रंगभरी एकादशी 17 को, शिव को चढ़ाएं रंग-गुलाल, मिलेगी समृद्धि

Updated at : 16 Mar 2019 8:00 AM (IST)
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रंगभरी एकादशी 17 को, शिव को चढ़ाएं रंग-गुलाल, मिलेगी समृद्धि

खगड़िया/गोगरी : फाल्गुन शुक्ल महीने की एकादशी को रंगभरी एकादशी कहा जाता है. इस बार यह एकादशी 17 मार्च को है. इस दिन महादेव को रंग-गुलाल, अबीर, भांग, धतूरा, मंदार पुष्प, विल्लवपत्र चढ़ाने की परंपरा है. इससे जीवन में उत्साह व समृद्धि मिलती है. आपसी कटुता मिटती है. पूरे वर्ष महादेव की कृपा बनी रहती […]

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खगड़िया/गोगरी : फाल्गुन शुक्ल महीने की एकादशी को रंगभरी एकादशी कहा जाता है. इस बार यह एकादशी 17 मार्च को है. इस दिन महादेव को रंग-गुलाल, अबीर, भांग, धतूरा, मंदार पुष्प, विल्लवपत्र चढ़ाने की परंपरा है.

इससे जीवन में उत्साह व समृद्धि मिलती है. आपसी कटुता मिटती है. पूरे वर्ष महादेव की कृपा बनी रहती है. गोगरी के भोजुआ निवासी ज्योतिषाचार्य पंडित सुभम कुमार सवर्ण ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इसी दिन काशी में होली पर्व का शुभारंभ माना जाता है.
रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव माता पार्वती से विवाह के बाद पहली बार काशी पहुंचे थे. इस पर्व में शिवजी के भक्त रंग, अबीर व गुलाल उड़ाते, खुशियां मानते चलते हैं. देवाधिदेव बाबा विश्वनाथ को दूल्हे के रूप में सजाया जाता है और उन्हें मां गौरा के गौने पर लाया जाता है.
20 को होलिकादहन व 21 को होली : शास्त्रीय मान्यता है कि होलिकाष्टक के दौरान किये जानेवाले शुभ कार्यों का उचित फल नहीं मिलता. इस मान्यता के चलते नामकरण संस्कार, जनेऊ संस्कार, गृह प्रवेश, विवाह संस्कार आदि नहीं किये जा सकेंगे. इस बार होलिकाष्टक 14 मार्च से शुरू होकर 20 मार्च होलिका दहन तक रहेगा. 21 मार्च को होली मनाई जायेगी.
खगड़िया/गोगरी : फाल्गुन शुक्ल महीने की एकादशी को रंगभरी एकादशी कहा जाता है. इस बार यह एकादशी 17 मार्च को है. इस दिन महादेव को रंग-गुलाल, अबीर, भांग, धतूरा, मंदार पुष्प, विल्लवपत्र चढ़ाने की परंपरा है.
इससे जीवन में उत्साह व समृद्धि मिलती है. आपसी कटुता मिटती है. पूरे वर्ष महादेव की कृपा बनी रहती है. गोगरी के भोजुआ निवासी ज्योतिषाचार्य पंडित सुभम कुमार सवर्ण ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इसी दिन काशी में होली पर्व का शुभारंभ माना जाता है.
रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव माता पार्वती से विवाह के बाद पहली बार काशी पहुंचे थे. इस पर्व में शिवजी के भक्त रंग, अबीर व गुलाल उड़ाते, खुशियां मानते चलते हैं. देवाधिदेव बाबा विश्वनाथ को दूल्हे के रूप में सजाया जाता है और उन्हें मां गौरा के गौने पर लाया जाता है.
20 को होलिकादहन व 21 को होली : शास्त्रीय मान्यता है कि होलिकाष्टक के दौरान किये जानेवाले शुभ कार्यों का उचित फल नहीं मिलता. इस मान्यता के चलते नामकरण संस्कार, जनेऊ संस्कार, गृह प्रवेश, विवाह संस्कार आदि नहीं किये जा सकेंगे. इस बार होलिकाष्टक 14 मार्च से शुरू होकर 20 मार्च होलिका दहन तक रहेगा. 21 मार्च को होली मनाई जायेगी.
रंगभरी एकादशी को कैसे करें पूजा
आंवला वृक्षों में श्रेष्ठ कहा गया है, इसका हर भाग इंसान को लाभ पहुंचाता है और इसी वजह से ये भगवान विष्णु को प्रिय है.इस दिन भगवान शंकर का ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप भी विशेष रूप से फलदायी माना गया है.इस दिन भोले की पूजा हर दुखों को हर लेती है और सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं.
आम की फसल पर मंडराया संकट, झड़ रहे हैं मंजर
किशनगंज. जिले का सुरजापुरी आम सहित आधा दर्जन आम की ऐसी क्वालिटी हैं, जो काफी प्रसिद्ध हैं. लेकिन, इस सीजन में इसकी गुणवत्ता पर ग्रहण लग गया है. मधुआ कीटों के प्रकोप से पेड़ों में लगे मंजर गिर रहे हैं.
किसान परेशान हैं. जलवायु परिवर्तन की मार का न केवल परंपरागत फसलें बल्कि फलों के उत्पादन पर भी दुष्प्रभाव पड़ा है. हालत यह हो गयी कि इस बार आम में समय से पहले ही मंजर आ गया था. यह खतरे की घंटी थी. ठंड के मौसम में मंजर नहीं लगता.
विगत एक माह में गर्मी में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव का असर आम पर पड़ा. इसके कारण मंजर पर मधुआ रोग लग गया. कीट मंजर को चाट रहे हैं. इससे टिकोला ही नहीं तैयार हो रहा. जबकि, समय पूर्व मंजर आने पर अब आम का टिकोला पूरी तरह तैयार हो जाना चाहिए था.
इस बार बारिश कम होने से जमीन में नमी की कमी हो गयी है. लिहाजा गर्मी और बढ़ने से आम की जड़ों को नमी देना जरूरी है. इसके लिए हल्की सिंचाई होनी चाहिए. प्रगतिशील किसानों का कहना है कि हम लोग लगातार मौसम की मार झेल रहे हैं.
इस बार आम की फसल काफी अच्छी होने की संभावना थी. लेकिन, मौजूदा स्थिति परेशानी बनी है. ऐसी स्थिति में आम की अच्छी पैदावार पर खतरा है.
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