माह अलविदा की नमाज़ इंसानियत व भाईचारे का दे गया पैग़ाम

Updated at : 20 Mar 2026 7:24 PM (IST)
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माह अलविदा की नमाज़ इंसानियत व भाईचारे का दे गया पैग़ाम

माह अलविदा की नमाज़ इंसानियत व भाईचारे का दे गया पैग़ाम

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कोढ़ा कोढ़ा प्रखंड में माहे रमज़ानुल मुबारक अपने आख़िरी पड़ाव पर पहुंचते ही जुमातुल विदा की नमाज़ अकीदत, ख़ुलूस और एहतराम के साथ अदा की गई. मूसापुर, बाहरखाल, उत्तरी सिमरिया, दक्षिणी सिमरिया, बिशनपुर, मखदूमपुर और पवई समेत मुख़्तलिफ़ इलाक़ों की मस्जिदों में सुबह से ही रोज़ेदारों और नमाज़ियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. दस बजे के बाद से ही मस्जिदें नमाज़ियों से खचाखच भर गईं और लोगों ने बड़े अदब-ओ-एहतराम के साथ जुम्मे की नमाज़ अदा की. गेड़ाबाड़ी बाज़ार स्थित मस्जिद के इमाम, मौलाना मोहम्मद बिलाल ने अपने खुत्बे में रमज़ान की फ़ज़ीलत, सब्र, तक़वा और इंसानियत का पैग़ाम देते हुए कहा कि यह महीना रहमत, मग़फ़िरत और निजात का महीना है. नमाज़ियों से अपील की कि रमज़ान के बाद भी नेकियों का सिलसिला जारी रखें और समाज में भाईचारे और अमन-ओ-अमान को क़ायम रखें. रमज़ान का यह आख़िरी जुम्मा, जिसे “माही अलविदा” कहा जाता है, हर मुसलमान के लिए जज़्बाती लम्हा होता है. एक तरफ़ इस मुक़द्दस महीने के रुख़्सत होने का ग़म, तो दूसरी तरफ़ ईद-उल-फ़ितर की आमद की ख़ुशी. दोनों जज़्बात नमाज़ियों के चेहरों पर साफ़ झलकते रहे. मस्जिदों में मुल्क में अमन, तरक़्क़ी और खुशहाली के लिए ख़ास दुआएंं की गई. नमाज़ के बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर मुबारकबाद दी और अल्लाह से अपनी इबादतों की क़ुबूलियत की दुआ मांगी.

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