शिलान्यास के 4 महीने बाद भी नहीं बदली कुसियारी सड़क की सूरत, कीचड़ से सने बच्चों के कपड़े देख भड़के ग्रामीण, दी आंदोलन की चेतावनी

Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 03 Jun 2026 11:28 AM

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जर्जर सड़क की बदहाल हालत

Road Construction: कटिहार जिले के बरारी विधानसभा क्षेत्र के कुसियारी गांव में चुनाव से पहले विधायक विजय सिंह द्वारा किया गया सड़क का शिलान्यास महज चुनावी स्टंट साबित हो रहा है. चार महीने बीत जाने के बाद भी धरातल पर काम शुरू न होने से नाराज ग्रामीणों का सब्र अब टूट चुका है और उन्होंने स्थानीय प्रशासन व जनप्रतिनिधि के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है.

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कटिहार के समेली से हरिओम कुमार की रिपोर्ट

Road Construction: विकास के बड़े-बड़े दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर देखना हो, तो कटिहार जिले के समेली प्रखंड अंतर्गत बरारी विधानसभा क्षेत्र के कुसियारी गांव आ जाइए. यहाँ की मुख्य पीसीसी (PCC) सड़क आज भी अपनी बदहाली और प्रशासनिक उपेक्षा के आंसू रो रही है. गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले स्थानीय विधायक विजय सिंह ने बड़े लाव-लश्कर के साथ इस सड़क के सुंदरीकरण और विशेष मरम्मत कार्य का विधिवत शिलान्यास किया था. चमचमाते शिलापट्ट (शिलालेख) को देखकर दशकों से नारकीय जीवन जी रहे ग्रामीणों को आस बंधी थी कि अब उनके दिन बहुरेंगे. लेकिन चुनाव बीते करीब चार महीने से अधिक का समय हो गया है, मगर धरातल पर एक ईंट भी नहीं जोड़ी गई है. टूटी सड़क, गहरे गड्ढे और जलजमाव के बीच घुट-घुट कर जीने को मजबूर कुसियारी के ग्रामीणों का आक्रोश अब फूट पड़ा है.

स्कूली बच्चों और किसानों पर दोहरी मार, फसलें बर्बाद होने से आर्थिक नुकसान

इस बदहाल सड़क के कारण रोजमर्रा की जिंदगी में आ रही कठिनाइयों को निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:

  • कीचड़ से सन रहा मासूमों का भविष्य: कुसियारी गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली यह एकमात्र संपर्क सड़क (Connectivity Road) है. सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है और बीच राह में तब्दील हो चुके बड़े-बड़े गड्ढों में गंदा पानी जमा रहता है. सुबह स्कूल-कॉलेज जाने वाले मासूम छात्र-छात्राओं की यूनिफॉर्म रोज इस कीचड़ की वजह से खराब हो जाती है, जिससे अभिभावकों में भारी रोष है.
  • किसानों की कमर टूटी: कृषि प्रधान इलाका होने के कारण स्थानीय किसानों को अपनी धान, गेहूं, मक्का और हरी सब्जियों की नकदी फसल को खेतों से निकालकर कृषि मंडियों तक ले जाने के लिए इसी रास्ते पर निर्भर रहना पड़ता है. जर्जर रास्ते के कारण ट्रैक्टर और छोटी मालवाहक गाड़ियां आए दिन पलट जाती हैं. समय पर उपज मंडी न पहुंचने से फसलें खराब हो रही हैं, जिससे अन्नदाताओं को भारी आर्थिक चपत लग रही है.

एम्बुलेंस भी फंस जाती है गड्ढों में, ग्रामीणों ने पूछा- ‘सिर्फ फोटो खिंचवाने आते हैं नेता?’

चुनावी वादों पर तीखे सवाल: गांव के प्रबुद्ध नागरिकों में मो. हजरत, अफसर आलम, परवेज आलम, मो. इंतजार, मो. हाफिजुद्दीन, तबरेज़, मो. इफ्तेखार, अल्ताफ और रोजीव सहित दर्जनों ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “शिलान्यास के वक्त विधायक जी ने बड़े-बड़े वादे किए थे. आज चार महीने बाद सिर्फ वह सफेद पत्थर (शिलापट्ट) ही गांव की शोभा बढ़ा रहा है, ठेकेदार और कनीय अभियंता (JE) का कोई अता-पता नहीं है. इस रास्ते पर किसी गंभीर मरीज या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना जान जोखिम में डालने जैसा है; एम्बुलेंस भी गांव के बाहर ही खड़ी रह जाती है.”

मानसून से पहले काम शुरू न हुआ तो शिलापट्ट के सामने देंगे धरना: ग्रामीण

आंदोलन का अल्टीमेटम और निष्कर्ष:

ग्रामीणों ने साफ लहजे में जिला प्रशासन, ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को चेतावनी दी है कि जून का महीना शुरू हो चुका है और मानसून की प्री-मानसून बारिश कभी भी दस्तक दे सकती है. अगर पहली बारिश से पहले निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू नहीं कराया गया, तो पूरा गांव मुख्य सड़क पर उतरकर उसी शिलान्यास वाले पत्थर के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएगा.

सड़क किसी भी क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास की बुनियादी लाइफलाइन होती है, लेकिन कुसियारी की यह उपेक्षित सड़क आज सरकारी तंत्र की सुस्ती की गवाही दे रही है. अब देखना यह है कि ग्रामीणों का यह जायज गुस्सा नींद में सोए प्रशासनिक अधिकारियों और ठेकेदार को कब तक जगा पाता है. इस मौके पर संकुल के दर्जनों युवा और महिला प्रतिनिधि उपस्थित रहे.

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Divyanshu Prashant

लेखक के बारे में

By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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