सदर अस्पताल में नॉर्मल डिलिवरी अधिक तो निजी अस्पतालों में अधिकांश हो रही सीजर डिलिवरी

Updated at : 31 Oct 2025 7:11 PM (IST)
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सदर अस्पताल में नॉर्मल डिलिवरी अधिक तो निजी अस्पतालों में अधिकांश हो रही सीजर डिलिवरी

सदर अस्पताल में नॉर्मल डिलिवरी अधिक तो निजी अस्पतालों में अधिकांश हो रही सीजर डिलिवरी

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– जनवरी से सितम्बर माह में 5224 गर्भवती महिला का सदर अस्पताल में डिलीवरी करायी गयी – जिसमें नॉर्मल डिलीवरी 4735 हुए, जबकि मात्र 489 महिलाओं का गंभीर अवस्था में सीजर हुआ कटिहार नॉर्मल डिलीवरी के मामले में सदर अस्पताल का एक बार फिर से बेहतर प्रदर्शन रहा है. गर्भवती महिलाओं के लिए सदर अस्पताल न मरीजों को बेहतर सुविधा दे रहा है. बल्कि नॉर्मल डिलीवरी के मामले में काफी बेहतर कार्य भी कर रहा है. सदर अस्पताल में सबसे ज्यादा गर्भवती महिला अपने इलाज के लिए पहुंचती है. ऐसे में अब सदर अस्पताल का कायाकल्प होने के बाद मदर चाइल्ड हॉस्पिटल तैयार होने पर मरीजों की तादाद भी बढ़ने लगी है. एक दिन में लगभग 200 से 250 महिला सिर्फ अपना रूटिंग जांच कराने के लिए और परामर्श के लिए ओपीडी में पहुंचती हैं. सदर अस्पताल में अपना इलाज कराने आने वाले मरीजों का आंकड़ा लिया जाए तो सबसे ज्यादा मरीज गर्भवती महिला शामिल है. जिस कारण सदर अस्पताल में सबसे ज्यादा लंबी लाइन महिलाओं की लगी रहती है. सदर अस्पताल गर्भवती महिलाओं के लिए वरदान से कम नहीं है. सदर अस्पताल में जहां निशुल्क परामर्श दिए जा रहे हैं तो निशुल्क दवाई के साथ सभी तरीके के जांच भी निशुल्क हो रही है. जिस कारण खासकर गर्भवती महिला का सदर अस्पताल में तांता लगा रहता है. इससे भी बड़ी बात यह है कि सदर अस्पताल नॉर्मल डिलीवरी के मामले में काफी अच्छा कार्य कर रहा है. 2025 का इस बार का आंकड़ा देखा जाए तो जनवरी से सितम्बर माह में 5224 गर्भवती महिला का सदर अस्पताल में डिलीवरी करायी गयी. जिसमें नॉर्मल डिलीवरी 4735 हुए है. जबकि मात्र 489 महिलाओं का गंभीर अवस्था में सीजर हुआ है. जबकि यही निजी नर्सिंग होम में आंकड़े के हिसाब से एक दिन में सिजेरियन डिलीवरी ज्यादा होती है. इधर अब मदर चाइल्ड हॉस्पिटल तैयार होने के बाद आने वाले समय में सदर अस्पताल में डिलीवरी के मामले में और बेहतर प्रदर्शन हो रहा है. सबसे ज्यादा अगस्त माह में डिलीवरी हुई है. महीने के आंकड़े के अनुसार नॉर्मल डिलीवरी का आंकड़ा लिया जाए तो जनवरी माह में 630, फरवरी में 526, मार्च में 511, अप्रैल में 382, मई में 331, जून में 373, जुलाई में 486, अगस्त में 761, तथा सितंबर महीने में 735 नॉर्मल डिलीवरी हुई है. सीजर की बात करें तो जनवरी में 72, फरवरी में 62, मार्च में 58, अप्रैल में 35, मई में 30, जून में 40, जुलाई में 63, अगस्त में 56 तथा सितंबर महीने में 73 की सीजर कर डिलीवरी कराई गई है. सदर अस्पताल के नए भवन निर्माण के बाद मातृ शिशु भवन 100 बेड का तैयार है. जहां गर्भवती माताओं को रहने में कोई भी परेशानी नहीं हो रही. ऐसे में बेड की संख्या भी बढ़ी है तो संसाधन भी बढ़ें है. निजी अस्पताल में ज्यादातर हो रहे सिजेरियन निजी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के दाखिल होने के साथ ही पैसों का खेल शुरू हो जाता है. ज्यादातर चिकित्सक सीजर करने के लिए ही दबाव बनाए रखते हैं. नॉर्मल डिलीवरी बहुत ही कम कराई जाती है. नॉर्मल डिलीवरी का खर्च 10 से 15 हजार आता है. जबकि सीजर का चार्ज 30 हजार से 35 हजार तक आता है. ऐसे में चिकित्सक सीजर कर डिलेवरी कराने में अपना जोर देते हैं. हालांकि कुछ निजी अस्पताल इस मामले से दूर है. वह मरीज की स्थिति को देखकर ही डिलीवरी कराते हैं. यदि मरीज गंभीर अवस्था में हो तभी उन्हें सीजर का राय देते हैं. अन्यथा नॉर्मल डिलेवरी ही कराई जाती है. लेकिन कई ऐसे निजी संस्थान है जहां पर यह गोरखधंधा खुलेआम चल रहा है. जिससे लोगों से मोटी रकम डिलेवरी के नाम पर ऐंठ ली जाती है. इसका सीधा उदाहरण सदर अस्पताल में होने वाले डिलीवरी से जान पड़ता है. जहां पर मात्र 10 महीने में होने वाले डिलीवरी मे मात्र के 10 प्रतिशत महिलाओं का ही सीजर कर डिलीवरी कराया है. ऐसे में बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है. सरकारी अस्पताल में सीजर कि इतनी कम संख्या है तो बाहर निजी अस्पतालों में इसकी संख्या जस्ट उल्टा क्यों है.

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