नंबर प्राइवेट, टैक्सी कॉमर्सियल
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :02 Aug 2016 5:48 AM (IST)
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खगड़िया : परिवहन विभाग की उदासीनता के कारण जिले में टैक्सी के रूप में फर्राटे भरती हैं प्राइवेट नंबर की गाड़ियां इतना ही नहीं कई प्राइवेट नंबर की गाड़ियां सरकारी कामकाज में प्रयुक्त की जा रही हैं. गत कुछ वर्षों में जिले में चार पहिया वाहनों की संख्या में इजाफा हुआ है. इनमें से अधिकांश […]
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खगड़िया : परिवहन विभाग की उदासीनता के कारण जिले में टैक्सी के रूप में फर्राटे भरती हैं प्राइवेट नंबर की गाड़ियां इतना ही नहीं कई प्राइवेट नंबर की गाड़ियां सरकारी कामकाज में प्रयुक्त की जा रही हैं. गत कुछ वर्षों में जिले में चार पहिया वाहनों की संख्या में इजाफा हुआ है. इनमें से अधिकांश प्राइवेट नंबर की गाड़ियां टैक्सी के रूप में सड़कों पर फर्राटा भर रही है. सरकारी विभाग व सरकारी कामकाज में भी ऐसे कई प्राइवेट नंबर की गाड़ियां का उपयोग हो रहा है.
वित्तीय वर्ष 2014-15 में जिला परिवहन ने भले ही लक्ष्य के विरुद्ध लक्ष्य से अधिक राजस्व की प्राप्ति कर अपनी पीठ थपथपा ली पर सच्चाई यह है कि आज भी जिले में सैकड़ों प्राइवेट नंबर की गाड़ियां टैक्सी के रूप में फर्राटे भर रही है और सरकारी राजस्व को चूना लगा रहे है. नियमत: व्यवसायिक रूप से इस्तेमाल होने वाली चार पहिया वाहनों में नंबर प्लेट पीले रंग से रंगी होनी चाहिए और कर भी व्यवसायिक अदा किया जाना चाहिए.
जिले में पीले नंबर प्लेट वाली व्यवसायिक गाड़ी गाहे-बगाहे ही दिखती है, जबकि अधिकांश प्राइवेट गाड़ियां टैक्सी के रूप में चल रही है. जहां तक सरकारी कार्यालय व विभागों की बात है तो जिन विभागों के पास गाड़ियां नहीं, उन विभागों ने भाड़े पर गाड़ियां ले रखी है पर विडंबना है इनमें से भी अधिकांश गाड़ियां प्राइवेट नंबर की ही है. इन गाड़ियों पर संबंधित विभाग के साहब चढ़ते हैं. आखिर इन्हें कौन रोकेगा और कौन करेगा जुर्माना. इससे चालकों का हौंसला हमेशा बुलंद रहता है. पल्स पोलियो अभियान हो या फिर अन्य कोई जागरूकता अभियान.
इनमें उपयोग में लाई जाने वाली अधिकांश गाड़ियां प्राइवेट नंबर वाली ही होती है और विभाग उसका किराया वहन करता है. चुनावी मौसम में तो प्राइवेट नंबर की गाड़ियों का जनसंपर्क व चुनाव प्रचार के लिए धड़ल्ले से उपयोग होता है. गौरतलब है कि जिले में रजिस्टर्ड चार पहिया वाहन की संख्या में से दस फीसदी वाहन का भी व्यवसायिक रूप में निबंधन नहीं है, जबकि नब्बे फीसदी गाड़ियां धड़ल्ले से टैक्सी के रूप में सड़कों पर दौड़ती है.
सरकारी विभाग में चल रही हैं प्राइवेट नंबर की गाड़ियां, राजस्व को लग रहा है चूना
कहते हैं डीटीओ
डीटीओ अब्दुल रज्जाक ने बताया कि यदि प्राइवेट गाड़ी टैक्सी के रूप में चलायी जायेगी, तो वाहन मालिक के विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी. इस तरह की मामले सामने नहीं आया है. लगातार वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है.
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