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आर्थिक गड़बड़ी मामले में अलौली पीएचसी के बर्खास्त लेखापाल बैकडोर से फिर हुए बहाल

Updated at : 26 Jul 2019 6:55 AM (IST)
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आर्थिक गड़बड़ी मामले में अलौली पीएचसी के बर्खास्त लेखापाल बैकडोर से फिर हुए बहाल

बर्खास्तगी के एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद अचानक बर्खास्त लेखापाल की फिर से बहाली सवालों के घेरे में रिक्त हो गये लेखापाल के पद पर फ्रेश बहाली की बजाय बर्खास्त लेखापाल को फिर से बहाली में मोटी रकम के लेन-देन की चर्चा जोरों पर 4 अक्टूबर 2016 तत्कालीन अलौली पीएचसी प्रभारी ने […]

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  • बर्खास्तगी के एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद अचानक बर्खास्त लेखापाल की फिर से बहाली सवालों के घेरे में
  • रिक्त हो गये लेखापाल के पद पर फ्रेश बहाली की बजाय बर्खास्त लेखापाल को फिर से बहाली में मोटी रकम के लेन-देन की चर्चा जोरों पर
  • 4 अक्टूबर 2016 तत्कालीन अलौली पीएचसी प्रभारी ने सीएस को पत्र भेज कर पूर्व लेखापाल की गड़बड़ी का किया था खुलासा
  • एनआरएचएम व एनएचएम के रोकड़बही संधारण अभिश्रवों सहित अन्य अभिलेखों में बड़े पैमाने पर अनियमितता की टीम गठित करने जांच की अनुशंसा फाइलों में दफन
खगड़िया : तत्कालीन डीएम जय सिंह द्वारा बर्खास्त अलौली पीएचसी के लेखापाल सह बीएचएम चेतन शर्मा को फिर से बहाल कर दिया गया है. नियमत: बर्खास्तगी के बाद रिक्त हो गये लेखापाल के पद पर फ्रेश बहाली होना चाहिये लेकिन यहां बैकडोर से बर्खास्त लेखापाल को फिर से बहाल कर लिया गया. जबकि वर्ष 2016 में तत्कालीन पीएचसी प्रभारी ने सिविल सर्जन को पत्र भेज कर पूर्व बीएचएम सह लेखापाल चेतन शर्मा के कार्यकाल में एनआरएचएम/ एनएचएम में बड़े पैमाने पर अनियमितता की ओर इशारा करते हुए टीम गठित कर गहन जांच की अनुशंसा की थी.
जांच की अनुशंसा फाइलों में दफन कर दिया गया. फिर से बहाली में नियम कायदे का पालन नहीं होने के सवाल पर डीएम अनिरुद्ध कुमार ने कहा कि कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हुई है.
फिर से बहाली की जुगाड़ में लगा था बर्खास्त लेखापाल : स्वास्थ्य विभाग की नियमावली के अनुसार कॉन्ट्रैक्ट पर बहाल कर्मी का अगर 11 महीने तक सेवा विस्तार नहीं होता है तो वह पद रिक्त माना जायेगा. बताया जाता है कि तत्कालीन डीएम जय सिंह द्वारा बर्खास्त होने के बाद से पैरवी-पहुंच के दम पर चेतन शर्मा फिर से बहाल होने का तिकड़म करता रहा लेकिन उसकी दाल नहीं गली.
डीएम जय सिंह का तबादला हो गया तो फिर से श्री शर्मा ने जोर लगाया. बताया जाता है कि शहर के एक प्रिटिंग प्रेस वाले ने भी बर्खास्त लेखापाल चेतन शर्मा की फिर से बहाली के लिये एड़ी-चोटी का जोर लगाया लेकिन पूर्व डीएम जय सिंह के सामने सारा तिकड़म फेल कर गया.
इसके बाद डीएम जय सिंह का तबादला हो गया. इसी बीच मौका पाकर बैकडोर से बहाली के लिये परदे के पीछे खेल शुरु हुआ. ताकि किसी को कानोंकान भनक तक नहीं लगे. कहा जाता है कि पूरे खेल में जिला स्वास्थ्य समिति के कई बाबू की भूमिका सवालों के घेरे में है. डीएचएस खगड़िया के अधिकारी इस प्रकरण में कुछ भी बोलने से कन्नी काट रहे हैं.
फ्रेश बहाली की जगह बैकडोर से हुआ खेल
विभागीय जानकार की मानें तो किसी भी अनुबंध के आधार पर बहाल पद पर बर्खास्तगी के 11 महीने के अंदर पुर्नविचार नहीं होता है तो वह पद रिक्त माना जायेगा. फिर से बहाली के लिये सारी प्रक्रिया पूरी किया जाना अनिवार्य है.
बर्खास्त लेखापाल चेतन शर्मा की फिर से बहाली में विभागीय नियम कायदे को ताक पर रख दिया गया. मिली जानकारी अनुसार बर्खास्तगी के बाद 30 दिनों के अंदर हटाये गये लेखापाल ने राज्य स्वास्थ्य समिति में अपील भी नहीं की. आर्थिक गड़बड़ी के घेरे में आये बर्खास्त लेखापाल की फिर से बहाली में जल्दबाजी के पीछे तरह तरह की चर्चा जोर पकड़ रही है. पूरे खेल में मोटी रकम के लेन-देन से इंकार नहीं किया जा सकता है.
प्रोत्साहन राशि की हुई थी हेराफेरी
अलौली में चेतन शर्मा के बीएचएम सह प्रखंड लेखपाल रहते तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. रासबिहारी सिंह ने निरीक्षण के दौरान एपीएचसी हरिपुर सहित पीएचसी में फर्जी बंध्याकरण व फर्जी प्रसव के आधार पर प्रोत्साहन राशि की हेराफेरी का मामला पकड़ा था.
बीएचएम श्री शर्मा की मिलीभगत से सरकारी राशि के बंदरबांट की आशंका को देखते हुए अलौली में बीते 3 वर्ष के दौरान प्रसव व बंध्याकरण ऑपरेशन के जांच के आदेश दिए गए लेकिन बाद में नजराना के दम पर जांच के आदेश फाइलों में बंद कर दिया गया.
अगर जांच होती तो लाखों की रकम के बंदरबांट का खुलासा हो सकता था. इतना ही नहीं बाद में बर्खास्त बीएचएम चेतन शर्मा के द्वारा बिचौलिए को कार्यालय में कुर्सी टेबल देकर सरकारी काम लेने सहित अवैध वसूली का भी खुलासा हुआ था .
मेरे उपर लगाये गये सारे आरोप बेबुनियाद हैं. अलौली पीएचसी में कार्यकाल के दौरान सरकारी राशि की कोई अनियमितता नहीं हुई है. यह सच है कि तत्कालीन डीएम जय सिंह द्वारा मेरी बर्खास्तगी के एक वर्ष से अधिक समय बीत गये हैं.
चेतन शर्मा, बर्खास्त लेखापाल.
अलौली पीएचसी के बर्खास्त लेखापाल को फिर से बहाल कर लिया गया है. फिर से बहाली में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है.
डॉ दिनेश कुमार निर्मल, सिविल सर्जन.
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