पिछले दरवाजे से बंटे ऋण
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :16 Apr 2016 9:04 AM (IST)
विज्ञापन

नियम ताक पर . दो बिचौलियों ने निभायी थी अहम भूमिका छह वर्ष पूर्व सेन्ट्रल बैंक आॅफ इंडिया की खगड़िया शाखा में आधा तेरा और आधा मेरा की तर्ज कर करोड़ों के ऋण बांट दिये गये. सेंट्रल बैंक आॅफ इंडिया ने जिस तरह से किसान गोल्ड ऋण योजना का वितरण किया था उससे यहीं कहा […]
विज्ञापन
नियम ताक पर . दो बिचौलियों ने निभायी थी अहम भूमिका
छह वर्ष पूर्व सेन्ट्रल बैंक आॅफ इंडिया की खगड़िया शाखा में आधा तेरा और आधा मेरा की तर्ज कर करोड़ों के ऋण बांट दिये गये. सेंट्रल बैंक आॅफ इंडिया ने जिस तरह से किसान गोल्ड ऋण योजना का वितरण किया था उससे यहीं कहा जा सकता है कि बैंक ने ऋण नहीं बल्कि अनुदान का वितरण किया था. अधिकांश बैंकों में ऋण वितरण की जांच हो तो करोड़ों रुपये के फर्जी लोन का खुलासा होने के साथ-साथ कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं.
खगड़िया : छह वर्ष पूर्व सेन्ट्रल बैंक आॅफ इंडिया की खगड़िया शाखा में आधा तेरा और आधा मेरा की तर्ज कर करोड़ों के ऋण बांट दिये गये. ऋण वितरण में नियम कायदे को ताक पर रख कर पिछले दरवाजे से बड़े पैमाने पर खेल हुआ था. सेन्ट्रल बैंक आॅफ इंडिया ने जिस तरह से किसान गोल्ड ऋण योजना का वितरण किया था उससे यहीं कहा जा सकता है कि बैंक ने ऋण नहीं बल्कि अनुदान का वितरण किया था. क्योंकि ऋण वितरण के लिए निर्धारित सभी मापदंड को पीछे छोड़ बैंक ने सिर्फ कमीशन को आधार बनाया था. आधा तेरा आधा मेरा के तर्ज पर बैंक ने करोड़ों रुपये का वितरण इस तरह किया था जैसे कि अनुदान बांटा जा रहा हो. इस योजना की स्वीकृति ऐसे लोगों को दी गयी थी जो ऋण लेने के योग्य ही नहीं थे.
बैंक प्रबंधन ने यह नहीं सोचा कि कैसे इन लोगों से ऋण की राशि की वसूली की जाएगी. बात भी यही सामने आ रही है. सूत्र बताते हैं कि अधिकांश बैंकों में ऋण वितरण की जांच हो तो करोड़ों रुपये के फर्जी लोन का खुलासा होने के साथ-साथ कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं. लेकिन किसे फुरसत है… कमीशन के बल पर अधिकांश फर्जीवाड़े के मामले को दबा दिया जा रहा है.
82 ऋणधारक में से एक व्यक्ति ने लौटायी राशि : बताया जाता है कि 82 लोगों को लगभग छह वर्ष पूर्व उक्त शाखा द्वारा किसान गोल्ड ऋण की स्वीकृति दी गई थी तथा दो करोड़ से अधिक की राशि इन लोगों को दिये गये थे.
इन में से मात्र एक व्यक्ति ने ऋण की राशि जमा की है. वो भी जेल जाने तथा जमानत पाने के लिए न्यायालय के आदेश पर इसी माह एक कर्जदार ने ऋण जमा किया है .जबकि 81 लोगों ने अनुदान समझकर ऋण की राशि को जमा ही नहीं किया है. सूत्र के अनुसार काफी समय से जमा निकासी नहीं होने के कारण बैंक ने इन लोगों के खाते को डिफाल्टर सूची में डाल दिया है.
नाम किसी का… फोटो दूसरे की : आर्थिक अपराध इकाई के पुलिस निरीक्षक ने अपने जांच रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया है कि एक ऋणी लक्ष्मण यादव के नाम भी दूसरे व्यक्ति ने अपना फोटो चिपकाकर ऋण प्राप्त किया है. ऋण प्राप्त करने वाले कई लोग भूमिहीन थे.
इसके बावजूद इन्हें फर्जी कागजात तथा बैंक प्र्रबंधन की मेहरबानी की वजह से लाखों रुपये ऋण दिये गये. अगर किसी व्यक्ति के पारस अपना जमीन नहीं था तो उन्होंने अपनी जमीन नहीं बल्कि दूसरे की जमीन को मोरगेज कर बैंक से ऋण प्राप्त किया. यानि इनकी भी मंशा साफ थी. कमीशन के आधार पर ऋण लेना है फिर इसे वापस नहीं करना है अगर बैंक बाद में दावा भी करता है तो फर्जी जमीन की ही नीलामी संभव नहीं हो पायेगा.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




