100 साल पुराना है पिपरा का काली मंदिर, आदिवासी नृत्य आकर्षण का होता है केंद्र

100 साल पुराना है पिपरा का काली मंदिर, आदिवासी नृत्य आकर्षण का होता है केंद्र
– भव्य मेला का होगा आयोजन, तैयारी जोरों पर हसनगंज बलुआ पंचायत स्थित पीपरा गांव में 100 साल पुराना मां काली मंदिर की महिमा अपरंपार है. मंदिर से लोगों की असीम आस्था जुड़ी हुई है. प्रत्येक वर्ष काली पूजा में यहां भव्य मेले का आयोजन किया जाता है. साथ ही दो दिवसीय मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ आदिवासी नृत्य भी आयोजित किये जाते हैं. मेले में प्रखंड क्षेत्र के साथ-साथ पड़ोसी राज्य बंगाल, झारखंड से भी लोग यहां पहुंचते हैं. माता से मन्नतें मांगते हैं. कहा जाता है यहां मांगी गयी सभी कामना भक्तों की पुरी होती है. यहां सैकड़ों वर्षों से बलि प्रथा भी चली आ रही है. जो भी लोग यहां सच्चे हृदय से कुछ भी मांगते हैं, उन्हें मनोवांछित फल मिलता है. मंदिर कमेटी के सदस्यों द्वारा की जा रही तैयारियां पर मेला कमेटी अध्यक्ष रंजीत कुमार साह, कोषाध्यक्ष अभय कुमार साह, समाजसेवी धिरेन साह ने बताया कि काली पूजा के अवसर पर विशेष तैयारी की जा रही है. दो दिवसीय मेले को लेकर भव्य जागरण व नृत्य कला का आयोजन किया गया है. जिसे देखने के लिए हजारों की तादाद में लोगों की भीड़ उमड़ती है. साथ ही प्रतिमा स्थापित होते ही मां को बलि प्रदान की जाती है. मेला कमेटी के अध्यक्ष कहते हैं कि मां काली मंदिर से लोगों की असीम आस्था जुडी हुई. यहां की मां काली काफी शक्तिशाली है. मां के दरबार में जो भी अपनी व्यथा कष्ट और दुख दर्द लेकर आते हैं. माता उनके कष्टों को हर लेती है. इस अवसर पर धीरेन साह सहित ग्रामीण मौजूद थे.
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