रेणु की कृतियों-रचनाओं को लोगों तक पहुंचाने का लिया संकल्प
Published by :Prabhat Khabar News Desk
Published at :04 Mar 2025 6:36 PM (IST)
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शहर के चैंबर ऑफ कॉमर्स के सभागार में मंगलवार को अनूप चेतना मंच कटिहार की ओर से अमर कथाशिल्पी फणीश्वरनाथ रेणु जयंती समारोह आयोजित की गयी.
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जयंती पर याद किये गये अमर कथाशिल्पी फणीश्वरनाथ रेणु
कटिहार. शहर के चैंबर ऑफ कॉमर्स के सभागार में मंगलवार को अनूप चेतना मंच कटिहार की ओर से अमर कथाशिल्पी फणीश्वरनाथ रेणु जयंती समारोह आयोजित की गयी. कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने रेणु जी के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मंच के किशोर कुमार मंडल ने रेणु जी के जीवन को सरल शब्दों में बताया. उन्होंने कहा कि रेणु आज हिंदी ही नहीं विश्व की तमाम भाषाओं में पढ़े- पढ़ाये जा रहे है. मंच के सचिव डॉ आशीष आनंद ने कहा कि रेणु ने कथनी और करनी के हर अंतर को न केवल मिटाया, बल्कि अपनी प्रतिबद्धता को जनपक्षीयता से जोड़कर निर्भीकता का भी परिचय दिया है. आपातकाल के विरोध में पद्मश्री लौटाना इसी निर्भीकता और जनपक्षधरता की बेबाक बानगी है. रेणु हिंदी के एकमात्र ऐसे लेखक है. जिन्होंने पड़ोसी देश नेपाल के मुक्ति संघर्ष में कलम और बंदूक दोनों के जरिये अपना योगदान दिया. पर्यावरणविद डॉ तारानंद तारक ने कहा कि रेणु की रचनाएं हमारे समाज की धड़कन है. इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीएस कॉलेज के प्राध्यापक डॉ अनवर इरज ने कहा कि रेणु आज न केवल प्रासंगिक है. बल्कि उनका हर शब्द हमारे जीवन का पाथेय है. कार्यक्रम के मुख्य वक्ता व केबी झा कॉलेज हिंदी विभाग के डॉ जितेश कुमार ने रेणु को लोक का अमर नायक बताया. उन्होंने कहा कि रेणु के बिना पूर्णिया का आख्यान अधूरा है. कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सुनील कुमार यादव ने कहा कि रेणु जी कृतियों को जन जन तक पहुंचाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि रेणु जी की कृतियों को संरक्षित करने व उनकी प्रसिद्धि के लिए जो भी निर्णय लिया जायेगा. जिला कांग्रेस उसके साथ रहेगी. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिलीप विश्वास ने कहा कि आज कल युवा पीढ़ी मोबाइल पर ज्यादा समय देते है. ऐसे युवा पीढ़ी को रेणु के कृतियों से रूबरू कराने की जरूरत है. कार्यक्रम में यह निर्णय लिया गया कि पूर्णिया विश्वविद्यालय का नामकरण अनूप-रेणु के नाम से किया जाय. वक्ताओं ने कहा कि रेणु आंचलिक उपन्यासकार के रूप में विश्व प्रसिद्ध है. इन्हें बिहार का प्रेमचंद कहा जाता है. इनके द्वारा दर्जनों उपन्यास एवं लगभग चालीस कहानियां लिखी गयी है. इनके द्वारा रचित कितने चौराहे उपन्यास पटना विश्वविद्यालय में कई सत्रों में पढ़ाई जाती रही है. परती-परिकथा उपन्यास रसियन भाषा में अनुवादित है, जो रूस के विश्वविद्यालयों में अभी भी पढ़ाई जाती है. कार्यक्रम में रेणु के करीबी व कांग्रेस नेता दिलीप विश्वास, राजद नेता सुदामा सिंह, सर्वोदय समाज के संस्थापक अशोक कुमार, अधिवक्ता बिनोद कुमार, इप्टा के अध्यक्ष मनोज कुमार, असीम कुमार भौमिक, बासु लाल, संजय कुमार आदि ने विचार प्रकट किया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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