प्रतिक्रिया. गरीबों पर मेहरबान, अमीरों को मार रहा आम बजट

Published at :01 Mar 2016 5:38 AM (IST)
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प्रतिक्रिया.  गरीबों पर मेहरबान, अमीरों को मार रहा आम बजट

किसी ने सराहा, तो कोई नाखुश आम बजट को लेकर देश की जनता को बहुत उम्मीदें थी पर सरकार ने सभी को ख्याल रखते हुए बजट पेश की. वहीं बजट में गरीब तबके के लोगों पर सरकार ने ज्यादा ध्यान दिया गया है वहीं पहली बार मकान खरीदने पर टैक्स में छुट दिया गया है. […]

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किसी ने सराहा, तो कोई नाखुश

आम बजट को लेकर देश की जनता को बहुत उम्मीदें थी पर सरकार ने सभी को ख्याल रखते हुए बजट पेश की. वहीं बजट में गरीब तबके के लोगों पर सरकार ने ज्यादा ध्यान दिया गया है वहीं पहली बार मकान खरीदने पर टैक्स में छुट दिया गया है.
खगड़िया : केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को आम बजट पेश किया. जिसमें किसानों की आय पांच साल में दोगुनी फसल बीमा योजना, सिंचाई परियोजना, उच्च शिक्षा पर जोर, जल संसाधनों का सदुपयोग, कचरे से बनेगा जैबिक खाद, दालों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर, 14 वें वित्त आयोग में 58 प्रतिशत हिस्सा, मनरेगा पर बड़ा पैकेज, सर्व शिक्षा अभियान के लिए बड़ा आवंटन, ग्राम पंचायत पर विशेष जोड़, बीपीएल परिवार को रसोई कनेक्शन में रियायती, सभी जिलों के अस्पताल में डायलिसिस की व्यवस्था, मई 2018 तक सभी गांव में बिजली की व्यवस्था आदि कई महत्वपूर्ण बातें हैं.
इस बजट में व्यवसायी नीरज गुप्ता, विजय यादव, नवीन पटेल, चंदन सिंह आदि ने बताया कि बजट में गरीब तबके के लोगों पर ज्यादा ध्यान दिया गया है. पहली बार मकान खरीदने पर टैक्स में छुट. पांच लाख के आमदनी वालों को फायदा, डाक घरों में एटीएम की सुविधाएं, गांव के लिए डिजिटल साक्षरता मिशन, सभी तरह की गाड़ियां महंगी, सिगरेट, सिगार, सोने एवं हीरे की गहने महंगी हुई हैं. रेडिमेड कपड़े मंहगी होने से युवा पीढ़ी नाखूश हैं. गृहणी गौरी देवी, रूपा राय, पूनम देवी, पूजा देवी आदि ने बताया कि बजट में महिलाओं को ख्याल रखा गया है. महिलाओं के किचन पर कोई बोझ नहीं दिया गया.
हालांकि सिंगार की सामग्री के मुल्यो में वृद्धि से महिलाएं कुछ नाखूश जरूर हैं. बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बिशौनी निवासी विद्यापति झा , मुकेश मिश्र ने कहा कि जेटली का आम बजट संतुलित हैं. बजट गांव, किसान एवं गरीब पर आधारित हैं. मनरेगा योजना के लिए सबसे बड़ा बजट हैं. किसानों को ज्यादा लाभ मिलेगा. कृषि के लिये 35,984 करोड़ आवंटित किया गया है. वहीं मधु पटवा, कमल किशोर, सांतनु कुमार, सोनू, विक्की, शिव कुमार, आशीष, नवीन तुलस्यान आदि ने कहा कि बजट में गांव को खास प्राथमिकता दिया गया है. गरीबों पर मेहरबान अमीरों के ऊपर भार बजट रहा.
मीडिल क्लास वाले को इस बजट से उतना फायदा नहीं दिख रहा है.जबकि जदयू के जिला प्रवक्ता अरविंद ने कहा कि निश्चित रूप से इस बजट में इस तरह का मैकेनिक दिखना चाहिए कि किस तरह से पीछड़े राज्यों को लेकर आगे बढ़ा जायेगा. लेकिन ऐसा कुछ नहीं दिखा. केंद्र में बैठी सरकार ने बिहार की उपेक्षा करने की मानों ठान ली है. विशेष राज्य के दर्जा के नाम पर बिहार के लोगों को ठगा है. वहीं पसराहा निवासी दिलीप ने मिली जुली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बजट संतुलित है.
जबकि युवा व्यवसायी शिवा तुलस्यान ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि छोटे व्यवसायियों को बजट से निराशा हुई है. महंगाई बढ़ेगी. सभी चीजों पर टैक्स लगाया गया है. इनकम टैक्स में छूट की सीमा बढ़ाना चाहिए. उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर बजट संतोष जनक नहीं है.
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