अररिया–गलगलिया बइरबी-सायरंग नई रेल लाइन परियोजनाओं की टीमें सम्मानित

Updated at : 30 Oct 2025 7:24 PM (IST)
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अररिया–गलगलिया बइरबी-सायरंग नई रेल लाइन परियोजनाओं की टीमें सम्मानित

अररिया–गलगलिया बइरबी-सायरंग नई रेल लाइन परियोजनाओं की टीमें सम्मानित

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कटिहार रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 29 अक्तूबर को रेलवे बोर्ड, नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में कटिहार रेल मंडल के अररिया- गलगलिया और एनएफ रेलवे के बइरबी-सायरंग नई रेल लाइन परियोजनाओं के सफल समापन में शामिल रेलवे टीमों को सम्मानित किया. इस कार्यक्रम की शोभा सतीश कुमार, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष व मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अरुण कुमार चौधरी, महाप्रबंधक, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (निर्माण) अंजनी कुमार, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (निर्माण), हितेंद्र गोयल, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (निर्माण) तथा दोनों ऐतिहासिक परियोजनाओं से जुड़े अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और टीम सदस्यों ने बढ़ाई. पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अंतर्गत 110.75 किलोमीटर तक फैली अररिया- गलगलिया ब्रॉड गेज लाइन परियोजना, रेल संरक्षा आयुक्त सुमित सिंघल द्वारा 9 से 11 जुलाई 2025 तक किए गया. वैधानिक निरीक्षण के बाद पूर्ण रूप से पूरा हो गई है. 15 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कटिहार रेल मंडल के अररिया- गलगलिया (ठाकुरगंज) नई रेल लाइन खंड में ट्रेन सेवाओं को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. जो परियोजना के परिचालन में एक प्रमुख मील का पत्थर है. अब सभी खंडों, जिसमें रहमतपुर- पावाखाली खंड शामिल है. जिसे चालू कर दिया गया है. इस लाइन में 64 बड़े पुल, 264 छोटे पुल और 15 स्टेशन हैं. इसे 100 किमी प्रति घंटा की गति से ट्रेन संचालन के लिए अधिकृत किया गया है. जो बिहार और आसपास के क्षेत्रों में संपर्क को मजबूत करने तथा क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करने की उम्मीद है. सायरंग रेलवे परियोजना, पूर्वोत्तर के लिए मील का पत्थर बइरबी-सायरंग नई लाइन रेलवे परियोजना, पूर्वोत्तर के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर, मिजोरम की राजधानी आइजॉल को पहली बार रेल संपर्क प्रदान किया है. जिससे राज्य को भारत के राष्ट्रीय रेल नेटवर्क में एकीकृत किया गया है. इस परियोजना का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 13 सितंबर को आइजोल, मिजोरम में किए थे. 51.38 किलोमीटर तक फैली हुई यह परियोजना उल्लेखनीय इंजीनियरिंग का प्रदर्शन करती है. जिसमें 45 सुरंगें, 143 पुल (जिनमें से एक कुतुब मीनार से भी ऊंचा है) और हरतकी, कानपुई, मुअलखांग तथा सायरंग में चार नए स्टेशन शामिल हैं. क्षेत्र की चुनौतीपूर्ण भूभाग और प्रतिकूल मौसम के बावजूद, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (निर्माण) टीम ने इस जटिल परियोजना को सफलतापूर्वक निष्पादित किया, जिससे मिजोरम और व्यापक पूर्वोत्तर में व्यापार, पर्यटन तथा सामाजिक-आर्थिक विकास को बहुत बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

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