कालाजार से बचने का डीडीटी छिड़काव है उपाय

Published at :29 Jun 2015 9:38 AM (IST)
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कालाजार से बचने का डीडीटी छिड़काव है उपाय

खगड़िया: जिले में डीडीटी का छिड़काव 12 जून से किया जा रहा है. कालाजार एक जानलेवा बीमारी है, जो बालू मक्खी के काटने से फैलता है. डीडीटी के छिड़काव से ही बालू मक्खी के प्रभाव को पूर्णत: खत्म किया जा सकता है. इस बीमारी को जिले से खत्म करने को लेकर दो माह का डीडीटी […]

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खगड़िया: जिले में डीडीटी का छिड़काव 12 जून से किया जा रहा है. कालाजार एक जानलेवा बीमारी है, जो बालू मक्खी के काटने से फैलता है. डीडीटी के छिड़काव से ही बालू मक्खी के प्रभाव को पूर्णत: खत्म किया जा सकता है. इस बीमारी को जिले से खत्म करने को लेकर दो माह का डीडीटी छिड़काव कार्यक्रम जिले के प्रत्येक प्रखंड के प्रभावित गांवों में किया जा रहा है.

केयर के डीपीओ राकेश कुमार ने बताया कि कालाजार का उन्मूलन तभी संभव हो सकेगा, जब जिले में बालू मक्खी को समाप्त किया जाये. जिस गांव, टोले में एक भी बालू मक्खी रह जायेगी, उस क्षेत्र में कालाजार समाप्त नहीं होगा. बालू मक्खी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आ कर पुन: दूसरे व्यक्ति को भी इस रोग का शिकार बना सकती है. इसलिए अपने-अपने घरों में डीडीटी का छिड़काव दीवार पर छह फिट तक कराएं. उन्होंने बताया कि सभी के सहयोग से ही कालाजार का उन्मूलन किया जा सकता है.

कितने हैं जिले में मरीज: जिले में कालाजार के सर्वाधिक मरीज बेलदौर में पाये गये है. हालांकि अलौली तथा खगड़िया प्रखंड में भी मरीज पाये गये है. डीपीओ ने बताया कि जिले में 65 लोग कालाजार से पीड़ित है. इनमें से 11 मरीजों का इलाज जिले के अस्पतालों में चल रहा है. शेष मरीजों का इलाज किया जा चुका है. बेलदौर में 34, अलौली में 14, खगड़िया में 13, चौथम में नौ, गोगरी में चार, मानसी में दो मरीज कालाजार से पीड़ित मिले हैं. जबकि परबत्ता और खगड़िया शहर में एक ही पीड़ित नहीं मिले है.
एक सूई से इलाज संभव: कालाजार से पीड़ित मरीज को अब 28 दिन तक इलाज नहीं कराना पड़ेगा. तीन घंटे में मरीज का इलाज किया जा सकता है. डीपीओ ने बताया कि कालाजार मरीज के लिए एक नई सूई एंबीजोन दी जा रही है. मात्र एक सूई से इलाज संभव है. सदर अस्पताल में एंबी जोन उपलब्ध है.
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