बिगड़ती जा रही थी. 10 नवंबर गुरुवार को रात के नौ बजे नवजात को बेगुसराय रेफर कर दिया गया. बेगुसराय स्थित डॉ कुंदन के क्लीनिक में बच्ची को भरती करवाये जाने के अगले दिन शुक्रवार की दोपहर नवजात बच्ची की मौत हो गयी. इससे गुस्साये बच्ची के परिजनों ने शुक्रवार की शाम मील रोड स्थित डॉ अर्णव आलोक के क्लीनिक में पहुंच कर हंगामा किया.
परिजनों का कहना था कि बच्ची के इलाज में लापरवाही व रेफर के खेल में उसकी मौत हुई है.जब इलाज की व्यवस्था डॉ अर्णव आलोक के क्लीनिक में नहीं थी, तो भरती ही क्यों लिया. दो दिनों तक रख कर हजारों रुपये ले लिया और फिर बीमारी बढ़ गयी तो रेफर कर पल्ला झाड़ लिया गया. इधर, डॉ अर्णव ने कहा कि बच्ची को भरती कराने आये परिजनों को सारी बात पहले ही बता दी गयी थी, लेकिन वे लोग भरती करने का दबाव दे रहे थे. उन्होंने कहा कि इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती गयी है.
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