बैंक से पैसे भेजने में छूट रहा है पसीना

Published at :29 Nov 2015 9:53 PM (IST)
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बैंक से पैसे भेजने में छूट रहा है पसीना

बैंक से पैसे भेजने में छूट रहा है पसीना आरबीआइ की प्रक्रिया लोगों को रास नहीं आ रही प्रतिनिधि, गोगरीघर से दूर दूसरे शहरों में किराये के कमरे, हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को कभी-कभी चंद पैसों की खातिर भी मोहताज होना पड़ता है. अभिभावकों द्वारा मोटी रकम न देकर पैसों को किस्त में भेजे […]

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बैंक से पैसे भेजने में छूट रहा है पसीना आरबीआइ की प्रक्रिया लोगों को रास नहीं आ रही प्रतिनिधि, गोगरीघर से दूर दूसरे शहरों में किराये के कमरे, हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को कभी-कभी चंद पैसों की खातिर भी मोहताज होना पड़ता है. अभिभावकों द्वारा मोटी रकम न देकर पैसों को किस्त में भेजे जाने की जटिल प्रक्रिया से अब हर शख्स परेशान है. पैसा कम हो या ज्यादा इसे भेजने के लिए जरूरी काम छोड़-छाड़ कर अभिभावक पहले तो बैंक में लंबी लाइन में लगते हैं. फिर लंबी प्रक्रियाओं के बाद पैसा ट्रांसफर हो पाता है. इसकी सत्यता जानने के लिए भी इन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है. कोई जरूरी नहीं की आरटीजीएस के पैसे तुरंत लाडले के खाते में चला ही जाये. आरबीआइ की ये प्रक्रिया लोगों को रास नहीं आ रही है. अन्य शहरों में रहने वाले छात्रों को अकस्मात अगर पैसों की जरूरत पड़ जाये, तो उन्हें कुछ घंटे अपने हाल पर ही जीना होगा. जरूरी नहीं कि जरूरत के हिसाब से उन्हें पैसा तुरंत मिल ही जाये. दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में तो दूसरे साथियों की मदद लेना इनकी मजबूरी है. यह स्थिति तब जटिल हो जाती है, जब अभिभावक और उनके लाडले का खाता एक बैनर के बैंक में नहीं होता है. इस बाबत एसबीआइ शाखा, जमालपुर गोगरी के शाखा प्रबंधक एसके रंजन ने बताया कि पैसा ट्रांसफर करने की प्रक्रिया है, जो आरबीआइ के रूल के अनुसार बैंकों को फॉलो करना होता है. अगर आपको एसबीआइ से एसबीआइ में पैसा ट्रांसफर करना है, तो पूरे भारत में पैसा ट्रांसफर करने में आपको कोई दिक्कत नहीं होगी. मगर जैसे ही लेन-देन करने वाले बैंकों का बैनर बदलता है, तो इसकी प्रक्रिया भी बदल जाती है. रकम छोटी हो या बड़ी दोनों स्थिति में आरटीजीएस के बगैर पैसा ट्रांसफर नहीं हो सकेगा. इस स्थिति में बैंक द्वारा निर्गत चेक से ही पैसा ट्रांसफर होता है. इसमें आइएफएस नंबर भी देना अनिवार्य है. उसमें पैसा भेजे जाने वाले बैंक का भी पूरा विवरण देना होता है. कहते हैं अभिभावक परेशानी झेल रहे कुछ अभिभावकों में से एक जमालपुर गोगरी निवासी राजकुमार झा ने बताया कि उनका बेटा दिल्ली में रहकर एमसीए की पढ़ाई कर रहा है. महीने में एक-दो बार पैसा भेजना ही पड़ता है. भिन्न बैंक में खाता होने के कारण आरटीजीएस की प्रक्रिया से गुजरने में घंटों वक्त बरबाद होता है. सरकार और आरबीआइ दोनों को हम ग्राहकों के प्रति थोड़ा संवेदनशील होने की जरूरत है. आरटीजीएस के बजाय और भी कोई सरल प्रक्रिया अपनायी जाये, जिससे अभिभावकों को पैसा भेजने में राहत मिल सके.

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