देशभक्ति, बागान में मैंगो मैन ने आम के पौधे को तिरंगा से रंगा

देशभक्ति, बागान में मैंगो मैन ने आम के पौधे को तिरंगा से रंगा
अमीर सोहेल, कोढ़ा देशप्रेम अगर भाषणों और नारों से निकलकर मिट्टी, पसीने और हरियाली से जुड़ जाय, तो वह सिर्फ भावना नहीं, बल्कि एक जीवंत विचारधारा बन जाता है. कटिहार जिले के कोढ़ा प्रखंड अंतर्गत रौतारा पंचायत के किसान कालिदास बनर्जी ऐसे ही एक दुर्लभ उदाहरण हैं. जिनकी जीवन यात्रा संघर्ष, संवेदना, राष्ट्रप्रेम और प्रकृति से गहरे जुड़ाव की मिसाल है. आज वे पूरे इलाके में मैंगो मैन के नाम से जाने और पहचाने जाते हैं. 31 अक्टूबर 1968 को रौतारा पंचायत में जन्मे कालिदास बनर्जी का बचपन खेतों, मिट्टी और पेड़-पौधों के बीच बीता. उनके पिता स्व गौरांग चंद्र बनर्जी न केवल एक कुशल किसान थे. उन्होंने गांव में एक नर्सरी भी विकसित कर रखी थी. पेड़-पौधों से प्रेम और खेती के प्रति सम्मान कालिदास को विरासत में मिला. बचपन में खेतों और नर्सरी के बीच बिताए गये दिन ही आगे चलकर उनके पूरे जीवन की दिशा तय करने वाले साबित हुए. कालिदास बनर्जी के भीतर देशप्रेम की भावना बहुत कम उम्र में ही आकार लेने लगी थी. वे बताते हैं कि कक्षा सातवीं से ही वे राष्ट्रीय पर्वों को लेकर बेहद सक्रिय रहते थे. 15 अगस्त और 26 जनवरी उनके लिए सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और गर्व का विषय थे. जीवन में आर्थिक कठिनाइयां आईं, पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ीं. लेकिन देश और मिट्टी से उनका रिश्ता कभी कमजोर नहीं पड़ा. 2003 में उनके जीवन में एक नया मोड़ आया. जब उनका विवाह बंगाल के सिलीगुड़ी में संगीता बनर्जी से हुआ. शादी के दो साल बाद परिवार में खुशियों ने दस्तक दी. लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. कुछ पलों की खुशी के बाद वह मुस्कान हमेशा के लिए छिन गयी. यह गहरा दुख ऐसा था, जिसने पूरे परिवार को भीतर तक झकझोर कर रख दिया. पीड़ा के बाद कालिदास बनर्जी और उनकी धर्मपत्नी ने खुद को पूरी तरह कृषि, आम के बागान और प्रकृति को समर्पित कर दिया. आम के पेड़ उनके लिए सिर्फ फसल नहीं रहे, बल्कि जीवन का सहारा बन गये. धीरे-धीरे ये पेड़ उनके दर्द के साक्षी, उनके धैर्य के साथी और भविष्य की उम्मीद बनते चले गये. कालिदास बनर्जी पूरे इलाके में मैंगो मैन के नाम से प्रसिद्ध हैं. आम की उन्नत खेती, नई-नई वैरायटी, प्रयोगधर्मी सोच और आम के जरिए देशभक्ति का संदेश देने के कारण लोग उन्हें सम्मान से मैंगो मैन कहते हैं. कोढ़ा, रौतारा और आसपास के क्षेत्रों में जब भी आम के बागान या आधुनिक खेती की चर्चा होती है, तो सबसे पहले मैंगो मैन कालिदास बनर्जी का नाम लिया जाता है. लगातार तीन वर्षों से वे गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने आम के बागान के पेड़ों के तनों को तिरंगे रंगों में रंगते आ रहे हैं. उनका मानना है कि जिस तरह देश के सैनिक सरहद पर राष्ट्र की रक्षा करते हैं. उसी तरह किसान खेतों में देश की नींव मजबूत करते हैं. कहते हैं कालिदास बनर्जी तिरंगे रंगों से सजे आम के पेड़ बच्चों के लिए एक जीवंत पाठशाला बन जाते हैं. जहां वे प्रकृति के साथ देशभक्ति भी सीखते हैं. कालिदास बनर्जी के आम के बागान की एक और अनोखी पहचान है. उनके बागान में कुल 29 आम की वैरायटी लगी हुई हैं. इनमें से 26 वैरायटी उनके दादा के समय से चली आ रही हैं. जबकि तीन वैरायटी उन्होंने स्वयं विकसित की हैं. इन वैरायटी के नाम भी उनके राष्ट्रप्रेम को दर्शाते हैं. एक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर, दूसरी स्वामी विवेकानंद के नाम पर और तीसरी उनके पिता के मित्र चितरंजन दास के नाम पर है. वे गर्व से कहते हैं कि उन्होंने आज तक अपने या अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम पर कोई भी वैरायटी नहीं रखी. इससे पहले उन्होंने एक वैरायटी देश के सैनिकों को समर्पित की थी. उनके लिए देश और उसके महापुरुष व्यक्तिगत पहचान से कहीं ऊपर हैं. इतना ही नहीं, कालिदास बनर्जी बिहार में कॉफी उत्पादन करने वाले शुरुआती किसानों में भी शामिल हैं. उनके बागान में आम के अलावा चंदन, रुद्राक्ष, सिंदूर,सेब, संतरा, अमरूद समेत कई दुर्लभ और उपयोगी वृक्ष लगे हुए हैं. उनका बगीचा आज एक आदर्श कृषि मॉडल के रूप में देखा जाता है.
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लेखक के बारे में
By राजकिशोर
राजकिशोर प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के कटिहार कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.
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