निगरानी करे ऋण वितरण की जांच

Published at :25 Jul 2016 6:31 AM (IST)
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निगरानी करे ऋण वितरण की जांच

कार्रवाई. संयुक्त निबंधक ने निबंधक पटना को लिखा पत्र, एमडी की भूमिका संदिग्ध कुछ वर्षों के दौरान ऋण वितरण में तथा किसानों के बीमा की राशि के भुगतान में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी हुई है. इसमें जिले के तीन को-ऑपरेटिव बैंक की शाखा जांच के घेरे में है. जांच निगरानी विभाग से कराने की अनुशंसा […]

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कार्रवाई. संयुक्त निबंधक ने निबंधक पटना को लिखा पत्र, एमडी की भूमिका संदिग्ध

कुछ वर्षों के दौरान ऋण वितरण में तथा किसानों के बीमा की राशि के भुगतान में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी हुई है. इसमें जिले के तीन को-ऑपरेटिव बैंक की शाखा जांच के घेरे में है. जांच निगरानी विभाग से कराने की अनुशंसा की है.
खगड़िया : जिले के तीन को-ऑपरेटिव बैंक की शाखा जांच के घेरे में आए हैं. यहां बीते कुछ वर्षों के दौरान ऋण वितरण में तथा किसानों के बीमा की राशि के भुगतान में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी हुई है. हालांकि बैंक के एक वरीय अधिकारी के कारण जांच तो पूरी नहीं हो पायी है. लेकिन अब इस बैंक में व्यापक भ्रष्टाचार की जांच निगरानी विभाग से कराने की अनुशंसा की गयी है. मिली जानकारी के अनुसार
भागलपुर सहयोग समिति के संयुक्त निबंधक ललन शर्मा ने निबंधक पटना से खगड़िया जिले के तीन को ऑपरेटिव बैंक की शाखा द्वारा केसीसी ऋण वितरण तथा किसानों को दिये फसल बीमा राशि के भुगतान की जांच निगरानी विभाग से कराने की अनुशंसा की है.
कहां हुई अनुशंसा
श्री शर्मा ने जिले के चौथम, अलौली सहित तीन को-ऑपरेटिव बैंक शाखा द्वारा केसीसी ऋण वितरण तथा बीमा भुगतान की जांच निगरानी विभाग से अथवा स्वयं जांच करने का अनुशंसा निबंधक सहयोग समिति पटना से किया है. सूत्र के अनुसार संयुक्त निबंधक ने निबंधक को भेजी रिपोर्ट में कहा है कि प्रथम दृश्ट्या यह पाया गया है कि तीनों को- ऑपरेटिव बैंक शाखा में वर्ष 2007 से 2015 के बीच केसीसी ऋण वितरण तथा बीमा में भारी घपला एव जालसाझी की
गयी है.
उन्होंने कहा है कि इतने महत्वपूर्ण मामले की अगर निगरानी विभाग अथवा वरीय अधिकारी से जांच कराकर दोषियो के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गयी तो इस मामले को दबाने के आरोप निदेशालय तथा सचिवालय के अधिकारियों पर भी लग सकते हैं.
एमडी रामाश्रय राम की भूमिका पर सवाल उठाते हुए संयुक्त सचिव ने इनके द्वारा जांच में सहयोग नहीं करने, जांच पदाधिकारियों को अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने सहित इनके कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए है. संयुक्त निबंधक ने राज्य स्तर पर भेजी रिपोर्ट में कहा है कि एमडी के हठधर्मिता के कारण ये जांच प्रभावित हुई है.
खास बातें
एमडी पर जांच प्रभावित करने का आरोप
को-ऑपरेटिव बैंक की तीन शाखा जांच के घेरे में
नहीं होने दी जांच
संयुक्त निबंधक द्वारा निबंधक को भेजी गई रिपोर्ट से इस बात का खुलासा हुआ है कि एमडी के असहयोगात्मक रबैये के कारण ही इन तीनों बैंकों में व्याप्त गड़बड़ी की जांच पूरी नहीं हो पायी है. इन्होंने अपने रिपोर्ट में कहा है कि चौथम बैंक की जांच करने वे स्वयं तीन बार खगड़िया आ चुके हैं. जबकि अलौली शाखा के विरुद्ध प्राप्त शिकायत की जांच करने वरीय सहकारिता प्रसार पदाधिकारी कुमारी क्रांती को खगड़िया भेजा गया था.लेकिन एमडी द्वारा अभिलेख नहीं सौंपे जाने के कारण केसीसी वितरण में हुयी अनियमितता की जांच नहीं हो पायी.
वहीं, फसल बीमा घोटाले व केसीसी वितरण में अनियमितता की जांच भी नहीं होने की बातें संयुक्त निबंधक ने अपने निरीक्षण प्रतिवेदन में कही है. इस मामले की जांच के लिए प्रमंडलीय आयुक्त तथा डीएम के स्तर से डीसीओ श्री राम को दिये गये थे. इधर, एमडी श्री राम ने एक बार फिर उनके उपर लगे आरोपों गलत व बेबुनियाद बताया है. कहा है कि गड़बड़ी के मामले में स्वयं कार्रवाई करते हैं.
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