बिना पढ़ाये बन रही हाजिरी
Updated at : 27 Jul 2017 5:46 AM (IST)
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खुलासा. मनमाफिक स्कूलों में प्रतिनियुक्ति के लिए लग रही बोली खगड़िया में भ्रष्टाचार के फेर में फंस कर सरकारी शिक्षा प्रणाली सिसक रही है. शिक्षकों के प्रोन्नति, प्रतिनियुक्ति व तबादला के चल रहे खेल से सरकारी स्कूलों की व्यवस्था सुधरने की बजाय दिन ब दिन बिगड़ती ही जा रही है. खगड़िया : प्राथमिक विद्यालय पश्चिमी […]
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खुलासा. मनमाफिक स्कूलों में प्रतिनियुक्ति के लिए लग रही बोली
खगड़िया में भ्रष्टाचार के फेर में फंस कर सरकारी शिक्षा प्रणाली सिसक रही है. शिक्षकों के प्रोन्नति, प्रतिनियुक्ति व तबादला के चल रहे खेल से सरकारी स्कूलों की व्यवस्था सुधरने की बजाय दिन ब दिन बिगड़ती ही जा रही है.
खगड़िया : प्राथमिक विद्यालय पश्चिमी कैंजरी (बेलदौर) की शिक्षिका हेमलता के बदले उनके पति धर्मेन्द्र कुमार कभी-कभी स्कूल में आकर क्लास ले रहे हैं. 342 बच्चों वाले इस स्कूल में बाकी दिनों में शिक्षिका हेमलता देवी घर पर बैठकर वेतन पा लेती है. लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों की जांच में अब तक यह मामला पकड़ में नहीं आया. शिक्षा विभाग में ऐसे ही गड़बड़ी के मामलों की लिस्ट बहुत लंबी है. बताया जाता है कि शिक्षिका हेमलता के पति धर्मेंद्र स्वयं मुंगेर जिला के टीकारामपुर दियारा अपग्रेडेड हाई स्कूल में शिक्षक हैं. इधर, सरकारी स्कूलों की दुर्दशा सुधारने की कवायद पर भ्रष्टाचार हावी रहने से स्थिति दिन ब दिन बिगड़ती ही जा रही है.
कोई दिल्ली में रहकर खगड़िया के स्कूल में क्लास भी ले रहा है और मजे से वेतन भी पा रहा है. दियारा के अधिकांश स्कूलों का ताला कभी-कभार ही खुल रहा है. दूर-दराज की छोड़िये, शहरी इलाके में भी कई ऐसे विद्यालय हैं जहां पर तैनात शिक्षक स्थानीय अधिकारियों को मैनेज कर घर बैठे वेतन पा रहे हैं. अभी कुछ दिन पहले महेशखूंट में शिक्षकों से प्रोन्नति दिलवाने के एवज में दस-दस हजार की वसूली की चर्चा जोरों पर हुई थी. इसी तरह हाल के दिनों में अलौली में 147 शिक्षकों को प्रोन्नति देने में भी परदे के पीछे से बड़े पैमाने पर वसूली की चर्चा है.
एक शिक्षक को एक दर्जन स्कूलों का प्रभार
अलौली के एक प्रधानाध्यापक को एक दर्जन स्कूलों का प्रभार दे दिया गया है. सूत्रों की मानें तो इस प्रधानाध्यापक का शिक्षा विभाग के एक उच्चाधिकारी के साथ उठना-बैठना है. जिसका फायदा उठा कर इस प्रधानाध्यापक को मनमाफिक विद्यालयों का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है. जबकि यह प्रधानाध्यापक स्कूल जाने की बजाय पूरा दिन शिक्षा विभाग के कार्यालयों के चक्कर काटते रहते हैं. अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोई शिक्षक एक दर्जन स्कूलों की देखरेख ठीक ढंग से कर सकता है? कहा जाता है कि शिक्षा विभाग में परदे के पीछे खिचड़ी पकाये जाने के खेल से स्थिति दिन ब दिन बिगड़ती जा रही है. चाहे शिक्षकों का प्रतिनियोजन हो या फिर मनमाफिक स्कूलों में तबादला या शिक्षकों की प्रोन्नति का मामला हो, अधिकांश मामले में शिक्षा विभाग के फैसले विवादों के घिरे रहते हैं. मामला पकड़ में आया तो ठीक है वरना शिक्षकों की मनमर्जी चलती रहती है.
सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिये पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य हो रहा है. कमी को देखते हुए विभिन्न स्कूलों में शिक्षकों के प्रतिनियोजन में किसी प्रकार की धांधली नहीं हुई है. मध्याह्न भोजन, पोशाक योजना, परिभ्रमण योजना आदि में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर जांच कर तुरंत कार्रवाई की जाती है. हाल के दिनों में दर्जनों शिक्षकों पर निलंबन सहित अन्य कार्रवाई की गयी है. शिक्षा विभाग में किसी भी काम के लिये नाजायज राशि की मांग की जाती है तो शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जायेगी.
सुरेश साहु, डीइओ.
अलौली, बेलदौर, चौथम सहित जिले के दियारा इलाके में संचालित अधिकांश सरकारी स्कूलों का ताला महीना दो महीना पर खुलता है. बीते दिनों चौथम बीईओ के निरीक्षण के दौरान दियारा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय पूर्वी टोला बंगलिया, प्राथमिक विद्यालय लाह बासा बंगलिया एवं प्राथमिक विद्यालय खड्डा मुशहरी विद्यालय में ताला लटका पाया गया. स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि यहां शिक्षकों की मनमानी चरम पर है. मन हुआ तो विद्यालय खुला नहीं ताला लटकता रहता है.
कई विद्यालय तो महीने में एक-दो दिन खुलते हैं. इसी तरह अलौली के विद्यालयों की जांच में भी इस तरह का मामला सामने आ चुका है. करीब पांच दिन पहले मानसी प्रखंड मुख्यालय के विद्यालय के निरीक्षण के दौरान आठ शिक्षक गायब पाये गये थे. बताया जाता है कि दियारा में स्कूलों का निरीक्षण नहीं होने से शिक्षकों की मनमानी जोरों पर है.
जिस दिन अधिकारियों के बच्चे सरकारी स्कूल में पढने लगेंगे, उस दिन से सरकारी स्कूलों की दुर्दशा में सुधार होना शुरु हो जायेगा. शिक्षा विभाग में स्थिति यह है कि जीविका दीदी की जांच में जिस स्कूल में कई गड़बड़ी सामने आती है उसी स्कूल में पहुंचने पर अधिकारी को सब कुछ ठीक नजर आता है. जब तक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की प्रोन्नति, प्रतिनियुक्त व तबादला की दुकान चलती रहेगी तब तक सरकारी स्कूलों में सुधार की उम्मीद नहीं की जा सकती है.
दीपक कुमार अकेला, आरटीआई कार्यकर्ता.
मध्याह्न भोजन योजना बना कमाई का जरिया
सरकारी स्कूलों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना प्रधानाध्यापक व शिक्षा विभाग के कई अधिकारियों के कमाई का जरिया बन गया है. छात्रों की वास्तविक उपस्थिति से दो से तीन गुना ज्यादा फर्जी उपस्थिति के आधार पर मध्याह्न भोजन योजना की राशि का गोलमाल किया जाता है. जिस स्कूल में अधिकारी जांच के लिये पहुंचते हैं वहां कोई गड़बड़ी मिले या नहीं लेकिन मध्याह्न भोजन योजना में गोलमाल जरुर सामने आ जाता है.
बता दें कि कई स्कूलों के प्रधानाध्यापक एमडीएम के चावल चोरी के आरोप में जेल की हवा तक खा चुके. दूर-दराज के विद्यालयों की छोड़िये, शहर से सटे मध्य विद्यालय सन्हौली में मध्याह्न भोजन योजना में बड़े पैमाने पर गोलमाल का खुलासा उस वक्त हुआ जब मामला लोक शिकायत निवारण कार्यालय पहुंचा. ऐसे में सवाल उठता है क्या शिक्षा विभाग के अधिकारियों को मध्य विद्यालय सन्हौली में मध्याह्न भोजन में गोलमाल की जानकारी नहीं थी या फिर जानबुझ कर अनजान बने हुए थे. बताया जाता है कि शायद ही कोई ऐसा विद्यालय हो जहां गुणवत्ता युक्त व मेनू के अनुसार छात्रों को मध्याह्न भोजन दिया जाता है.
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